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बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए मसीहा बनी अंबाला की मेडिकल टीम, मुफ्त इलाज पाकर भावुक हुए पीड़ितहरियाणा
12 सित॰ 2026, 7:27 pm (55 दिन पहले)· 7

बाढ़ प्रभावित नेपाल के लिए मसीहा बनी अंबाला की मेडिकल टीम, मुफ्त इलाज पाकर भावुक हुए पीड़ित

हरियाणा के अंबाला स्थित फिलाडेल्फिया अस्पताल की पांच सदस्यीय डॉक्टरों की टीम ने प्राकृतिक आपदा से जूझ रहे नेपाल के सुदूर क्षेत्रों में जाकर हजारों बाढ़ पीड़ितों का निशुल्क इलाज किया है।

हरियाणा के अंबाला से नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुँचाने गई एक मेडिकल टीम का मानवीय अभियान हाल ही में संपन्न हुआ, जिसने आपदा के पीड़ितों को नया जीवनदान दिया है। भूस्खलन और टूटे रास्तों जैसी खतरनाक चुनौतियों का सामना करते हुए, अंबाला के फिलाडेल्फिया अस्पताल के पांच डॉक्टरों की टीम ने सड़क मार्ग से नेपाल की यात्रा की। उन्होंने आपदा से प्रभावित हजारों लोगों को मुफ्त इलाज और दवाएं प्रदान कीं। तीन दिनों तक चले इस गहन चिकित्सा शिविर के बाद जब डॉक्टर वापस लौटने लगे, तो स्थानीय निवासियों ने बेहद भावुक होकर उनसे पूछा कि वे दोबारा कब आएंगे। यह सवाल इस बात का प्रतीक था कि डॉक्टरों ने आपदा के बीच लोगों के दिलों में कितनी गहरी उम्मीद जगाई थी।

भूस्खलन और टूटे रास्तों को पार कर बाढ़ पीड़ितों तक पहुँचे डॉक्टर

नेपाल में प्राकृतिक आपदा और भारी बाढ़ के कारण मची तबाही को देखकर अंबाला के फिलाडेल्फिया अस्पताल ने तुरंत राहत भेजने का निर्णय लिया। अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार सादिक के नेतृत्व में पांच डॉक्टरों की एक विशेष टीम 5 सितंबर को अंबाला से रवाना हुई। प्रभावित क्षेत्रों में दवाओं की भारी कमी को देखते हुए, डॉक्टरों ने बड़ी मात्रा में आवश्यक दवाइयां और चिकित्सा उपकरण अपनी गाड़ी में रखे। बाढ़ और भूस्खलन के कारण नेपाल जाने वाले कई मुख्य रास्ते पूरी तरह टूट चुके थे और चारों तरफ पहाड़ियों से पत्थर गिर रहे थे। इस कठिन परिस्थिति में डॉक्टरों ने किसी बाहरी ड्राइवर को साथ नहीं लिया, बल्कि खुद ही गाड़ी चलाकर इन बेहद खतरनाक और संकरे रास्तों को पार किया, क्योंकि उनका एकमात्र लक्ष्य बिना किसी देरी के पीड़ितों तक पहुँचना था।

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दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा शिविरों का आयोजन

नेपाल पहुँचने के बाद, इस मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए त्रिशूली बाजार और रसुवा जैसे सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में अपने राहत कार्य शुरू कर दिए। डॉक्टरों ने इन दुर्गम क्षेत्रों में अस्थायी चिकित्सा शिविर स्थापित किए। शिविरों में आने वाले मरीजों में तेज बुखार, उल्टी, दूषित पानी के कारण होने वाले संक्रमण और भूस्खलन के दौरान चट्टानों की चपेट में आने से लगी चोटों के मामले सबसे अधिक थे। यद्यपि रेस्क्यू टीमों ने गंभीर रूप से घायल लोगों को हेलीकॉप्टर के जरिए बड़े अस्पतालों में पहुँचा दिया था, लेकिन पहाड़ों पर रह रहे आम लोगों के पास प्राथमिक चिकित्सा की कोई सुविधा नहीं बची थी, जिसके कारण उन्हें तुरंत इलाज की सख्त जरूरत थी।

