पीतल नगरी में खास मसालों और मक्खन के साथ परोसी जाती है मुरादाबादी मूंग दालतुला राशिफल 25 सितंबर 2026: राहु और मंगल के प्रभाव से करियर में आएगी गति, वित्तीय संतुलन और रिश्तों पर दें ध्यानअमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल और भू-राजनीतिक तनाव से यूरो पस्त, डॉलर मजबूतगोवा वोटर लिस्ट विवाद पर चुनाव आयोग का रुख साफ, मतदाता सूची संशोधन पर विपक्ष ने उठाए सवालनागोया में भारत के पास आज कई मेडल पक्के करने का मौका, निशानेबाजी और कबड्डी पर टिकी निगाहेंशी जिनपिंग के स्वागत में व्हाइट हाउस का शाही मेन्यू, फ्रेंच स्वाद के साथ परोसे गए खास व्यंजनराजस्थान के तीन बड़े शहरों में महापौर चुनने की जंग, जयपुर में भाजपा और कांग्रेस आमने-सामनेकश्मीरी गेट के पास ई-रिक्शा रोककर लूटपाट, चाकू के वार से युवक की जान गई और दो जख्मीछत और बालकनी पर सब्जियां उगाते समय न करें केमिकल का छिड़काव, पूसा विशेषज्ञ ने सुझाए जैविक खाद के आसान उपायबिटगेट पर बड़ा साइबर हमला, हॉट वॉलेट से उड़ाए गए 351 मिलियन डॉलर
बालोद में गन्ने की फसल पर लाल सड़न का संकट, कृषि वैज्ञानिक ने बताए बचाव के तरीकेछत्तीसगढ़
21 सित॰ 2026, 6:24 am (4 दिन पहले)· 0

बालोद में गन्ने की फसल पर लाल सड़न का संकट, कृषि वैज्ञानिक ने बताए बचाव के तरीके

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गन्ने की खेती पर रेड रॉट बीमारी का खतरा बढ़ गया है, जिससे बचाव के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने नियमित निगरानी और समय पर दवा छिड़काव की सलाह दी है।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में गन्ने की बड़े पैमाने पर खेती करने वाले किसानों के खेतों में इन दिनों लाल सड़न यानी रेड रॉट बीमारी के बढ़ते संकेत मिल रहे हैं। पौधों में इस गंभीर संक्रमण के फैलने की आशंका को देखते हुए कृषि विशेषज्ञों ने सतर्कता बरतने की अपील की है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि किसान अपने खेतों का लगातार जायजा लें और बीमारी के शुरुआती दौर में ही उचित कदम उठाएं, तो पूरे खेत को बर्बाद होने से आसानी से बचाया जा सकता है।

गन्ने के भीतरी हिस्से और पत्तियों पर असर

बालोद स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केआर साहू ने इस बीमारी की गंभीरता पर विस्तार से जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेड रॉट गन्ने की खेती को नुकसान पहुंचाने वाले सबसे प्रमुख और खतरनाक रोगों में गिना जाता है। इस रोग के प्रभावी होने पर गन्ने के आंतरिक भाग में सड़न उत्पन्न होने लगती है। जब यह बीमारी शुरुआती दौर में होती है, तब पौधों की पत्तियों के किनारों पर लाल रंग के धब्बे अथवा निशान नजर आने लगते हैं। यदि इस पर तुरंत ध्यान न दिया जाए, तो संक्रमण धीरे-धीरे पौधे के बाकी हिस्सों तक भी फैल जाता है, जिसका सीधा और गंभीर असर गन्ने की गुणवत्ता और कुल पैदावार पर पड़ता है।

ये भी पढ़ें

खेतों की लगातार निगरानी और पहचान के नियम

क्षेत्र के किसानों को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने खेतों में खड़े गन्ने के हर पौधे की बारीक जांच करें। खासकर पत्तियों के किनारों पर उभरने वाले लाल निशानों, पौधों की सामान्य कमजोरी अथवा किसी भी प्रकार की सड़न के लक्षणों पर नजर रखी जानी चाहिए। डॉ केआर साहू का कहना है कि रोग की पहचान जितनी जल्दी होगी, नियंत्रण के रासायनिक और जैविक उपाय भी उतने ही कारगर साबित होंगे। लक्षण दिखने पर किसानों को फौरन विशेषज्ञों से संपर्क साधने की सलाह दी गई है।

नियंत्रण के लिए सुझाई गई दवाएं और छिड़काव की विधि

रेड रॉट की रोकथाम के लिए वैज्ञानिक उपायों की जानकारी देते हुए डॉ साहू ने रासायनिक छिड़काव का ब्योरा दिया है। उनके अनुसार, लाल सड़न पर काबू पाने के लिए टेबुकोनाजोल अथवा एजोल का छिड़काव किया जा सकता है। इसके लिए एक लीटर पानी में एक एमएल दवा का घोल तैयार करके प्रभावित गन्ने पर छिड़कने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, गन्ने में कीट प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए थायोमेथोक्साम को एक ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से मिलाने और बिफेंथ्रिन का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया गया है। विशेषज्ञों ने यह भी आगाह किया है कि किसान दवा का घोल तैयार करते समय स्थानीय स्तर पर कृषि विशेषज्ञों की सलाह जरूर लें और उत्पाद के पैकेट पर छपे दिशा-निर्देशों का सावधानीपूर्वक पालन करें।

