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बेंगलुरु हॉस्टल की नौवीं मंजिल से गिरकर बीटेक छात्र लक्ष्य मिश्रा की मौत, परिजनों ने जताई हत्या की आशंकाकर्नाटक
21 सित॰ 2026, 8:15 pm (9 दिन पहले)· 0

बेंगलुरु हॉस्टल की नौवीं मंजिल से गिरकर बीटेक छात्र लक्ष्य मिश्रा की मौत, परिजनों ने जताई हत्या की आशंका

मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज में बीटेक सेकंड ईयर के छात्र लक्ष्य मिश्रा की नौवीं मंजिल से गिरकर मौत के मामले में माता-पिता ने संकरी खिड़की और चोटों को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बेंगलुरु के एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ने वाले 19 वर्षीय बीटेक छात्र लक्ष्य मिश्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपने इकलौते बेटे को बेहतर भविष्य का सपना लेकर घर से विदा करने वाले माता-पिता के लिए यह खबर किसी बड़े सदमे से कम नहीं थी। छात्र की मां ने सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश लिखकर पूरे घटनाक्रम पर गहरा संदेह जताया है और मामले की निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई है।

होनहार छात्र का सफर और आधी रात का फोन कॉल

परिजनों के अनुसार लक्ष्य मिश्रा बचपन से ही मेधावी छात्र था और लगातार लगभग 90 प्रतिशत अंक हासिल करता आ रहा था। उसने अगस्त 2024 में बेंगलुरु स्थित मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया था। वह बीटेक के दूसरे वर्ष में अध्ययनरत था और मई 2026 की आगामी परीक्षाओं की तैयारी में जुटा हुआ था। परिवार में सब कुछ पूरी तरह सामान्य और खुशहाल चल रहा था।

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यह सब कुछ 6 अप्रैल की देर रात अचानक बदल गया जब परिवार को एक अनचाहा फोन आया। फोन पर सूचना दी गई कि लक्ष्य हॉस्टल की नौवीं मंजिल से नीचे गिर गया है। परिजन इस बात को समझ ही रहे थे कि कुछ ही समय बाद एक दूसरा फोन आया, जिसमें उसके नहीं रहने की दुखद जानकारी दी गई। इस अचानक मिली सूचना ने परिवार को स्तब्ध कर दिया।

शव की स्थिति और संकरी खिड़की पर उठे सवाल

सूचना मिलते ही लक्ष्य के पिता अंजनी कुमार मिश्रा और उनकी पत्नी तुरंत बेंगलुरु पहुंचे। बेटे के पार्थिव शरीर को देखकर परिवार के मन में कई शंकाएं पैदा हो गईं। मां का कहना है कि नौवीं मंजिल जैसी अत्यधिक ऊंचाई से गिरने के बावजूद शरीर पर उस तरह की गंभीर चोटें नजर नहीं आ रही थीं, जैसी आमतौर पर ऐसे हादसों में दिखनी चाहिए।

इसके बाद परिजनों ने हॉस्टल में जाकर उस जगह का मुआयना किया, जहां से लक्ष्य के गिरने का दावा किया गया था। मां ने बताया कि नौवीं मंजिल पर स्थित जिस खिड़की से गिरने की बात कही जा रही है, उसमें जाली लगी हुई थी और वह बेहद संकरी थी। उनका तर्क है कि इतने छोटे और संकरे हिस्से से किसी वयस्क का गिरना या छलांग लगाना बेहद मुश्किल है। इसके अलावा जमीन पर मिले खून के निशानों को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए और दावा किया कि वे निशान ऊंचाई से गिरने की बात से मेल नहीं खाते।

कॉलेज प्रशासन पर आरोप और परिजनों की आशंका

लक्ष्य के परिजनों ने आशंका जताई है कि इस पूरे मामले को जल्दबाजी में आत्महत्या का रूप देकर दबाया जा सकता है। छात्र की मां ने कॉलेज प्रशासन पर सच्चाई छुपाने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह कोई सामान्य दुर्घटना या आत्महत्या नहीं है, बल्कि इसके पीछे हत्या की पूरी संभावना नजर आती है। परिवार ने जनता और प्रशासन से न्याय की गुहार लगाते हुए सच सामने लाने की अपील की है।

सीसीटीवी फुटेज और पुलिस की शुरुआती जांच

मामले की तफ्तीश में जुटी पुलिस का कहना है कि हॉस्टल के सीसीटीवी फुटेज में लक्ष्य रात के करीब 1 बजे नौवीं मंजिल पर अकेले टहलता हुआ दिखाई दिया था। हालांकि पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि केवल इस वीडियो के आधार पर किसी अंतिम नतीजे पर पहुंचना बहुत जल्दबाजी होगी।

