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भीलवाड़ा में नवासी के आगमन पर मोहम्मद यूसुफ ने सजाईं दो थार गाड़ियां, ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागतराजस्थान
10 जुल॰ 2026, 8:00 am (32 दिन पहले)· 3

भीलवाड़ा में नवासी के आगमन पर मोहम्मद यूसुफ ने सजाईं दो थार गाड़ियां, ढोल-नगाड़ों से हुआ स्वागत

भीलवाड़ा में नवासी के जन्म पर नाना मोहम्मद यूसुफ ने दो थार गाड़ियां सजाकर भव्य जश्न मनाया और ढोल-नगाड़ों तथा फूलों की बारिश के साथ बेटी को घर लाया, जिससे समाज में बेटियों के सम्मान का संदेश गया.

राजस्थान के भीलवाड़ा शहर से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने बेटी के जन्म पर जश्न मनाने का नया नजरिया दिखा दिया है. भवानी नगर में रहने वाले मोहम्मद यूसुफ के घर उनकी नवासी ने जन्म लिया, तो उन्होंने इस खुशी को इतने भव्य अंदाज में मनाया कि पूरा इलाका चर्चा करने लगा. आमतौर पर बेटे के जन्म पर धूमधाम की खबरें सुनने को मिलती हैं, लेकिन मोहम्मद यूसुफ ने साबित कर दिया कि बेटी का आना भी उतनी ही बड़ी खुशी की बात है.

अस्पताल से घर तक निकला शाही काफिला

मोहम्मद यूसुफ की बेटी ने भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय की मातृ एवं शिशु इकाई में नन्ही बच्ची को जन्म दिया. जैसे ही नाना मोहम्मद यूसुफ को यह खबर मिली, उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा. इस पल को यादगार बनाने के लिए उन्होंने दो थार गाड़ियों को खास तौर पर सजवाया. फूलों और सजावट से लदी ये दोनों गाड़ियां अस्पताल पहुंचीं, जहां से मोहम्मद यूसुफ अपनी बेटी और नवजात नवासी को लेकर बड़े शानो-शौकत के साथ भवानी नगर स्थित अपने घर के लिए रवाना हुए. जब यह काफिला घर के मुख्य दरवाजे पर पहुंचा, तो वहां पहले से मौजूद परिवार और पड़ोसियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ नन्ही मेहमान का स्वागत किया. इस दौरान गाड़ियों पर और घर के आंगन में फूलों की बारिश भी की गई, जिसने पूरे माहौल को उत्सव जैसा बना दिया.

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बेटियां बोझ नहीं, अल्लाह की नेमत हैं

इतने बड़े जश्न के पीछे की वजह बताते हुए मोहम्मद यूसुफ ने कहा कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटी के जन्म को लेकर संकीर्ण सोच बनी हुई है, और वे इसी सोच को बदलना चाहते हैं. उन्होंने कहा, बेटी का जन्म हमारे परिवार के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है. जिस घर में बेटी आती है, वहां बरकत और प्यार का वास होता है. मोहम्मद यूसुफ ने आगे कहा कि यह जश्न महज दिखावे के लिए नहीं किया गया, बल्कि यह समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच पैदा करने की एक छोटी सी कोशिश है. उनका मानना है कि बेटी के जन्म को अल्लाह की रहमत मानकर उसका स्वागत करना हर परिवार का फर्ज होना चाहिए.

बेटियों का सम्मान, समाज की जिम्मेदारी

मोहम्मद यूसुफ का कहना है कि बेटियां किसी भी परिवार की शान होती हैं और आने वाले कल का भविष्य भी उन्हीं से जुड़ा है. उनका संदेश साफ है, जिस उत्साह और धूमधाम से बेटे के जन्म पर जश्न मनाया जाता है, ठीक उसी स्तर पर बेटियों का स्वागत भी होना चाहिए. मोहम्मद यूसुफ के इस भावुक और अनोखे कदम ने न सिर्फ उनके अपने परिवार का बल्कि आसपास रहने वाले पूरे इलाके के लोगों का भी दिल जीत लिया है. दो सजी हुई थार गाड़ियां, ढोल-नगाड़ों की गूंज और फूलों की बारिश, यह पूरा नजारा इस बात का सबूत बन गया कि अगर सोच में बदलाव आ जाए, तो हर बेटी का जन्म किसी उत्सव से कम नहीं हो सकता.

सवाल-जवाब

यह घटना कहां की है?
यह घटना राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के भवानी नगर स्थित मोहम्मद यूसुफ के घर की है.
यह भव्य जश्न किसने और क्यों मनाया?
नवजात बच्ची के नाना मोहम्मद यूसुफ ने अपनी नवासी के जन्म पर यह भव्य जश्न मनाया, ताकि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच फैले.
बच्ची का जन्म कहां हुआ?
बच्ची का जन्म भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय की मातृ एवं शिशु इकाई में हुआ.
जश्न में खास क्या था?
दो सजी हुई थार गाड़ियों का काफिला अस्पताल से घर पहुंचा, जहां ढोल-नगाड़ों और फूलों की बारिश के साथ नवजात का स्वागत किया गया.
मोहम्मद यूसुफ ने क्या संदेश दिया?
उन्होंने कहा कि बेटियां बोझ नहीं बल्कि अल्लाह की रहमत हैं और उनका स्वागत भी बेटों जितने ही उत्साह से होना चाहिए.
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