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बालोद में किसान ने खेत में बनवाया अनोखा शहीद स्मारक, 10 लाख रुपये खर्च कर लगाईं 18 प्रतिमाएंछत्तीसगढ़
23 सित॰ 2026, 4:24 pm (2 दिन पहले)· 0

बालोद में किसान ने खेत में बनवाया अनोखा शहीद स्मारक, 10 लाख रुपये खर्च कर लगाईं 18 प्रतिमाएं

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में देवगहन गांव के किसान लोकेंद्र साहू ने अपने खेत में 10 लाख रुपये की लागत से 18 शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित की हैं, जिसे वे भविष्य में बढ़ाकर एक हजार प्रतिमाओं तक ले जाना चाहते हैं।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित देवगहन गांव के एक युवा किसान लोकेंद्र साहू ने देश की सीमाओं और आंतरिक सुरक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के प्रति अनोखा सम्मान प्रकट किया है। उन्होंने अपनी निजी बचत से करीब 10 लाख रुपये खर्च करके अपने खेत के एक हिस्से को शहीद स्मारक का रूप दे दिया है। खेत की जमीन पर मुख्य सड़क के किनारे फिलहाल 18 वीर जवानों की प्रतिमाएं स्थापित कराई गई हैं, ताकि वहां से गुजरने वाले हर व्यक्ति को इन जांबाजों की शहादत की याद दिलाई जा सके।

माटी के कर्ज और शहादत के प्रति समर्पण की अनोखी सोच

लोकेंद्र साहू के अनुसार, देश के सुरक्षा बल सीमाओं पर अपने प्राणों की आहुति देकर नागरिकों को सुरक्षित रखते हैं। एक किसान के रूप में उनके मन में हमेशा यह भावना रहती थी कि अन्नदाता होने के नाते समाज और देश के रक्षकों के प्रति उनका भी एक गहरा नैतिक दायित्व बनता है। इसी विचार ने उन्हें अपनी कृषि भूमि का उपयोग राष्ट्रीय नायकों के सम्मान में करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा इन मूर्तियों के निर्माण और स्थापना पर लगाया है।

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कारगिल से लेकर पुलवामा तक के अमर बलिदानियों की स्मृतियां

सड़क किनारे कतारबद्ध की गई इन प्रतिमाओं में भारतीय इतिहास के कई प्रमुख अभियानों और आतंकी हमलों में शहीद हुए जवानों को शामिल किया गया है। इनमें कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, सियाचिन ग्लेशियर की विषम परिस्थितियों में जान गंवाने वाले सैनिक, पुलवामा हमला और अन्य आतंकी विरोधी अभियानों में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शामिल हैं। सड़क मार्ग से आने-जाने वाले राहगीर और विशेषकर युवा पीढ़ी इन प्रतिमाओं के पास रुककर नमन करती है। इस पूरे प्रयास का मुख्य ध्येय नई पीढ़ी के दिलों में देशभक्ति और सुरक्षा बलों के त्याग के प्रति कृतज्ञता की भावना को सुदृढ़ करना है।

भव्य अनावरण की तैयारी और खेल जगत से जुड़ने की चाह

खेत में सभी 18 प्रतिमाएं बनकर तैयार हो चुकी हैं, किंतु इनका विधिवत सार्वजनिक अनावरण अभी बाकी है। लोकेंद्र साहू ने इस औपचारिक उद्घाटन समारोह के लिए प्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और केंद्रीय मंत्री से पत्राचार करने के साथ-साथ व्यक्तिगत रूप से भेंट कर समय मांगा, लेकिन अब तक कोई निश्चित समय तय नहीं हो सका है। स्वयं पूर्व में क्रिकेट खेल चुके लोकेंद्र की दिली इच्छा है कि इस पुनीत स्थल का लोकार्पण किसी नामचीन क्रिकेटर के कर-कमलों से हो। इसी कड़ी में वे वर्ष 2024 में सचिन तेंदुलकर से मुलाकात कर चुके हैं। इसके अतिरिक्त 14 सितंबर 2026 को वे भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव के आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने सूर्यकुमार यादव को उनकी एक आदमकद प्रतिमा भेंट की और स्मारक के अनावरण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया।

