राजधानी दिल्ली में हाल के दिनों में यातायात के लिए खोले गए बारापुला फेज-3 एलिवेटेड कॉरिडोर पर सफर करने वाले चालकों को सुगम आवागमन की बजाय भारी जाम का सामना करना पड़ रहा है। जिस रास्ते को पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली के बीच यात्रा को आसान बनाने के मकसद से तैयार किया गया था, वहां वाहनों के अत्यधिक दबाव की वजह से कई स्थानों पर आवाजाही बुरी तरह प्रभावित हुई है। इस स्थिति से रोजाना घंटों जूझ रहे यात्रियों की परेशानियों को देखते हुए प्रशासन ने सड़क संरचना और ट्रैफिक नियंत्रण तंत्र में अहम फेरबदल करने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।
सराय काले खां और रिंग रोड पर अतिरिक्त लेन और यू-टर्न का खाका
ट्रैफिक की सुगम आवाजाही बहाल करने के लिए तैयार किए गए प्रारंभिक प्रारूप के तहत सराय काले खां के पास आईटीओ की दिशा में जाने वाली सड़क पर मौजूद फुटपाथ को हटाकर एक नई अतिरिक्त लेन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इस कदम से सड़क की चौड़ाई बढ़ाई जा सकेगी, जिससे भारी संख्या में गुजरने वाले वाहनों को निकलने के लिए पर्याप्त जगह मिलेगी और बॉटलनेक से राहत मिल सकेगी।
इसके साथ ही स्थानीय यातायात की दिक्कतों को दूर करने के लिए रिंग रोड पर गुरुद्वारे के ठीक सामने एक नया यू-टर्न खोलने की तकनीकी संभावनाओं पर भी विचार किया जा रहा है। यदि यह यू-टर्न तैयार होता है, तो आसपास के रिहायशी इलाकों के वाहन चालकों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए लंबा चक्कर काटने से मुक्ति मिल जाएगी।
सिद्धार्थ एक्सटेंशन और एम्स की तरफ जाने वाले मुसाफिरों को राहत
प्रस्तावित यू-टर्न के निर्माण से सिद्धार्थ एक्सटेंशन क्षेत्र से निकलने वाले लोगों को सीधे पुराने बारापुला मार्ग पर आने-जाने की सीधी सुविधा मिल सकेगी। इसके अलावा इस रास्ते से लाजपत नगर, आईएनए और एम्स की ओर जाने वाले यात्रियों को भी बड़ा लाभ पहुंचेगा।
मौजूदा समय में सीधी कनेक्टिविटी के अभाव में चालकों को काफी लंबा डायवर्जन लेना पड़ता है, जिसके कारण न केवल उनका समय बर्बाद होता है बल्कि मुख्य रास्तों पर बेवजह जाम भी बढ़ता है। नया यू-टर्न शुरू होने से इस तरह के अनावश्यक फेरों में भारी कमी आएगी। इसके साथ ही कई वाहन चालक जो मजबूरी या जल्दबाजी में गलत दिशा में गाड़ियां चलाते हैं, उस खतरनाक गतिविधि पर भी प्रभावी रोक लग सकेगी।
विशेषज्ञ एजेंसी करेगी पूरे रूट और ट्रैफिक पैटर्न का अध्ययन
पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश साहिब सिंह के अनुसार, सिर्फ सतही बदलावों या किसी एक जगह सड़क चौड़ी करने से इस जटिल समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकल सकता। इसी वजह से पूरे कॉरिडोर का व्यापक तकनीकी मूल्यांकन कराने के लिए एक पेशेवर कंसल्टेंट एजेंसी को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
यह एजेंसी रूट पर वाहनों के वितरण, विभिन्न प्रवेश व निकास बिंदुओं, लेन चैनलाइजेशन तथा ट्रैफिक मर्जिंग प्वाइंट्स का वैज्ञानिक विश्लेषण करेगी। इस विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर फौरी राहत के कदमों के साथ-साथ भविष्य के लिए दीर्घकालिक नीतियां भी तय की जाएंगी, ताकि आगे चलकर वाहनों का दबाव दोबारा संकट न बने।
देरी और ₹640 करोड़ के अतिरिक्त भुगतान पर समीक्षा जारी
पीडब्ल्यूडी मंत्री ने बारापुला परियोजना के क्रियान्वयन में हुई असाधारण देरी और वित्तीय फैसलों पर भी सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि मध्यस्थता यानी आर्बिट्रेशन की प्रक्रिया के जरिए निर्माण ठेकेदार को लगभग ₹640 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान किया गया, जबकि काम भी तय समय पर पूरा नहीं हो सका।
प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि वित्तीय और प्रशासनिक लापरवाहियों की जांच व समीक्षा अपनी जगह चलती रहेगी, लेकिन इसकी कीमत सड़क पर चलने वाले आम नागरिकों को जाम के रूप में नहीं चुकानी पड़ेगी। लिहाजा, सरकार का पूरा जोर तत्काल प्रभाव से सड़क क्षमता को सुधारने और समूचे ट्रैफिक नेटवर्क को व्यवस्थित करने पर केंद्रित किया गया है।























