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बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र, 18 अगस्त तक तटीय क्षेत्रों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएंभारत
16 अग॰ 2026, 12:02 pm (1 घंटे पहले)· 2

बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र, 18 अगस्त तक तटीय क्षेत्रों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी हवाएं

उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण 16 से 18 अगस्त के बीच 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की आशंका है। मौसम विभाग ने पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों पर मछुआरों को समुद्र में न जाने की चेतावनी जारी की है।

बंगाल की खाड़ी में एक बार फिर से एक नया मौसम तंत्र सक्रिय हो गया है, जिसके चलते तटीय क्षेत्रों में भारी मौसमी बदलाव की चेतावनी जारी की गई है। उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी तथा उससे सटे पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा के तटीय इलाकों के ऊपर एक कम दबाव का क्षेत्र विकसित हो चुका है। यह प्रणाली चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से तैयार हुई है और अगले 24 घंटों के दौरान उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के साथ और अधिक ताकतवर हो सकती है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार सुबह 5:30 बजे जारी किए गए अपने मौसम अपडेट में स्पष्ट किया है कि 16 अगस्त से 18 अगस्त के बीच समुद्री इलाकों में मौसम की स्थिति काफी गंभीर बनी रहेगी। इस दौरान तटीय क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर गति से हवाएं चलेंगी, जबकि हवा के तेज झोंकों की रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है। इस स्थिति को देखते हुए मछुआरों को अगले तीन दिनों तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी गई है।

चक्रवाती परिसंचरण से बना कम दबाव का क्षेत्र

मौसम विज्ञानियों के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी के ऊपर पहले से मौजूद चक्रवाती परिसंचरण ने अब एक मजबूत कम दबाव वाले क्षेत्र का रूप धारण कर लिया है। यह मौसमी प्रणाली पश्चिम बंगाल और उत्तर ओडिशा के तटवर्ती इलाकों से सटी हुई है। अगले 24 घंटे इस प्रणाली के विकास और इसके आगे बढ़ने के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। पूर्वानुमान में कहा गया है कि यह तंत्र लगभग उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ेगा और समय के साथ और अधिक प्रभावी होकर अपनी तीव्रता में बढ़ोतरी करेगा। इस मौसमी बदलाव के कारण तटीय इलाकों में आसमान बादलों से घिरा रहेगा और कई स्थानों पर तेज से बहुत तेज बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग लगातार इस पूरे सिस्टम की हलचल पर निगरानी रख रहा है।

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समुद्र में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उठेंगे झोंके

मौसम विभाग द्वारा जारी की गई विस्तृत चेतावनी के अनुसार, 16 अगस्त से लेकर 18 अगस्त तक उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के क्षेत्र में हवाओं का रुख बेहद आक्रामक रहने वाला है। इस समयावधि के दौरान समुद्र के ऊपर हवा की सामान्य गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे के आसपास रहेगी। हालांकि, बीच-बीच में आने वाले हवा के तेज झोंके 60 किलोमीटर प्रति घंटे की खतरनाक सीमा को छू सकते हैं। इन भयंकर हवाओं के कारण समुद्र की स्थिति बेहद खराब से अत्यंत खराब श्रेणी में रहने का अनुमान लगाया गया है। समुद्र में उठने वाली ऊंची लहरें और तेज रफ्तार हवाएं किसी भी नौका या नाव के संचालन के लिए अत्यंत जोखिम भरा वातावरण पैदा कर सकती हैं।

पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अलर्ट

इस बदलते हुए मौसमी तंत्र का सीधा और व्यापक असर तटीय भारतीय राज्यों के साथ-साथ पड़ोसी देश के क्षेत्रों पर भी देखने को मिलेगा। पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों, उससे सटे बांग्लादेश के तटीय हिस्सों, संपूर्ण ओडिशा तट और उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश के क्षेत्रों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां बनी रहेंगी। इन सभी इलाकों में बारिश के साथ तेज हवाओं का प्रकोप देखा जा सकता है। मौसम विभाग ने तटीय इलाकों के रहवासियों और स्थानीय प्रशासन को सतर्क रहने का परामर्श दिया है। संवेदनशील इलाकों में प्रशासन की ओर से मौसम प्रणालियों की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