एक एकड़ भूमि पर एक हजार प्रतिमाएं स्थापित करने का लक्ष्य

इस प्रेरक अभियान को लोकेंद्र साहू केवल 18 मूर्तियों तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनकी भविष्य की योजना अपनी पूरी एक एकड़ कृषि भूमि को एक विशाल राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल के रूप में विकसित करने की है। उनका संकल्प है कि वे इस परिसर में लगभग एक हजार वीर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करेंगे। लोकेंद्र का मानना है कि आने वाली पीढ़ियों को अपने इतिहास और सैनिकों के बलिदान से जोड़े रखने के लिए यह परिसर एक जीवंत केंद्र साबित होगा।

सवाल-जवाब

खेत में शहीद स्मारक का निर्माण किसने और कहां किया है?
छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित देवगहन गांव के युवा किसान लोकेंद्र साहू ने अपने खेत में इस शहीद स्मारक का निर्माण किया है।
इस स्मारक पर कितनी लागत आई है और कितनी प्रतिमाएं लगाई गई हैं?
लोकेंद्र साहू ने अपनी निजी कमाई से करीब 10 लाख रुपये खर्च कर खेत में सड़क किनारे 18 वीर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित कराई हैं।
किन-किन घटनाओं के शहीदों को इस स्मारक में स्थान दिया गया है?
यहां कारगिल युद्ध, 26/11 मुंबई आतंकी हमला, सियाचिन ग्लेशियर, पुलवामा हमला और अन्य आतंकी घटनाओं में शहीद हुए जवानों की प्रतिमाएं शामिल हैं।
क्या इस स्मारक का औपचारिक अनावरण हो चुका है?
नहीं, प्रतिमाएं बनकर तैयार हैं लेकिन इनका औपचारिक अनावरण अभी नहीं हुआ है।
अनावरण के लिए लोकेंद्र साहू ने किन क्रिकेटरों से संपर्क किया है?
वे वर्ष 2024 में सचिन तेंदुलकर से मिल चुके हैं और 14 सितंबर 2026 को उन्होंने पूर्व भारतीय कप्तान सूर्यकुमार यादव से मिलकर उन्हें अनावरण के लिए आमंत्रित किया।
लोकेंद्र साहू का भविष्य का संकल्प क्या है?
वे भविष्य में अपनी एक एकड़ कृषि भूमि पर करीब एक हजार वीर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करना चाहते हैं।
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टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·1 दिन पहले

अपने खेत में शहीदों की इतनी मूर्तियाँ लगाना वाकई दिल को छू लेने वाला काम है, लेकिन क्या प्रशासन या सरकार से इस नेक काम के लिए कभी कोई वित्तीय मदद मिली या वे अकेले ही सब संभाल रहे हैं?

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

लोकेंद्र साहू ने अपनी मेहनत की कमाई से खेत में शहीदों की मूर्तियां लगाकर वाकई दिल जीत लिया है। हालांकि यह समझना मुश्किल है कि एक एकड़ में एक हजार प्रतिमाएं लगाने का उनका सपना आर्थिक और प्रशासनिक रूप से कैसे पूरा होगा। क्या सरकार या कोई संस्था इस नेक काम में उनकी मदद के लिए आगे आएगी?

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

अर्जुन जी, बात तो सही है आपकी। दस लाख में अठारह मूर्तियां लग गईं, तो एक हजार के लिए तो तगड़ा फंड चाहिए होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

अन्नदाता ने अपनी खून-पसीने की कमाई से देश के असली रक्षकों को जो सम्मान दिया है, वह वाकई दिल को छू लेने वाला है। ऐसी सोच हर किसी में नहीं होती।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

सही कहा करण, आजकल ऐसा जज्बा मिलना मुश्किल है। किसान भाई ने दिल जीत लिया।

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