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बेल्जियम सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद भगोड़े व्यापारी मेहुल चोकसी का भारत प्रत्यर्पण तय, पीएम मोदी और बार्ट दे वेवर की बातचीत से बनी सहमतिपंजाब
3 सित॰ 2026, 11:56 pm (64 दिन पहले)· 3

बेल्जियम सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बाद भगोड़े व्यापारी मेहुल चोकसी का भारत प्रत्यर्पण तय, पीएम मोदी और बार्ट दे वेवर की बातचीत से बनी सहमति

पंजाब नेशनल बैंक के 13,500 करोड़ रुपये के लोन घोटाले में वांछित मेहुल चोकसी का भारत प्रत्यर्पण जल्द होने की संभावना है। बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने चोकसी की याचिका खारिज कर दी है और पीएम मोदी व बार्ट दे वेवर की बैठक में इस पर पूर्ण सहयोग की बात कही गई।

पंजाब नेशनल बैंक के 13,500 करोड़ रुपये के ऋण घोटाले के मुख्य आरोपी भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। नई दिल्ली में आयोजित उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक के दौरान भारत और बेल्जियम के शीर्ष नेतृत्व के बीच इस मुद्दे पर गहन चर्चा हुई। बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट दे वेवर की भारत यात्रा के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय राजनयिक दल ने चोकसी को भारत सौंपने की मांग को मजबूती से उठाया, जिस पर बेल्जियम सरकार ने पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।

द्विपक्षीय बैठक में उठी प्रत्यर्पण की मांग

नई दिल्ली में हुई इस उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान आर्थिक अपराध करके विदेश भागने वाले अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया। विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने एक विशेष प्रेस वार्ता में जानकारी दी कि भारत के कड़े रुख और औपचारिक प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद बेल्जियम के अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में ही मेहुल चोकसी को हिरासत में ले लिया था। अप्रैल 2025 से ही चोकसी बेल्जियम की जेल में बंद है। भारतीय अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि देश के वित्तीय तंत्र को नुकसान पहुंचाकर विदेश में शरण लेने वाले भगोड़ों को भारतीय कानून के दायरे में लाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

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बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने खारिज कीं चोकसी की दलीलें

बेल्जियम की हिरासत में रहते हुए मेहुल चोकसी ने भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए कई कानूनी रास्ते अपनाने की कोशिश की। उसने दावा किया था कि भारत में उसे निष्पक्ष सुनवाई का अवसर नहीं मिलेगा, अपने कथित अपहरण की बात कही और भारतीय जेलों की स्थिति खराब होने का हवाला दिया। हालांकि बेल्जियम की सबसे बड़ी अदालत, कोर्ट ऑफ कैसेशन ने उसकी इन सभी दलीलों को बेबुनियाद और साक्ष्य-विहीन करार देते हुए खारिज कर दिया। सर्वोच्च अदालत ने एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील द्वारा अक्टूबर 2025 में दिए गए फैसले पर अपनी मुहर लगा दी। अदालत ने माना कि भारत का प्रत्यर्पण अनुरोध पूरी तरह से कानूनी प्रक्रिया और मानवाधिकार मानकों के अनुकूल है।

जांच एजेंसियों की कागजी कार्रवाई अंतिम दौर में

बेल्जियम की शीर्ष अदालत से हरी झंडी मिलने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट दे वेवर के बीच हुई सकारात्मक बातचीत के बाद चोकसी को भारत लाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कानूनी टीमें प्रत्यर्पण से जुड़ी कागजी औपचारिकताओं को पूरा करने में जुटी हैं। 13,500 करोड़ रुपये के पीएनबी लोन घोटाले के मामले में चोकसी को भारत लाकर कानूनी प्रक्रिया का सामना कराया जाएगा, जिससे यह संदेश स्पष्ट होता है कि वित्तीय धोखाधड़ी करके विदेश भागने वाले अपराधी कानून की पकड़ से बच नहीं सकते।

सवाल-जवाब

मेहुल चोकसी किस मामले में आरोपी है?
मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 13,500 करोड़ रुपये के लोन घोटाले का मुख्य आरोपी है।
बेल्जियम में मेहुल चोकसी को कब गिरफ्तार किया गया था?
भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध के बाद बेल्जियम अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में मेहुल चोकसी को गिरफ्तार किया था।
बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ने क्या फैसला सुनाया?
बेल्जियम की कोर्ट ऑफ कैसेशन ने चोकसी की सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील के अक्टूबर 2025 के फैसले को बरकरार रखा और भारत प्रत्यर्पण को मंजूरी दी।
कौन सी भारतीय एजेंसियां चोकसी के प्रत्यर्पण पर काम कर रही हैं?
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कानूनी टीमें चोकसी के प्रत्यर्पण की कागजी कार्रवाई पूरी कर रही हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·63 दिन पहले

मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण मामला केवल एक बैंक घोटाले तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और आर्थिक अपराधियों के खिलाफ शासन व्यवस्था की एक बड़ी परीक्षा था। प्रधानमंत्री स्तर की द्विपक्षीय वार्ताओं और यूरोपीय न्यायपालिका के इस निर्णय से यह स्पष्ट संदेश गया है कि वित्तीय धोखाधड़ी कर सीमा पार छुपने वाले भगोड़ों के लिए अब दुनिया भर में कानूनी शिकंजा कसता जा रहा है। सीबीआई और ईडी द्वारा कागजी औपचारिकताओं के अंतिम चरण में होने से अब यह तय हो गया है कि भारतीय वित्तीय तंत्र से खिलवाड़ करने वालों को देश की अदालतों में जवाबदेह ठहराया जाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·63 दिन पहले

मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण मामला सिर्फ एक कानूनी विजय नहीं, बल्कि भारत के बैंकिंग तंत्र और वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ा मील का पत्थर है। तेरह हजार करोड़ से अधिक के इस पीएनबी घोटाले और अंतरराष्ट्रीय न्याय प्रक्रिया में हुई इस प्रगति से वैश्विक निवेशकों और कॉरपोरेट जगत में यह मजबूत संदेश गया है कि आर्थिक अपराध करके भागने वालों के लिए वैश्विक वित्तीय बाजारों में अब शरण लेना असंभव होता जा रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·63 दिन पहले

यह घटनाक्रम भारत की कूटनीतिक और कानूनी इच्छाशक्ति का एक बड़ा उदाहरण है, जो भविष्य में प्रत्यर्पण संधियों को लागू करने में भारत की स्थिति को मजबूत करेगा। इस मामले के तार्किक निष्कर्ष तक पहुँचने से यह स्पष्ट हो गया है कि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ भारतीय एजेंसियां और विदेश मंत्रालय किस प्रकार वैश्विक स्तर पर समन्वय स्थापित कर रहे हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·63 दिन पहले

मेहुल चोकसी का प्रत्यर्पण मामला वित्तीय अपराधों की जांच में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा। बेल्जियम की शीर्ष अदालत द्वारा चोकसी की मानवाधिकारों और जेल की स्थिति से जुड़ी दलीलों को खारिज करना यह साबित करता है कि भारतीय जांच एजेंसियों की ओर से पेश किए गए दस्तावेज और कानूनी साक्ष्य पूरी तरह से पुख्ता थे। अब सीबीआई और ईडी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे भारत लाकर विशेष अदालत में स्पीडी ट्रायल सुनिश्चित करने की होगी, ताकि इस बहुचर्चित बैंक धोखाधड़ी मामले में न्याय प्रक्रिया को तार्किक अंत तक पहुंचाया जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·63 दिन पहले

मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण का यह घटनाक्रम यह रेखांकित करता है कि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ कूटनीतिक और कानूनी दबाव अब परिणाम दे रहा है। बेल्जियम की अदालत द्वारा उसकी दलीलों को खारिज किए जाने के बाद, अब केंद्रीय एजेंसियों की यह नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी होगी कि वे भारतीय अदालतों में इस 13,500 करोड़ रुपये के घोटाले की त्वरित और पारदर्शी सुनवाई सुनिश्चित करें, ताकि वित्तीय व्यवस्था में जनता का विश्वास और मजबूत हो सके।

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