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बेजुबान सांपों के लिए वरदान बना जबलपुर का वाइल्डलाइफ अस्पताल, क्रूरता के शिकार जीवों की ऐसे बचा रहा जानमध्य प्रदेश
20 जुल॰ 2026, 11:40 pm (100 दिन पहले)· 1

बेजुबान सांपों के लिए वरदान बना जबलपुर का वाइल्डलाइफ अस्पताल, क्रूरता के शिकार जीवों की ऐसे बचा रहा जान

जबलपुर का स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ सेंटर सपेरों के जुल्म और इंसानी हमलों का शिकार हुए सैकड़ों सांपों का इलाज कर उन्हें वापस जंगल में नया जीवन दे रहा है।

मध्य भारत के जबलपुर में एक ऐसा अनोखा चिकित्सा संस्थान काम कर रहा है, जो इंसानी क्रूरता का शिकार हुए बेजुबान जंगली जीवों के लिए किसी संजीवनी से कम नहीं है। जबलपुर स्थित स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ सेंटर अपनी तरह का इकलौता ऐसा अस्पताल है, जो मौत की दहलीज पर खड़े वन्य जीवों को बचाकर उन्हें एक नया जीवन दे रहा है। यह अस्पताल सिर्फ सामान्य जानवरों का इलाज नहीं करता, बल्कि गंभीर रूप से घायल और प्रताड़ित किए गए जीवों की जटिल सर्जरी कर उन्हें वापस उनके प्राकृतिक आवास में लौटने के काबिल बनाता है।

त्योहारों के नाम पर सपेरों की भयानक क्रूरता

हमारे समाज में नागपंचमी या अन्य धार्मिक त्योहारों के आसपास सांपों का सबसे ज्यादा शोषण होता है। पैसे कमाने की होड़ में सपेरे इन बेजुबानों का बेरहमी से शिकार करते हैं और उन्हें तमाशा दिखाने के लिए तरह-तरह की यातनाएं देते हैं। स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ की डायरेक्टर शोभा जावरे ने इस अमानवीय कृत्य के आंकड़े साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में ही इस अस्पताल में इलाज के लिए 65 ऐसे सांप लाए गए थे, जो गंभीर रूप से प्रताड़ित थे। इनमें 15 बेहद खतरनाक कोबरा प्रजाति के सांप भी शामिल थे, जिनकी हालत बेहद नाजुक थी।

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सपेरों द्वारा इन जीवों पर ढाए जाने वाले जुल्म रोंगटे खड़े कर देने वाले होते हैं। लोगों को सांप का खेल दिखाने के लिए वे सबसे पहले उनके जहर वाले दांत बेरहमी से तोड़ देते हैं। क्रूरता यहीं नहीं रुकती, कई मामलों में सपेरे सुई-धागे से सांपों का मुंह तक पूरी तरह सिल देते हैं। इससे भी ज्यादा भयानक बात यह है कि कई बार सांपों का जबड़ा बंद करने के लिए फेवीक्विक जैसे खतरनाक और जहरीले रसायनों का इस्तेमाल किया जाता है। मुंह पूरी तरह से बंद हो जाने के कारण ये बेजुबान जीव न तो कुछ खा पाते हैं और न ही पानी पी पाते हैं। वे भूख-प्यास से तड़प-तड़पकर मौत के कगार पर पहुंच जाते हैं।

लाठियों से कुचले गए सांप की चमत्कारी सर्जरी

जबलपुर के इस खास अस्पताल में मौजूद विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम अक्सर ऐसे मामलों का सामना करती है, जिन्हें देखकर आम लोग सिहर उठें। संस्था की डायरेक्टर शोभा जावरे ने एक ऐसी ही रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना का जिक्र किया। कुछ समय पहले वन विभाग की रेस्क्यू टीम एक ऐसा बुरी तरह घायल सांप अस्पताल लेकर पहुंची थी, जिस पर इंसानों की भीड़ ने लाठियों से जानलेवा हमला किया था। यह हमला इतना क्रूर था कि सांप का पेट फट गया था और उसकी आंतें शरीर से पूरी तरह बाहर निकल आई थीं।