संक्रमण रोकने के लिए त्वरित कदम जरूरी

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ केआर साहू ने जोर देकर कहा है कि फसल में संक्रमण का कोई भी संकेत मिलते ही बिना किसी देरी के उपचार शुरू करना चाहिए। खेत में देरी करने से यह फफूंद जनित संक्रमण आसपास के स्वस्थ पौधों तक फैल जाता है। समय पर सही दवा का छिड़काव करके न केवल बीमारी के विस्तार को थामा जा सकता है, बल्कि गन्ने की फसल को होने वाले भारी आर्थिक नुकसान से भी सुरक्षित रखा जा सकता है।

सवाल-जवाब

गन्ने में रेड रॉट बीमारी के शुरुआती लक्षण क्या हैं?
इस रोग के शुरुआती चरण में गन्ने के पौधों की पत्तियों के किनारों पर लाल रंग के निशान दिखाई देने लगते हैं और पौधे कमजोर होने लगते हैं।
रेड रॉट से गन्ने के पौधे को क्या नुकसान पहुंचता है?
इस बीमारी के कारण गन्ने के भीतरी हिस्से में सड़न पैदा हो जाती है, जिससे फसल की गुणवत्ता और पैदावार दोनों प्रभावित होते हैं।
लाल सड़न की रोकथाम के लिए किस दवा के छिड़काव की सलाह दी गई है?
डॉ केआर साहू के अनुसार, टेबुकोनाजोल या एजोल को एक लीटर पानी में एक एमएल मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है।
फसल में कीट नियंत्रण के लिए किन दवाओं का उपयोग बताया गया है?
कीट प्रबंधन के लिए एक ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से थायोमेथोक्साम और बिफेंथ्रिन के उपयोग का सुझाव दिया गया है।
दवा का प्रयोग करते समय किसानों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए और उत्पाद के लेबल पर दिए गए निर्देशों के अनुसार ही सही मात्रा में घोल तैयार करना चाहिए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Riya Menon@riya-menon·3 दिन पहले

बालोद में गन्ने की फसल पर रेड रॉट का संकट न केवल किसानों की आजीविका के लिए चिंता का विषय है, बल्कि यह सीधे तौर पर चीनी मिलों की आपूर्ति श्रृंखला और हमारी फूड सप्लाई चेन को भी प्रभावित कर सकता है। गन्ने की गुणवत्ता गिरने से चीनी और गुड़ उत्पादन पर असर पड़ेगा, जिससे बाजार में कीमतों में उतार-चढ़ाव आ सकता है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा बताए गए रसायनिक छिड़काव और समय पर निगरानी के उपाय इस संकट से निपटने के लिए बेहद जरूरी हैं, ताकि खाद्य उद्योग में कच्चे माल की कमी न हो।

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

बालोद में गन्ने की फसल पर रेड रॉट का यह संकट केवल एक कृषि समस्या नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और चीनी मिलों की आपूर्ति श्रृंखला के लिए भी गंभीर आर्थिक झटका साबित हो सकता है। शुरुआती दौर में ही टेबुकोनाजोल और थायोमेथोक्साम जैसे रसायनों के उपयोग से न केवल फसल नुकसान को रोका जा सकता है, बल्कि किसानों की लागत और कृषि ऋण अदायगी पर पड़ने वाले दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

गन्ने की फसल पर आया यह संकट सीधे तौर पर ग्रामीण क्रय शक्ति और कृषि ऋणों के समय पर भुगतान को प्रभावित करता है। यदि स्थानीय प्रशासन और कृषि विभाग ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में वैज्ञानिक सलाह और रसायनों की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं की, तो किसानों की आय पर गहरा संकट आ सकता है, जिसका असर आगामी सत्र की बुवाई पर भी पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

बालोद में गन्ने की फसल पर रेड रॉट का यह संकट केवल कृषि हानि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की आजीविका पर सीधा हमला है। फफूंद जनित इस संक्रमण का तेजी से फैलना यह संकेत देता है कि यदि स्थानीय स्तर पर तुरंत निगरानी समितियां नहीं बनाई गईं और कृषि विज्ञान केंद्र की सलाह का जमीनी स्तर पर सख्ती से पालन नहीं हुआ, तो यह संकट पड़ोसी जिलों के गन्ना उत्पादक क्षेत्रों को भी अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने का बड़ा खतरा पैदा हो जाएगा।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

गन्ने की फसल पर रेड रॉट का यह संक्रमण ग्रामीण आजीविका के लिए एक बड़ी चेतावनी है। यदि शुरुआती दौर में ही कड़े कदम नहीं उठाए गए और किसानों तक सही रासायनिक घोल की जानकारी जमीन पर नहीं पहुंची, तो यह रोग तेजी से फैलकर पूरी उपज को तबाह कर सकता है। समय रहते कृषि विज्ञान केंद्रों की सलाह का पालन करना ही इस संकट से उबरने का एकमात्र मार्ग है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp