राजस्थान भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने राजधानी जयपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राज्य के राजनीतिक परिदृश्य, विपक्षी रणनीति और शासन व्यवस्था पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की कार्यशैली की कड़ी आलोचना की। इसके साथ ही उन्होंने राजस्थान में हर पांच साल पर सत्ता बदलने की पुरानी परंपरा के खत्म होने का दावा करते हुए राज्य में बीजेपी के सुशासन को रेखांकित किया।
कांग्रेस नेतृत्व और गोविंद सिंह डोटासरा पर तीखा हमला
विपक्षी नेताओं की बयानबाजी पर कटाक्ष करते हुए मदन राठौड़ ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के अंदाज पर चुटकी ली। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "वो बिना बॉल के फुटबॉल खेलते हैं।" उन्होंने यह भी जोड़ा कि डोटासरा जब अपना गमछा घुमाते हैं तो उन्हें हंसी आती है। राठौड़ ने कहा कि वह राजनीतिक मतभेदों के बावजूद डोटासरा के लिए हमेशा सद्बुद्धि की कामना करेंगे।
इसी क्रम में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि गहलोत इस समय गहरे मानसिक दबाव और कुंठा के दौर से गुजर रहे हैं। राठौड़ का मानना था कि कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने पूर्व मुख्यमंत्री को अलग-थलग कर दिया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जिस तरह गहलोत को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है, वह उसकी अंदरूनी छटपटाहट और कमजोरी को उजागर करती है।
संसदीय मर्यादा और राहुल गांधी को सदन में बहस की चुनौती
विपक्ष की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मदन राठौड़ ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा दिए गए राजनीतिक चैलेंज का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को अगर अपनी बात रखनी है तो उसे सड़क या बयानबाजी के बजाय सदन में आकर सार्थक चर्चा करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता अपनी बात कहकर तुरंत निकल जाते हैं और दूसरों के तर्कों को सुनने का धैर्य उनमें नहीं होता।
बीजेपी अध्यक्ष ने विपक्षी दलों पर 'हिट एंड रन' की राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी राय व्यक्त करने के साथ-साथ विपक्षी नेताओं के लिए दूसरे पक्ष की बातों को सुनना भी उतना ही अनिवार्य है। उनका कहना था कि केवल हंगामा खड़ा करना और सदन की कार्यवाही में बाधा डालना जनहित के मुद्दों का समाधान नहीं हो सकता।
युवा पीढ़ी, सोशल मीडिया और सामाजिक मूल्यों पर विचार
युवा पीढ़ी यानी जेन जी (Gen Z) के भविष्य को लेकर पूछे गए सवालों पर मदन राठौड़ ने गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दल युवाओं को उनके सांस्कृतिक मूल्यों और संस्कारों से दूर ले जाकर दिशाहीन करने का काम कर रहे हैं। युवा वर्ग के बीच डिजिटल तकनीक के बढ़ते असर पर बात करते हुए उन्होंने सतर्क रहने की सलाह दी।
सोशल मीडिया और स्मार्टफोन के बढ़ते इस्तेमाल के संबंध में राठौड़ ने कहा कि इन आधुनिक माध्यमों का दुरुपयोग किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि उन्होंने संसद सदस्य के रूप में भी सोशल मीडिया मंचों के गलत इस्तेमाल पर रोक लगाने की जरूरत उठाई थी। उन्होंने कहा कि तकनीक का सही और रचनात्मक कार्यों में इस्तेमाल समाज के लिए लाभदायक है, लेकिन इसका नकारात्मक प्रसार रोका जाना चाहिए।
निकाय चुनाव के नतीजे और राजस्थान में सत्ता परिवर्तन का चक्र
हालिया निकाय चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर कम होने के सवाल पर राठौड़ ने स्पष्टवादी रुख अपनाया। उन्होंने संगठन के स्तर पर कमियों को स्वीकार करते हुए कहा, "कुछ गलतियां हमसे भी होती हैं।" हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जनसमर्थन के मामले में राज्य की जनता ने कांग्रेस की नीतियों को पूरी तरह नकार दिया है और बीजेपी का जनाधार मजबूत है।
राजस्थान में हर पांच साल में सरकार बदल जाने की दशकों पुरानी परंपरा पर राठौड़ ने कहा कि अब वह दौर समाप्त हो चुका है। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी सरकार के काम और जनता के मिजाज को देखते हुए अब राज्य में पार्टी लगातार अपनी सरकार बनाएगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बुनियादी ढांचे का विस्तार हुआ है और कानून व्यवस्था इतनी चुस्त की गई है कि किसी भी अपराधी को बच निकलने का मौका नहीं दिया गया है।
नीट पेपर लीक का सच और मुख्यमंत्री संग समन्वय
प्रतियोगी परीक्षाओं की निष्पक्षता और नीट (NEET) पेपर लीक के तार राजस्थान से जुड़ने के आरोपों पर बीजेपी अध्यक्ष ने स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के संदर्भ में यह स्पष्ट हुआ था कि पेपर लीक की मुख्य घटना केरल में हुई थी, न कि राजस्थान में। उन्होंने इस मुद्दे पर बेवजह राज्य की छवि खराब करने के प्रयासों का खंडन किया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के साथ संगठनात्मक तालमेल के सवाल पर मदन राठौड़ ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच बेहतरीन समन्वय है। उन्होंने बताया कि वह स्वयं लंबे समय तक पार्टी संगठन में चार बार जिलाध्यक्ष रह चुके अनुशासित कार्यकर्ता हैं, और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी संगठन के विभिन्न पदों पर रहकर काम का लंबा अनुभव रखते हैं। ऐसे में सरकार और संगठन के बीच पूरा सामंजस्य बना हुआ है और दोनों मिलकर राज्य के विकास के लिए प्रयासरत हैं।


