मछुआरों को 18 अगस्त तक समुद्र से दूर रहने की हिदायत

समुद्र के भीतर मौसम की अत्यंत गंभीर और असुरक्षित स्थिति को ध्यान में रखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। मछुआरों को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे 16 से 18 अगस्त तक उत्तर-पश्चिमी और पश्चिम-मध्य बंगाल की खाड़ी के गहरे पानी में उतरने का कोई प्रयास न करें। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश से सटे तटीय क्षेत्रों, ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के समुद्र तटों के पास भी मछली पकड़ने की सभी गतिविधियों पर रोक लगाने को कहा गया है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि 3 दिनों की इस अवधि में समुद्र में अनहोनी की आशंका काफी अधिक है, इसलिए मछुआरे और तटीय नागरिक स्थानीय प्रशासन एवं मौसम केंद्र द्वारा समय-समय पर जारी किए जा रहे दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करें।

मानसून चक्र और अल नीनो का वर्तमान प्रभाव

बंगाल की खाड़ी में इस कम दबाव के क्षेत्र का निर्माण दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्वाभाविक प्रक्रिया के अंतर्गत हुआ है। मानसून की अवधि में इस प्रकार के कम दबाव के क्षेत्रों का बनना पूर्वी भारत और मध्य भारत के तटीय राज्यों में मानसूनी बारिश की निरंतरता को बनाए रखने के लिए मुख्य कारक होता है। जब भी ऐसे सिस्टम बंगाल की खाड़ी में बनते हैं, तब वे तटीय इलाकों में मूसलाधार बारिश और समुद्री अशांति लेकर आते हैं। इसके साथ ही, मौसम विज्ञानियों ने वैश्विक स्तर पर अल नीनो की उपस्थिति का भी उल्लेख किया है। हालांकि अल नीनो एक्टिव अवस्था में है, लेकिन भारत की स्थानीय मौसमी दशाओं और क्षेत्रीय वायुमंडलीय कारकों के कारण अभी तक इसका कोई नकारात्मक प्रभाव देश के मौसम पर नहीं पड़ा है। आगामी 24 घंटों में इस सिस्टम की गतिशीलता पूर्वी भारत के मौसम का भविष्य तय करेगी।

सवाल-जवाब

बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र कहां बना है?
यह कम दबाव का क्षेत्र उत्तर-पश्चिमी बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल व उत्तर ओडिशा तट के ऊपर बना है।
मछुआरों को कब से कब तक समुद्र में न जाने की सलाह दी गई है?
मौसम विभाग ने मछुआरों को 16 से 18 अगस्त तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है।
समुद्र में हवा की रफ्तार कितनी रहने की संभावना जताई गई है?
समुद्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की निरंतर गति से हवाएं चलेंगी, जबकि झोंकों के दौरान रफ्तार 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इस मौसमी प्रणाली से कौन-कौन से तटीय क्षेत्र प्रभावित होंगे?
पश्चिम बंगाल, ओडिशा, उत्तर तटीय आंध्र प्रदेश और बांग्लादेश से सटे तटीय क्षेत्र इससे प्रभावित होंगे।
क्या भारत पर अल नीनो का असर पड़ा है?
अल नीनो एक्टिव है, लेकिन स्थानीय मौसमी परिस्थितियों की वजह से भारत के मौसम पर अभी तक इसका असर नहीं पड़ा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·51 मिनट पहले

अपराधीय मामलों और कानून-व्यवस्था के अलावा जनसुरक्षा से जुड़ी ऐसी आपदाओं में प्रशासनिक मुस्तैदी और आपदा प्रबंधन प्रणालियों की भूमिका अत्यंत अहम हो जाती है। तटीय क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और राहत एजेंसियों को अलर्ट पर रखना होगा ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके और अवैध या जोखिम भरी समुद्री गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाई जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में ज़िला प्रशासन और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल को पूरी तरह तैयार रहना होगा। समुद्री किनारों पर आवाजाही रोकने के लिए पुलिस गश्त बढ़ानी होगी ताकि मछुआरे समुद्र में न उतरें। पिछले अनुभवों से सीख लेते हुए राहत शिविरों और संचार प्रणालियों को पहले से ही सक्रिय करना आवश्यक है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

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