हजारों लोगों का मुफ्त इलाज और दवाओं का वितरण

डॉक्टरों की इस टीम ने तीन दिनों तक लगातार दिन-रात काम करके चिकित्सा शिविरों का संचालन किया। इस छोटी सी अवधि में डॉक्टरों ने लगभग ढाई से तीन हजार मरीजों की स्वास्थ्य जाँच की। शिविर में आने वाले सभी पीड़ितों को फिलाडेल्फिया अस्पताल की तरफ से मुफ्त दवाइयां और आवश्यक परामर्श दिया गया। डॉक्टरों ने अपनी जान जोखिम में डालकर लगातार मरीजों की सेवा की। लौटने के दौरान भी डॉक्टरों का सेवा भाव कम नहीं हुआ और उन्होंने भारत-नेपाल सीमा पर भी एक विशेष शिविर लगाकर स्थानीय नागरिकों का इलाज किया, जिससे उनके इस सेवा अभियान का दायरा और बढ़ गया।

विदाई के भावुक पल और अंबाला में विशेष प्रार्थना सभा

नेपाल में लोगों की स्थिति और उनकी तबाही देखकर डॉक्टर बेहद भावुक हो गए। डॉ. सुनील कुमार सादिक ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वहां के लोगों का दुख देखकर उनका मन व्यथित हो गया। उन्होंने महसूस किया कि हालांकि उन्होंने अपनी पूरी क्षमता से सेवा की, लेकिन वहां की तबाही के सामने उनकी यह कोशिश बहुत छोटी थी। फिर भी, उनका मुख्य उद्देश्य पीड़ित लोगों को यह महसूस कराना था कि इस संकट में वे अकेले नहीं हैं। वापसी के समय स्थानीय लोगों ने डॉक्टरों का हाथ पकड़कर पूछा कि 'डॉक्टर साहब, आप फिर कब आओगे?' अंबाला लौटने पर, फिलाडेल्फिया अस्पताल के सभी डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों ने मिलकर नेपाल के पीड़ित परिवारों के शीघ्र सुधार के लिए एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया। अस्पताल प्रशासन ने संकल्प लिया है कि यदि भविष्य में भी नेपाल को उनकी आवश्यकता होगी, तो उनकी टीम दोबारा वहां जाने के लिए हमेशा तैयार रहेगी।

सवाल-जवाब

नेपाल जाने वाले डॉक्टरों की टीम किस अस्पताल से जुड़ी हुई थी?
यह डॉक्टरों की टीम अंबाला के फिलाडेल्फिया अस्पताल से जुड़ी हुई थी।
इस चिकित्सा अभियान का नेतृत्व किसने किया था?
इस अभियान का नेतृत्व फिलाडेल्फिया अस्पताल के डायरेक्टर डॉ. सुनील कुमार सादिक ने किया था।
डॉक्टरों की टीम ने नेपाल के किन-किन क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर लगाए थे?
टीम ने मुख्य रूप से नेपाल के त्रिशूली बाजार, रसुवा और सीमावर्ती क्षेत्रों में चिकित्सा शिविर आयोजित किए थे।
इस तीन दिवसीय शिविर में कुल कितने लोगों का इलाज किया गया?
तीन दिनों के दौरान डॉक्टरों की टीम ने करीब ढाई से तीन हजार (2,500 से 3,000) मरीजों का निशुल्क इलाज किया।
यह टीम राहत सामग्री के साथ नेपाल के लिए कब रवाना हुई थी?
डॉक्टरों की यह पांच सदस्यीय टीम 5 सितंबर को सड़क मार्ग से नेपाल के लिए रवाना हुई थी।
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