नागालैंड में मतदाता सूची के संशोधन कार्य को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं, जहां कांग्रेस पार्टी ने 1.57 लाख से अधिक मतदाता प्रविष्टियों में आंकड़ों के भारी अंतर का मुद्दा उठाया है। कोहिमा स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पार्टी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची के सत्यापन में पूर्ण पारदर्शिता बरतने की पुरजोर मांग की है।
मतदाता आंकड़ों में अंतर का पूरा गणित
नागालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद एस सुपोंगमेरेन जमीर ने राज्य के आधिकारिक आंकड़ों की ओर ध्यान आकर्षित कराया। उनके अनुसार, राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 13,57,208 दर्ज है, जबकि चुनाव विभाग के पास उपलब्ध वर्तमान रिकॉर्ड में केवल 11,99,456 मतदाताओं का विवरण है। इस प्रकार दोनों आंकड़ों के बीच 1,57,752 मतदाता प्रविष्टियों का सीधा अंतर दिखाई दे रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों में आया यह अंतर कई श्रेणियों के अंतर्गत वर्गीकृत किया गया है। इसमें ऐसे नाम शामिल हैं जो खोजे नहीं जा सके हैं, स्थाई रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं, या जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा दोहरे नामांकन और पूर्व में दर्ज प्रविष्टियों की वजह से भी यह विसंगति पैदा हुई है। चुनाव विभाग फिलहाल घर-घर जाकर सत्यापन कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सूची से हटाए गए नाम वैध कारणों से ही हटाए गए हैं या नहीं।
विभिन्न जिलों में दर्ज की गई विसंगतियां
अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पर्यवेक्षक प्रणव शागोत्रा ने राज्य के विभिन्न जिलों का विवरण प्रस्तुत किया। उनके द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, मोकोकचुंग में 7,900 मतदाता प्रविष्टियों को लापता या हटाई गई श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह जुन्हेबोटो में 11,513, किफिरे में 6,547, लोंगलेंग में 3,325 और तुएनसांग में 9,032 मतदाता प्रविष्टियों में गड़बड़ी या विलोपन चिन्हित किया गया है।
शागोत्रा का तर्क है कि देशभर में मतदाता सूचियों में इस तरह की विसंगतियां चुनावी नतीजों को सीधे प्रभावित कर सकती हैं। विशेष रूप से नागालैंड जैसे छोटे राज्यों में, जहां जीत-हार का अंतर बहुत मामूली होता है, वहां कुछ हजार वोटों का फेरबदल भी पूरे परिणाम का रुख मोड़ सकता है।
डिजिटल मतदाता सूची और केंद्रीय चुनाव आयोग पर सवाल
पत्रकार वार्ता के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर भी सवाल खड़े किए गए। शागोत्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा मांग किए जाने के बावजूद चुनाव आयोग ने शुरुआत में इलेक्ट्रॉनिक मतदाता सूची उपलब्ध कराने में ढील दिखाई थी। उनका कहना है कि डिजिटल रिकॉर्ड मिलने से पार्टी को दोहरे नामों और सूची से हटाए गए वैध मतदाताओं की पहचान करने में काफी मदद मिलेगी।
वर्तमान में कांग्रेस ने नागालैंड के सभी जिलों में अपने पर्यवेक्षकों को तैनात किया है। ये पर्यवेक्षक उपलब्ध रिकॉर्ड की बारीकी से तुलना कर रहे हैं ताकि गड़बड़ियों के वास्तविक कारणों को उजागर किया जा सके। इस जांच से सामने आने वाले तथ्यों को अंतिम रिपोर्ट के रूप में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पास सौंपा जाएगा।
संस्थागत निष्पक्षता और मतदाताओं से अपील
दूसरे एआईसीसी पर्यवेक्षक बन्ना गुप्ता ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग उठाई। उन्होंने केंद्र की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो और प्रवर्तन निदेशालय जैसी केंद्रीय एजेंसियों का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। गुप्ता ने कहा कि यद्यपि विशेष गहन संशोधन का उद्देश्य फर्जी और मृत मतदाताओं के नाम हटाना है, लेकिन इस प्रक्रिया में कई जगहों पर वास्तविक मतदाताओं के नाम कटने का जोखिम बना रहता है।
नागालैंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष ख्रीडी थेउनुओ ने राज्य के सभी योग्य नागरिकों से अपनी मतदाता जानकारी की स्वयं जांच करने की अपील की। उन्होंने 12 अक्टूबर को चुनाव कार्यालय द्वारा जारी एक निर्देश का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित नहीं रहना चाहिए। इसके अतिरिक्त, कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की नीतियों, सार्वजनिक संपत्ति के प्रबंधन और आर्थिक फैसलों पर भी आलोचनात्मक रुख अपनाया।



