पिता अंजनी कुमार मिश्रा द्वारा दर्ज कराई गई औपचारिक शिकायत के आधार पर पुलिस ने अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज कर लिया है। जांच अधिकारी कॉलेज प्रशासन, हॉस्टल कर्मियों और संबंधित लोगों से सघन पूछताछ कर रहे हैं। घटनास्थल के साक्ष्य, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य उपलब्ध तकनीकी जानकारियों का बारीकी से विश्लेषण किया जा रहा है। हॉस्टल की उस नौवीं मंजिल पर उस रात असल में क्या हुआ था, यह पूरी पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

सवाल-जवाब

लक्ष्य मिश्रा कौन थे और वह कहां पढ़ाई कर रहे थे?
लक्ष्य मिश्रा 19 वर्षीय बीटेक सेकंड ईयर के छात्र थे, जो बेंगलुरु के मणिपाल इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे।
यह घटना किस तारीख और समय पर हुई थी?
यह घटना 6 अप्रैल की देर रात हुई थी, और सीसीटीवी फुटेज में लक्ष्य को रात करीब 1 बजे नौवीं मंजिल पर अकेले देखा गया था।
छात्र के परिवार ने किस बात पर संदेह जताया है?
परिवार का कहना है कि नौवीं मंजिल की खिड़की बेहद संकरी और जालीदार थी, जिससे गिरना संभव नहीं लगता, साथ ही शव पर ऊंचाई से गिरने जैसी गंभीर चोटें नहीं दिख रही थीं।
पुलिस ने इस मामले में अब तक क्या कानूनी कदम उठाया है?
पुलिस ने पिता अंजनी कुमार मिश्रा की शिकायत के आधार पर अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है और कॉलेज से जुड़े लोगों से पूछताछ कर रही है।
लक्ष्य मिश्रा की शैक्षणिक पृष्ठभूमि कैसी थी?
लक्ष्य हमेशा पढ़ाई में अच्छे रहे थे और लगभग 90 प्रतिशत अंक हासिल करते थे, तथा वे मई 2026 की परीक्षाओं की तैयारी में लगे थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·9 दिन पहले

नौवीं मंजिल की इतनी संकरी खिड़की से गिरने की बात सचमुच गले नहीं उतरती।

Arjun Mehta@arjun-mehta·9 दिन पहले

बेंगलुरु के हॉस्टल में बीटेक छात्र की संदिग्ध मौत ने उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और परिसर के बुनियादी ढांचे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती सीसीटीवी फुटेज और संकरी खिड़कियों जैसे विरोधाभासी भौतिक साक्ष्यों के बीच, यह मामला केवल एक प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गहन फोरेंसिक जांच की मांग करता है। यदि समय पर पारदर्शिता नहीं बरती गई, तो यह घटना परिसरों में बढ़ती अनिश्चितता और न्याय की मांग को लेकर एक बड़ा नीतिगत मुद्दा बन सकती है, जिस पर प्रशासन को पारदर्शी रुख अपनाना होगा।

Rajesh Kumar@rajesh-kumar·9 दिन पहले

परिसर में सुरक्षा और सीसीटीवी फुटेज जैसे तकनीकी साक्ष्यों के बीच, यह मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और फोरेंसिक सत्यता की बड़ी परीक्षा बन गया है। यदि पुलिस ने जल्द ही भौतिक साक्ष्यों और परिजनों के उठाए गए बिंदुओं का वैज्ञानिक समाधान नहीं किया, तो यह घटना देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा नीतिगत और राष्ट्रीय मुद्दा बन सकती है, जिससे संस्थानों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठेंगे।

Karan Malhotra@karan-malhotra·9 दिन पहले

इस मामले में पुलिस को फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की विस्तृत रिपोर्ट और विसरा जांच का इंतजार करना होगा। संकरी खिड़की और जमीन पर मिले खून के निशानों की स्थिति जैसे भौतिक साक्ष्य यह तय करेंगे कि यह हादसा था या सोची-समझी साजिश। ऐसे मामलों में सीसीटीवी फुटेज के साथ कॉल डिटेल रिकॉर्ड और हॉस्टल के अन्य छात्रों से पूछताछ ही सच सामने लाएगी।

Ravikash Gupta@ravikash·9 दिन पहले

इस संवेदनशील प्रकरण में करण मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह रेखांकित करना आवश्यक है कि किसी भी प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में सुरक्षा प्रबंधन और छात्र कल्याण नीतियां कितनी महत्वपूर्ण हैं। जब इस तरह की दुखद और संदिग्ध घटनाएं सामने आती हैं, तो न केवल संस्थागत जवाबदेही पर सवाल उठते हैं, बल्कि देश के शैक्षणिक हब के रूप में उभरते परिसरों में छात्रों के मानसिक और भौतिक सुरक्षा तंत्र की निष्पक्ष ऑडिट की आवश्यकता भी तीव्र हो जाती है।

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