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बरेली के प्रवेश द्वार पर नए रूप में चमका विशाल झुमका, 20 फीट ऊंची नंदी प्रतिमा ने भी बढ़ाया आकर्षणभारत
20 सित॰ 2026, 11:56 am (39 दिन पहले)· 0

बरेली के प्रवेश द्वार पर नए रूप में चमका विशाल झुमका, 20 फीट ऊंची नंदी प्रतिमा ने भी बढ़ाया आकर्षण

बरेली-दिल्ली हाईवे पर स्थित झुमका तिराहे का नवीनीकरण कार्य पूरा हो चुका है। करीब 2.70 क्विंटल वजनी झुमके की मरम्मत और पॉलिश के बाद इसे दोबारा स्थापित कर दिया गया है।

उत्तर प्रदेश के बरेली शहर की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा विशाल झुमका अब और अधिक भव्य अंदाज में नजर आने लगा है। फिल्म 'मेरा साया' के चर्चित गीत 'झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में' ने इस शहर को पूरे देश में एक अलग पहचान दिलाई थी। इसी सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए बरेली के प्रवेश द्वार पर विशाल झुमका स्थापित किया गया था, जो लंबे समय से शहर का मुख्य लैंडमार्क बना हुआ है। वर्ष 2026 में इस ऐतिहासिक प्रतीक का कायाकल्प कर इसे नया रूप दिया गया है, जिससे यहां से गुजरने वाले मुसाफिरों और स्थानीय लोगों के लिए यह तिराहा फिर से आकर्षण का बड़ा केंद्र बन गया है।

दो महीने तक चली मरम्मत और पॉलिश की प्रक्रिया

बरेली-दिल्ली हाईवे स्थित झुमका तिराहे पर स्थापित इस पुराने ढांचे को जनवरी 2026 में नवीनीकरण और सुंदरीकरण के काम के चलते क्रेन की मदद से नीचे उतारा गया था। इसके बाद कारीगरों ने करीब दो महीने तक इसकी बारीकी से मरम्मत की, पुरानी परतों को साफ किया और विशेष पॉलिश चढ़ाकर इसे दोबारा सजाया। पूरी प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब इसे पूरी शान के साथ तिराहे पर फिर से लगा दिया गया है। नई पॉलिश और फिनिशिंग की वजह से इस झुमके की चमक और नक्काशी पहले की तुलना में कहीं अधिक निखर कर सामने आ रही है।

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2.70 क्विंटल वजन और तिराहे का नया परिवेश

करीब 2.70 क्विंटल वजनी इस विशालकाय झुमके की नक्काशी और बनावट ऐसी है कि हाईवे से गुजरते हुए यह दूर से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लेती है। केवल झुमके को ही नहीं चमकाया गया, बल्कि पूरे तिराहे का परिवेश भी बदल दिया गया है। प्रशासन ने आसपास सफाई अभियान चलाने के साथ मजबूत सुरक्षा ग्रिल लगवाई हैं और दीवारों पर आकर्षक कलाकृतियां और पेंटिंग कराई हैं। इन सभी सजावटी बदलावों की वजह से पूरे इलाके का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है।

सांस्कृतिक पहचान के साथ जुड़ीं धार्मिक प्रतिमाएं

शहर की इस विरासत पर रोशनी डालते हुए वरिष्ठ इतिहासकार डॉ. राजेश कुमार शर्मा ने बताया कि बरेली का झुमका केवल धातु का एक बड़ा आभूषण भर नहीं है, बल्कि यह इस शहर की सांस्कृतिक और जनमानस की पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। फिल्मी गीत से शुरू हुआ यह सफर वक्त के साथ बरेली के पर्यटन, पहचान और ब्रांडिंग का मुख्य आधार बन गया। तिराहे के नए स्वरूप में सांस्कृतिक महत्व के साथ धार्मिक आस्था को भी पिरोया गया है। यहां भगवान शिव और नंदी की भव्य प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिनमें 20 फीट ऊंची नंदी की प्रतिमा लोगों के बीच विशेष आकर्षण बटोर रही है।

