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बालोद में पानी पीने पर भड़के आईटीआई शिक्षक, लोहे के बेलचे से पांच छात्रों को पीटाछत्तीसगढ़
20 सित॰ 2026, 1:18 pm (5 दिन पहले)· 2

बालोद में पानी पीने पर भड़के आईटीआई शिक्षक, लोहे के बेलचे से पांच छात्रों को पीटा

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में विश्वकर्मा जयंती के भंडारे के दौरान क्लासरूम में पानी पीने गए छात्रों पर शिक्षक ने लोहे के बेलचे से हमला कर दिया। घायल छात्रों के परिजनों के विरोध के बाद पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के अंतर्गत आने वाले दल्लीराजहरा में एक तकनीकी संस्थान से सनसनीखेज घटना सामने आई है। यहां स्थित आईटीआई में पढ़ने वाले छात्रों को एक मामूली बात पर बेरहमी से दौड़ा-दौड़ाकर पीटा गया। संस्थान में तैनात एक शिक्षक पर लोहे के बेलचे से हमला करने का गंभीर आरोप लगा है, जिसमें कई छात्र चोटिल हुए हैं। इस हिंसक व्यवहार से आक्रोशित परिजनों के हंगामे और एक पीड़ित छात्र की तहरीर के आधार पर स्थानीय पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

विश्वकर्मा जयंती के भंडारे के दौरान हुआ विवाद

यह पूरा वाकया दल्लीराजहरा थाना क्षेत्र में स्थित आईटीआई परिसर का है। 17 सितंबर को संस्थान में विश्वकर्मा जयंती का पावन पर्व मनाया जा रहा था। पूजा-अर्चना संपन्न होने के बाद परिसर में भंडारे के लिए भोजन तैयार किया जा रहा था, जिसमें छात्र भी मौजूद थे। इसी दौरान प्यास लगने पर एक छात्र पानी पीने के उद्देश्य से पास के क्लासरूम में चला गया। छात्र का कमरे में जाना वहां मौजूद शिक्षक फनील साहू को नागवार गुजरा और वह अचानक अपना आपा खो बैठे। प्रत्यक्षदर्शियों और पीड़ित छात्रों के अनुसार शिक्षक ने बिना किसी गंभीर कारण के अत्यंत उग्र रुख अख्तियार कर लिया।

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लोहे के औजार से हमला और पांच छात्रों की पिटाई

क्रोध में आगबबूला शिक्षक फनील साहू ने वहां काम में इस्तेमाल होने वाला लोहे का बेलचा उठा लिया। आरोप है कि शिक्षक ने क्लासरूम और आसपास मौजूद पांच छात्रों को निशाना बनाया और उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। लोहे के भारी बेलचे से किए गए इस प्रहार से छात्रों में चीख-पुकार मच गई और कई छात्र जख्मी हो गए। घटना के तुरंत बाद सहमे हुए छात्र किसी तरह अपने घर पहुंचे और अपने माता-पिता व परिजनों को शिक्षक के इस हिंसक बर्ताव की पूरी आपबीती सुनाई।

परिजनों का फूटा गुस्सा, पुलिस ने दर्ज किया केस

अपने बच्चों के साथ हुई इस बर्बरता की खबर मिलते ही परिजन भारी संख्या में आईटीआई पहुंचे और शिक्षक के आचरण पर कड़ा रोष जताया। परिजनों ने परिसर में जमकर नाराजगी प्रकट की और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठाई। इसके पश्चात एक छात्र ने थाने पहुंचकर घटना की लिखित शिकायत दी, जिस पर राजहरा पुलिस ने त्वरित संज्ञान लेते हुए आरोपी शिक्षक के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर लिया।

बालोद के एएसपी चंद्रकांत गवर्ना ने आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि छात्र की ओर से दी गई शिकायत में स्पष्ट उल्लेख है कि 17 सितंबर को विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर भंडारे की तैयारी चल रही थी। पानी पीने के लिए कक्षा में जाने पर शिक्षक फनील साहू बुरी तरह भड़क गए और उन्होंने उपस्थित छात्रों को लोहे के बेलचे से पीटा। एएसपी के अनुसार पुलिस ने औपचारिक शिकायत के आधार पर अपराध पंजीबद्ध कर लिया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आगे बढ़ाई जा रही है।