ऐसी खौफनाक हालत देखकर किसी भी सामान्य डॉक्टर के पसीने छूट सकते हैं, लेकिन इस अस्पताल के डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए अपना काम शुरू किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने तुरंत उस गंभीर रूप से घायल सांप को ऑपरेशन टेबल पर लिया और एक बेहद जटिल सर्जरी को अंजाम दिया। उन्होंने पूरी सावधानी के साथ बाहर आ चुकी आंतों को वापस शरीर के अंदर सुरक्षित तरीके से फिट किया और घावों को सिल दिया। डॉक्टरों की इस काबिलियत और मेहनत के दम पर उस सांप की जान बच गई। इस अस्पताल का यह नियम है कि पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के बाद इन तमाम जीवों को वापस जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया जाता है, ताकि वे अपना स्वाभाविक जीवन जी सकें।

वन विभाग और रेस्क्यू टीम की अहम भूमिका

घायल जीवों को इस अस्पताल तक पहुंचाने में जबलपुर वन विभाग की एंटी पोचिंग और रेस्क्यू टीम एक मजबूत ढाल की तरह काम कर रही है। जमीनी स्तर पर वन्य प्राणी विशेषज्ञ और सांप पकड़ने में माहिर अवि वरशै का काम बेहद सराहनीय है। वे अपनी टीम के साथ मिलकर सालभर में सैकड़ों ऐसे सांपों का रेस्क्यू करते हैं, जो या तो इंसानी बस्तियों में फंस गए हैं या फिर सपेरों के चंगुल में हैं।

इन रेस्क्यू अभियानों में अक्सर कई दुर्लभ और बेहद खतरनाक प्रजाति के सांपों को बचाया जाता है। जैसे ही कोई घायल या प्रताड़ित सांप रेस्क्यू टीम के हाथ लगता है, उसे बिना किसी देरी के इसी वाइल्डलाइफ अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती करा दिया जाता है। रेस्क्यू टीम और अस्पताल का यह शानदार तालमेल यह सुनिश्चित करता है कि मौत के मुंह में जा रहे जीवों को समय रहते उचित चिकित्सा मिल सके।

पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की एक बड़ी पहल

भले ही आम लोगों के बीच सांपों और अन्य जंगली जीवों को लेकर एक डर का माहौल रहता हो और उन्हें खतरनाक माना जाता हो, लेकिन हमारी प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में इनका योगदान बहुत बड़ा है। इकोसिस्टम को जिंदा रखने के लिए ये शिकारी जीव बेहद जरूरी हैं। प्रकृति ने इंसान की तरह ही हर जीव को इस धरती पर जीने का पूरा अधिकार दिया है।

जबलपुर का यह संस्थान केवल बेजुबान जानवरों का इलाज ही नहीं कर रहा है, बल्कि समाज को एक बहुत बड़ा संदेश भी दे रहा है। यह अस्पताल साबित कर रहा है कि इंसानियत की भावना सिर्फ इंसानों तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरी प्रकृति और उसके हर जीव के लिए हमारे दिलों में करुणा होनी चाहिए। इसी सोच के साथ यह केंद्र लगातार अपने मिशन में जुटा हुआ है।

सवाल-जवाब

मध्य भारत का इकलौता वाइल्डलाइफ अस्पताल कहां स्थित है?
यह अस्पताल मध्य प्रदेश के जबलपुर में स्थित है, जिसका नाम स्कूल ऑफ वाइल्डलाइफ फॉरेंसिक एंड हेल्थ सेंटर है।
इस अस्पताल में मुख्य रूप से किन जीवों का इलाज किया जाता है?
यहां इंसानी हमलों और सपेरों की क्रूरता का शिकार हुए वन्यजीवों, विशेषकर सांपों का इलाज किया जाता है।
पिछले एक साल में अस्पताल में कितने सांपों का इलाज किया गया?
डायरेक्टर शोभा जावरे के अनुसार, पिछले एक साल में 65 सांपों को इलाज के लिए लाया गया, जिनमें 15 खतरनाक कोबरा भी शामिल थे।
सपेरे सांपों के साथ किस तरह की क्रूरता करते हैं?
पैसे कमाने के लालच में सपेरे सांपों के जहर वाले दांत तोड़ देते हैं, उनका मुंह सिल देते हैं और कई बार जबड़े को फेवीक्विक से चिपका देते हैं।
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