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बाड़मेर में अनोखा नंदोत्सव, राधा के भाव में श्रीकृष्ण को रिझाती हैं महिलाएंराजस्थान
10 सित॰ 2026, 11:28 am (15 दिन पहले)· 1

बाड़मेर में अनोखा नंदोत्सव, राधा के भाव में श्रीकृष्ण को रिझाती हैं महिलाएं

बाड़मेर के वीर बालाजी हनुमान मंदिर में 200 साल पुरानी परंपरा के तहत नंदोत्सव का आयोजन किया गया। इस उत्सव में महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर भजन-कीर्तन और नृत्य के जरिए श्रीकृष्ण के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट की।

पश्चिमी सीमा से सटे बाड़मेर शहर के सदर बाजार इलाके में स्थित वीर बालाजी हनुमान मंदिर में नंदोत्सव का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय और उत्साह से ओतप्रोत नजर आया। इस खास आयोजन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक पोशाक पहनकर राधा के भाव में श्रीकृष्ण की आराधना की। भजन-कीर्तन की मधुर धुनों और सामूहिक नृत्य के बीच पूरा मंदिर परिसर कृष्णमय हो गया, जहां चारों तरफ श्रद्धा और उल्लास की लहरें दिखाई दीं।

दो सौ साल पुरानी धार्मिक परंपरा

स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच वीर बालाजी हनुमान मंदिर के इस नंदोत्सव का बहुत बड़ा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। यह अनूठी परंपरा करीब दो सौ वर्षों से लगातार चली आ रही है, जिसमें हर पीढ़ी के लोग पूरी निष्ठा के साथ हिस्सा लेते हैं। हालांकि समय के बीतने के साथ इस आयोजन के तौर-तरीकों में कुछ बदलाव आए हैं, लेकिन इसके प्रति लोगों की श्रद्धा और भक्ति की भावना में कोई कमी नहीं आई है। नंदोत्सव के इन आयोजनों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप और उनके जन्मोत्सव से जुड़े विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाते हैं।

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भजनों और नृत्य से सजी महफिल

मंदिर परिसर में लगातार गूंजने वाले भजन-कीर्तन के बीच महिलाओं की टोलियां पारंपरिक भक्ति गीतों पर झूमती हुई नजर आती हैं। मंदिर में मौजूद हर शख्स इस आध्यात्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा हुआ दिखाई देता है। महिलाओं के पारंपरिक लिबास, भजनों की स्वर लहरियां और उनका सामूहिक नृत्य वहां मौजूद हर किसी का मन मोह लेता है। वीर बालाजी हनुमान मंदिर कमेटी से जुड़ी संगीता राठी के अनुसार, महिलाएं खुद को राधा के भाव से जोड़कर श्रीकृष्ण के प्रति अपने प्रेम, विरह और समर्पण को भजनों और नृत्य के माध्यम से साझा करती हैं। इन धार्मिक गीतों के दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बनता है।

सवाल-जवाब

बाड़मेर में यह नंदोत्सव किस मंदिर में आयोजित किया गया?
यह नंदोत्सव बाड़मेर के सदर बाजार स्थित वीर बालाजी हनुमान मंदिर में आयोजित किया गया।
यह परंपरा कितने साल पुरानी है?
यह परंपरा लगभग 200 साल पुरानी है, जिसे स्थानीय श्रद्धालु पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं।
इस उत्सव में महिलाएं किस रूप में भक्ति करती हैं?
महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजकर राधा के भाव में श्रीकृष्ण के प्रति अपना प्रेम और समर्पण व्यक्त करती हैं।
मंदिर कमेटी से जुड़ी संगीता राठी के अनुसार महिलाएं अपनी भावना कैसे व्यक्त करती हैं?
संगीता राठी के अनुसार महिलाएं भजनों और सामूहिक नृत्य के जरिए श्रीकृष्ण के प्रति अपने प्रेम, विरह और समर्पण को व्यक्त करती हैं।
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