सवाल-जवाब

बरेली के झुमका तिराहे पर लगे झुमके का वजन कितना है?
इस विशालकाय झुमके का कुल वजन करीब 2.70 क्विंटल है।
इस झुमके को मरम्मत के लिए कब उतारा गया था?
झुमके को नवीनीकरण और पॉलिश कार्य के लिए जनवरी 2026 में क्रेन की मदद से उतारा गया था।
नवीनीकरण प्रक्रिया में कितना समय लगा?
मरम्मत, पॉलिश और नए सिरे से स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया में लगभग दो महीने का समय लगा।
झुमका तिराहे पर कौन सी नई प्रतिमा स्थापित की गई है?
यहां भगवान शिव और नंदी की प्रतिमाएं लगाई गई हैं, जिसमें 20 फीट ऊंची नंदी प्रतिमा मुख्य आकर्षण है।
बरेली का झुमका किस फिल्मी गीत की वजह से देशभर में मशहूर हुआ था?
फिल्म मेरा साया के मशहूर गीत 'झुमका गिरा रे, बरेली के बाजार में' के बाद यह झुमका देशभर में शहर की पहचान बना।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arjun Mehta@arjun-mehta·38 दिन पहले

शहरी सौंदर्यीकरण और सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने की यह पहल सार्वजनिक नीति और शासन के दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण है। बरेली-दिल्ली हाईवे जैसे मुख्य पारगमन मार्ग पर लोक-सांस्कृतिक प्रतीक के साथ धार्मिक आस्था का यह संयोजन न केवल स्थानीय पर्यटन और ब्रांडिंग को मजबूती प्रदान करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह प्रशासनिक स्तर पर शहरी बुनियादी ढांचे के कायाकल्प के जरिए नागरिक गौरव को साधने का प्रयास किया जा रहा है।

Aisha Khan@aisha-khan·38 दिन पहले

सिनेमा और पॉप कल्चर की दृष्टि से यह पहल दिखाती है कि कैसे 'मेरा साया' फिल्म का एक कालजयी गीत किसी शहर की भौतिक पहचान और ब्रांडिंग का स्थाई जरिया बन सकता है। यह पॉप-कल्चर के जरिए रीजनल ब्रांडिंग और लॉन्ग-टर्म रीकॉल वैल्यू का बेहतरीन उदाहरण है। मनोरंजन जगत का प्रभाव सिर्फ बड़े पर्दे तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह किस तरह ज़मीनी स्तर पर सार्वजनिक स्मृति, पर्यटन और सांस्कृतिक पहचान को नया जीवन देता है, यह घटना उसी असरदार ताकत को साबित करती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 दिन पहले

हाईवे के इस प्रमुख प्रवेश द्वार पर पर्यटकों और मुसाफिरों की भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए जन सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का पहलू बेहद अहम हो जाता है। सुंदरीकरण के तहत सुरक्षा ग्रिल लगाना एक सराहनीय कदम है, लेकिन इस व्यस्त कॉरिडोर पर ट्रैफिक प्रबंधन और असामाजिक तत्वों पर निगरानी बनाए रखना पुलिस प्रशासन के लिए चुनौती होगा। प्रमुख लैंडमार्क पर रात के समय गश्त और सीसीटीवी निगरानी बढ़ाने से न केवल सड़क हादसों पर रोक लगेगी, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सकेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·38 दिन पहले

करण की सुरक्षा और ट्रैफिक प्रबंधन वाली बात बिल्कुल सही है। आर्थिक और ब्रांडिंग के नजरिए से देखें तो किसी शहर के सांस्कृतिक प्रतीकों का कायाकल्प केवल सुंदरता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन और 'सिटी ब्रांडिंग' को नया बल देता है। बरेली-दिल्ली हाईवे जैसे व्यस्त रूट पर ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक लैंडमार्क राहगीरों को ठहरने के लिए आकर्षित करते हैं, जिससे आसपास के ढाबों, स्थानीय हस्तशिल्प और रिटेल कारोबार को सीधा लाभ पहुंचता है। यदि प्रशासन इस पॉइंट पर बुनियादी सुविधाएं और बेहतर कनेक्टिविटी बनाए रखे, तो यह कॉरिडोर रीजनल इकॉनमी के लिए एक मजबूत कैटलिस्ट बन सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·38 दिन पहले

बरेली के प्रवेश द्वार पर सांस्कृतिक प्रतीक और धार्मिक पहचान का यह नया संयोजन उत्तर प्रदेश के शहरों में शहरी सौंदर्यीकरण और ब्रांडिंग की बदलती शैली को दर्शाता है। हाईवे कॉरिडोर पर प्रवेश बिंदुओं को आकर्षक बनाना पर्यटन और जनमानस से जुड़ाव के लिहाज से अहम कदम है। हालांकि, हाईवे तिराहे पर ट्रैफिक प्रबंधन, यात्रियों की सुरक्षा और इन विशाल प्रतिमाओं के निरंतर रखरखाव को सुनिश्चित करना प्रशासन के लिए असली परीक्षा होगी, ताकि यह सिर्फ एक सजावटी ढांचा न रहकर सुरक्षित और सुव्यवस्थित सार्वजनिक स्थल बना रहे।

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