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बेंगलुरु में एसआईआर के विरोध पर पुलिस का लाठीचार्ज, एक तरफ दिल्ली में प्रदर्शन तो दूसरी तरफ राजधानी में छात्रों पर कार्रवाईभारत
13 अक्तू॰ 2026, 9:35 am (17 दिन पहले)· 1

बेंगलुरु में एसआईआर के विरोध पर पुलिस का लाठीचार्ज, एक तरफ दिल्ली में प्रदर्शन तो दूसरी तरफ राजधानी में छात्रों पर कार्रवाई

कर्नाटक में 12 अक्टूबर को अजीब राजनीतिक स्थिति देखने को मिली, जहां एक तरफ मंत्री दिल्ली में विरोध प्रदर्शन कर रहे थे और दूसरी तरफ बेंगलुरु में पुलिस ने छात्रों और पत्रकारों पर कार्रवाई की।

कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में 12 अक्टूबर को विरोधाभासी तस्वीरें खुलकर सामने आईं। एक तरफ राज्य के बड़े नेता राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की सड़कों पर उतरकर एसआईआर और पुलिस की ज्यादतियों के खिलाफ विपक्षी मार्च का नेतृत्व कर रहे थे, तो दूसरी तरफ उनकी अपनी ही गृह राज्य की राजधानी बेंगलुरु में पुलिस का सख्त और आक्रामक रवैया देखने को मिला। बेंगलुरु पुलिस ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे दर्जनों विद्यार्थियों को बलपूर्वक हिरासत में ले लिया और इस पूरे घटनाक्रम को अपने कैमरों में रिकॉर्ड कर रहे फोटो पत्रकारों के साथ भी कथित रूप से धक्का-मुक्की और मारपीट की घटना को अंजाम दिया।

फ्रीडम पार्क के पास सीईओ कार्यालय के बाहर हंगामा

यह पूरा घटनाक्रम फ्रीडम पार्क से लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर, मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के ठीक सामने स्थित एसजेपी कॉलेज के बाहर घटित हुआ। प्रदर्शन में शामिल छात्र और विभिन्न कार्यकर्ता वोटर लिस्ट रिवीजन यानी एसआईआर को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की मांग कर रहे थे। इसके साथ ही वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर भी सीईओ कार्यालय की ओर आगे बढ़ने का प्रयास कर रहे थे।

मीडिया कवरेज के दौरान पत्रकारों पर हमला

मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार, वर्दी पहने पुलिसकर्मियों के अलावा सादे कपड़ों में कुछ अन्य लोग भी वहां अचानक आ धमके और उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चारों तरफ से घेर लिया। इस गहमागहमी के बीच जब मीडियाकर्मी इस पूरी कार्रवाई को अपने कैमरों में कैद कर रहे थे, तो उनके कैमरे छीनने का प्रयास किया गया और पत्रकारों के साथ मारपीट की गई। अपने ही राज्य में विद्यार्थियों और मीडिया कर्मियों पर हुई इस पुलिस कार्रवाई ने मौजूदा सरकार की कार्यशैली और दोहरे रवैये पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सोशल मीडिया पर फूटा गुस्सा और अधिकारियों का पक्ष

माई वोट, माई राइट नामक एक्टिविस्ट समूह के अनुसार, जैसे ही मार्च की शुरुआत होने वाली थी, पुलिस ने उससे पहले ही लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया था। इस कार्रवाई को लेकर सोशल मीडिया पर भी तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अशोका यूनिवर्सिटी की एसोसिएट प्रोफेसर अर्पिता दास ने कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को टैग करते हुए X पर सवाल उठाया कि कांग्रेस शासित राज्य में युवाओं के साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जा रहा है। वहीं इस मामले पर डीसीपी सेंट्रल अक्षय एम. हकाय ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों से फ्रीडम पार्क जाने का अनुरोध किया गया था, लेकिन उनके द्वारा निर्देश न माने जाने के कारण उन्हें एहतियाती हिरासत में ले लिया गया।

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सवाल-जवाब

यह घटना कहाँ पर हुई?
यह घटना बेंगलुरु में फ्रीडम पार्क के पास एसजेपी कॉलेज के बाहर मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के सामने हुई।
प्रदर्शनकारी क्या मांग कर रहे थे?
प्रदर्शनकारी वोटर लिस्ट रिवीजन को तुरंत रद्द करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लिया और कवरेज कर रहे पत्रकारों के साथ कथित तौर पर मारपीट की।
इस मामले पर पुलिस अधिकारी का क्या कहना था?
डीसीपी सेंट्रल अक्षय एम. हकाय ने बताया कि प्रदर्शनकारियों को फ्रीडम पार्क जाने के लिए कहा गया था और बात न मानने पर उन्हें हिरासत में लिया गया।
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टिप्पणियाँ 5

Nyra Kaif@nyra-kaif·16 दिन पहले

दिल्ली में विरोध और घर में छात्रों पर लाठीचार्ज, बात कुछ जम नहीं रही। पुलिस कह रही है बात नहीं मानी इसलिए उठाया, पर पत्रकारों के कैमरे छीनना कौन सा नियम है भाई?

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 दिन पहले

दिल्ली में विरोध करने वाले नेता जब वापस अपने राज्य लौटेंगे, तो क्या वे बेंगलुरु में छात्रों और पत्रकारों पर लाठीचार्ज करने वाली पुलिस से कोई सवाल पूछेंगे?

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·16 दिन पहले

अर्जुन, नेताओं से उम्मीद करना बेमानी है। पुलिस अपना काम ऊपर के इशारे पर ही करती है, फिर वे चाहे दिल्ली में हों या बेंगलुरु में।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

दिल्ली में विरोध और अपने ही राज्य में छात्रों पर लाठीचार्ज, राजनीति का ये दोहरा चेहरा रोज देखने को मिलता है। जब पुलिस मीडिया को भी नहीं बख्शती, तो आम आदमी की सुरक्षा का अंदाज़ा लगाना मुश्किल नहीं है।

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। एक तरफ दिल्ली में मार्च और घर पर छात्रों पर लाठीचार्ज, राजनीति का यही सच है।

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