सवाल-जवाब

बालोद के आईटीआई में छात्रों के साथ मारपीट की यह घटना कब और कहां हुई?
यह घटना 17 सितंबर को छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में स्थित दल्लीराजहरा आईटीआई परिसर में विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर हुई।
छात्रों पर हमला करने का आरोप किस शिक्षक पर लगा है?
छात्रों पर लोहे के बेलचे से हमला करने का आरोप आईटीआई में पदस्थ शिक्षक फनील साहू पर लगा है।
शिक्षक और छात्रों के बीच विवाद किस बात को लेकर शुरू हुआ था?
विवाद तब शुरू हुआ जब भंडारे की तैयारी के दौरान एक छात्र पानी पीने के लिए क्लासरूम के अंदर चला गया, जिससे शिक्षक नाराज हो गए।
इस हमले में कुल कितने छात्र घायल हुए हैं?
आरोपी शिक्षक ने लोहे के बेलचे से वहां मौजूद पांच छात्रों की पिटाई की, जिससे वे घायल हुए।
पुलिस ने इस पूरे मामले में अब तक क्या कानूनी कदम उठाया है?
बालोद के एएसपी चंद्रकांत गवर्ना के अनुसार छात्र की शिकायत पर राजहरा पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·4 दिन पहले

तकनीकी शिक्षा संस्थान देश के औद्योगिक विकास के लिए कुशल कार्यबल तैयार करते हैं, लेकिन बालोद की यह घटना दर्शाती है कि शैक्षणिक परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षकों के मानसिक आचरण की निगरानी में कितनी गंभीर चूक हो रही है। पानी जैसी बुनियादी जरूरत पर हिंसात्मक प्रतिक्रिया न केवल आपराधिक कृत्य है, बल्कि वोकेशनल संस्थानों में प्रशासनिक जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े करती है। इस मामले में पुलिस की त्वरित एफआईआर एक जरूरी कदम है, लेकिन भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए शिक्षकों के नियमित व्यवहारिक मूल्यांकन और परिसरों में कड़े अनुशासनिक मानदंड लागू करने की सख्त आवश्यकता है।

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·4 दिन पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह कहना आवश्यक है कि दक्षिण एशियाई क्षेत्र में व्यावसायिक एवं तकनीकी संस्थान युवाओं के कौशल विकास और रोजगार का मुख्य आधार हैं। लेकिन जब शैक्षणिक परिसरों में बुनियादी सुविधाओं पर ऐसी हिंसक घटनाएं होती हैं, तो यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह जाता, बल्कि संस्थागत नीतियों और शिक्षकों के मानसिक स्वास्थ्य परीक्षण की विफलता को उजागर करता है। यदि वोकेशनल ट्रेनिंग सेंटरों में छात्रों के लिए सुरक्षित माहौल नहीं बनाया गया, तो इसका सीधा असर युवाओं की भागीदारी और औद्योगिक विकास पर पड़ेगा। प्रशासन को केवल एफआईआर तक सीमित न रहकर सख्त व्यवहारिक मानक तय करने होंगे।

Rohan Verma@rohan-verma·4 दिन पहले

शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन के नाम पर इस प्रकार की बर्बर हिंसा छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। एक शिक्षक का मामूली बात पर उग्र होना न केवल आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह दर्शाता है कि संस्थानों में कर्मचारियों के व्यवहारिक मूल्यांकन और मानसिक संतुलन की अनदेखी हो रही है। इस मामले में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ विभागीय स्तर पर भी तत्काल कड़ी अनुशासनात्मक मिसाल कायम करना आवश्यक है। यदि ऐसे मामलों में कठोर संदेश नहीं दिया गया, तो तकनीकी व व्यावसायिक शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों का विश्वास और सुरक्षा चक्र दोनों प्रभावित होंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·4 दिन पहले

रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह घटना राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग और कौशल विकास प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल उठाती है। सरकारी आईटीआई जैसे संस्थानों में सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करना सीधे तौर पर लोक नीति और शासन का विषय है। केवल एफआईआर दर्ज करना काफी नहीं है; राज्य सरकार को कौशल विकास संस्थानों में पारदर्शी शिकायत निवारण प्रणाली, कर्मचारी आचरण ऑडिट और कड़ी प्रशासनिक निगरानी के लिए राज्यव्यापी नीतिगत दिशानिर्देश जारी करने चाहिए, ताकि सार्वजनिक संस्थानों पर जनता का विश्वास बना रहे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·4 दिन पहले

शैक्षणिक संस्थानों में विद्यार्थियों की सुरक्षा कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक संरक्षा का एक महत्वपूर्ण पहलू है। लोहे के बेलचे जैसे भारी और खतरनाक औजार से हमला करना महज संस्थागत अनुशासनहीनता का मामला नहीं, बल्कि गंभीर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में पुलिस को खतरनाक हथियारों से हमला करने और चोट पहुँचाने की कठोर कानूनी धाराओं के तहत त्वरित जांच पूरी करनी चाहिए। आपराधिक मामले दर्ज होने के साथ-साथ विभागीय स्तर पर सख्त निलंबन व कानूनी कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

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