महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मीरा रोड स्थित पूनम एस्टेट क्लस्टर-1 आवासीय परिसर में नवरात्रि के आयोजनों को लेकर नया विवाद पैदा हो गया है। परिसर के करीब 120 परिवारों ने साझा प्रांगण में गरबा, डांडिया और पारंपरिक सांस्कृतिक अनुष्ठान आयोजित करने के लिए औपचारिक अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगा था, जिसे हाउसिंग सोसायटी के प्रबंधन ने सीधे तौर पर खारिज कर दिया। मई 2026 में बकरीद के मौके पर बकरियां लाने को लेकर हुए भारी हंगामे और दो पक्षों के बीच तनाव के बाद अब इस फैसले ने रहवासियों और प्रबंध समिति के बीच टकराव की स्थिति पैदा कर दी है।
120 परिवारों का प्रस्ताव और तय की गई शर्तें
पूनम एस्टेट क्लस्टर-1 में लगभग 625 फ्लैट हैं, जहां विभिन्न पृष्ठभूमि और समुदायों के लोग रहते हैं। आगामी नवरात्रि पर्व को देखते हुए करीब 120 परिवारों ने 11 से 20 अक्टूबर तक डांडिया, गरबा और सांस्कृतिक कार्यक्रम कराने की लिखित योजना सोसायटी के समक्ष रखी थी। रहवासियों ने प्रबंधन को दिए अपने प्रस्ताव में यह साफ किया था कि पूरा कार्यक्रम परिसर के साझा क्षेत्र में आयोजित होगा। इसके साथ ही आयोजकों ने ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों, प्रशासनिक दिशा-निर्देशों, सोसायटी के तय नियमों, व्यापक सुरक्षा प्रबंधों और स्वच्छता की पूरी जिम्मेदारी उठाने की लिखित तैयारी भी दिखाई थी। इसके बावजूद प्रबंध समिति ने कार्यक्रम के लिए एनओसी जारी करने से मना कर दिया।
प्रबंध समिति का तर्क: 28 सितंबर की आम बैठक का फैसला
सोसायटी के पदाधिकारियों का कहना है कि यह रोक किसी विशेष पर्व या समुदाय के खिलाफ नहीं है, बल्कि परिसर में शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए लिया गया नीतिगत निर्णय है। प्रबंधकों के अनुसार, 28 सितंबर को सोसायटी की आम बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें सर्वसम्मति से परिसर के भीतर किसी भी तरह के बड़े सामुदायिक आयोजन की अनुमति न देने का प्रस्ताव पारित किया गया था। पदाधिकारियों का तर्क है कि मई के महीने में उपजे विवाद के बाद परिसर के माहौल को सुरक्षित और शांत रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। समिति का दावा है कि यह एक सामान्य प्रशासनिक फैसला है और इसका किसी धर्म विशेष के रीति-रिवाजों से कोई टकराव नहीं है।
नाराज रहवासियों का विरोध और उमाशंकर नाग की शिकायत
दूसरी तरफ, उत्सव मनाने की अनुमति न मिलने से 120 परिवारों में गहरा असंतोष है। निवासियों का कहना है कि जब वे समय-सीमा, सुरक्षा प्रोटोकॉल और कानूनी मर्यादाओं का पालन करने को पूरी तरह तैयार हैं, तो प्रबंधन को सीधे मना करने के बजाय बातचीत से नियम तय करने चाहिए थे। इसी सोसायटी में रहने वाले उमाशंकर नाग ने इस फैसले के विरोध में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। उनका कहना है कि सभी कानूनी और नागरिक नियमों के पालन का भरोसा दिए जाने के बाद भी नवरात्रि जैसे पारंपरिक पर्व की अनुमति न देना सरासर अनुचित है।
उप रजिस्ट्रार कार्यालय तक पहुंचा विवाद
यह तनातनी अब केवल आवासीय परिसर की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही है। फैसले से असंतुष्ट रहवासियों ने ठाणे तालुका के उप रजिस्ट्रार और सहकारी समिति के सक्षम अधिकारियों के समक्ष अपनी बात रखी है। उप रजिस्ट्रार कार्यालय ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए हाउसिंग सोसायटी प्रबंधन को निर्देश जारी किए हैं कि शिकायत में उठाए गए सभी बिंदुओं पर सहकारी सोसायटी कानून और पंजीकृत उपनियमों के दायरे में रहकर यथोचित कार्रवाई की जाए। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि 28 सितंबर की आम बैठक के प्रस्ताव, सरकारी दिशा-निर्देशों और कानूनी प्रावधानों के संतुलन से क्या नतीजा निकलता है।
मई 2026 का पुराना विवाद: बकरियों को रखने पर हुआ था बवाल
पूनम एस्टेट परिसर इससे पहले भी सांप्रदायिक और प्रशासनिक तनाव के केंद्र में रहा है। मई 2026 में बकरीद से पहले परिसर में बकरियों को अस्थायी तौर पर रखने को लेकर कुछ निवासियों ने कड़ा विरोध जताया था। उस समय बात इतनी बढ़ गई थी कि स्थानीय पुलिस और मीरा-भायंदर नगर निगम के अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभालना पड़ा था। दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और झड़प के बाद पुलिस ने औपचारिक एफआईआर भी दर्ज की थी। उस समय सामने आई एक फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट में यह स्पष्ट हुआ था कि मुख्य विवाद साझा परिसर में बकरियों को अस्थायी तौर पर बांधकर रखने से जुड़ा था, जबकि परिसर के भीतर कुर्बानी किए जाने का विषय बिल्कुल अलग था। उसी कटु अनुभव के बाद से सोसायटी में सामुदायिक गतिविधियों पर सख्त पहरा लगा हुआ है।























