केंद्रीय जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने हाल ही में अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिले दिबांग घाटी का दौरा कर वहां जारी विभिन्न विकास परियोजनाओं की प्रगति का जायजा लिया। अनिणि में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मंत्री ने दुर्गम सीमांत क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनसुविधाओं की स्थिति में सुधार लाने पर विशेष जोर दिया।
सीमावर्ती सड़कों और 4G नेटवर्क का विस्तार
मंगलवार को संपन्न हुई इस बैठक में केंद्रीय मंत्री ने सड़क संपर्क, चिकित्सा सेवाओं, पेयजल आपूर्ति, कृषि, बागवानी और दूरसंचार से जुड़ी परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमावर्ती सड़कों के निर्माण में तेजी लाने के निर्देश दिए। इस दौरान प्रस्तावित रोइंग-अनिणि ग्रीनफील्ड बाईपास के काम को गति देने, दूरदराज के इलाकों में 4G कनेक्टिविटी का दायरा बढ़ाने और वन स्वीकृतियों से जुड़े लंबित मामलों को जल्द सुलझाने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया ताकि निर्माण कार्य बिना किसी रुकावट के पूरे हो सकें।
पर्यटन और कृषि क्षेत्र से आजीविका के अवसर
दिबांग घाटी की प्राकृतिक सुंदरता और कृषि संभावनाओं को रेखांकित करते हुए राज भूषण चौधरी ने स्थानीय युवाओं से इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी जैसे क्षेत्रों में रोजगार तलाशने का आह्वान किया। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देते समय इस क्षेत्र के प्राकृतिक संतुलन और पर्यावरण को बनाए रखना बेहद जरूरी है। कृषि और बागवानी के विकास पर बात करते हुए उन्होंने उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को प्रोत्साहन देने, किसानों के लिए बेहतर बाजार संपर्क प्रणाली विकसित करने और कोल्ड स्टोरेज की सुविधाएं बढ़ाने की आवश्यकता बताई, जिससे किसानों की आय में सुधार हो सके।
स्वास्थ्य और पेयजल सुविधाओं की चुनौतियों पर मंथन
बैठक में सीमांत जिले के नागरिकों को दरपेश दैनिक समस्याओं और चुनौतियों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। मंत्री ने क्षेत्र में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं की सीमाओं, पीने के पानी की अधूरी व्यवस्था और नवीकरणीय ऊर्जा पहलों को आगे बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया। इस समीक्षा बैठक में उपायुक्त यशवंत मीणा, पुलिस अधीक्षक जेम्स के लेगो, अपर उपायुक्त, सर्कल अधिकारी और विभिन्न विभागों के प्रमुख शामिल हुए। चौधरी ने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ काम करने का आग्रह करते हुए दोहराया कि केंद्र सरकार विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के तहत देश के अंतिम छोर पर बसे इलाकों के निवासियों का जीवन स्तर सुधारने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।























