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भीलवाड़ा में गांव की सड़क पर दिखा 9 फीट का अजगर, नागरिक सुरक्षा टीम ने रेस्क्यू कर बचाई ग्रामीणों की जानभारत
2 घंटे पहले· 1

भीलवाड़ा में गांव की सड़क पर दिखा 9 फीट का अजगर, नागरिक सुरक्षा टीम ने रेस्क्यू कर बचाई ग्रामीणों की जान

भीलवाड़ा जिले के कैलाशपुरी गांव में सड़क किनारे 9 फीट लंबा अजगर दिखने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया, जिसे नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर वन क्षेत्र में छोड़ दिया।

भीलवाड़ा जिले के गुरला गांव के पास स्थित कैलाशपुरी गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया जब गांव की सड़क किनारे एक करीब 9 फीट लंबा अजगर दिखाई दिया। बारिश का मौसम शुरू होते ही आमतौर पर सांप, बिच्छू और बिलों में रहने वाले जीव इंसानी बस्तियों की तरफ निकल आते हैं, और कैलाशपुरी में भी कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। अजगर को देखते ही आसपास के ग्रामीणों में दहशत फैल गई और देखते ही देखते मौके पर भीड़ जमा हो गई। हालांकि ग्रामीणों ने सूझबूझ दिखाते हुए अजगर से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की और तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दे दी।

रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा

सूचना मिलते ही वनपाल चंद्रपाल सिंह राणावत के निर्देश पर नागरिक सुरक्षा विभाग के स्वयंसेवक और वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा अपनी टीम लेकर तुरंत मौके पर पहुंच गए। टीम ने देखा कि अजगर सड़क किनारे बनी एक मोटी नाली में दुबका बैठा है। इसके बाद टीम ने बेहद सावधानी और तकनीकी कौशल के साथ अजगर को नाली से बाहर निकालने का काम शुरू किया। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान पूरी सतर्कता बरती गई ताकि न तो अजगर को कोई नुकसान पहुंचे और न ही आसपास खड़े ग्रामीणों को कोई खतरा हो। कुछ ही देर की मशक्कत के बाद टीम ने अजगर को सुरक्षित रूप से अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में नजदीकी सुरक्षित वन क्षेत्र में ले जाकर छोड़ दिया गया। इस पूरे रेस्क्यू अभियान में मौके पर मौजूद ग्रामीणों के सहयोग ने भी अहम भूमिका निभाई, जिन्होंने टीम को अजगर तक पहुंचने और भीड़ को नियंत्रित रखने में मदद की। रेस्क्यू पूरा होने के बाद बैरवा ने वहां जमा ग्रामीणों को वन्यजीव संरक्षण को लेकर जागरूक भी किया और अपील की कि भविष्य में भी अगर कोई जंगली जीव आबादी क्षेत्र में दिखे तो उसे नुकसान पहुंचाने के बजाय तुरंत वन विभाग को सूचना दी जाए।

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कितना खतरनाक है भारतीय रॉक पाइथन

नारायण लाल बैरवा ने बताया कि कैलाशपुरी में मिला अजगर भारतीय रॉक पाइथन प्रजाति का है। यह प्रजाति आकार में विशाल होती है, हालांकि इसमें जहर नहीं होता। बैरवा के मुताबिक इस प्रजाति के अजगर की लंबाई 20 फीट तक पहुंच सकती है, और इसी विशाल आकार की वजह से यह देखने में बेहद खतरनाक और ताकतवर नजर आता है। हालांकि इसका खतरा जहर से नहीं बल्कि इसकी ताकत और आकार से जुड़ा माना जाता है। यही वजह है कि भारतीय रॉक पाइथन को भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत पूरी तरह संरक्षित प्रजाति का दर्जा दिया गया है, यानी इसे पकड़ना, मारना या नुकसान पहुंचाना कानूनन अपराध है। यही वजह थी कि कैलाशपुरी में अजगर दिखने के बाद ग्रामीणों ने खुद कोई कार्रवाई करने के बजाय वन विभाग को बुलाना ही बेहतर समझा, और नागरिक सुरक्षा विभाग की टीम की सूझबूझ से एक बड़ा हादसा टल गया।

सवाल-जवाब

भीलवाड़ा में अजगर कहां देखा गया?
भीलवाड़ा जिले के गुरला गांव के पास स्थित कैलाशपुरी गांव में गांव की सड़क किनारे एक करीब 9 फीट लंबा अजगर देखा गया।
अजगर को रेस्क्यू किसने किया?
वनपाल चंद्रपाल सिंह राणावत के निर्देश पर नागरिक सुरक्षा विभाग के स्वयंसेवक और वन्यजीव रक्षक नारायण लाल बैरवा ने अपनी टीम के साथ अजगर को सुरक्षित रेस्क्यू किया।
अजगर आखिर कहां छिपा मिला था?
अजगर सड़क किनारे बनी एक मोटी नाली में बैठा हुआ मिला था।
रेस्क्यू के बाद अजगर को कहां छोड़ा गया?
रेस्क्यू के बाद अजगर को वन विभाग की निगरानी में नजदीकी सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।
यह किस प्रजाति का अजगर था?
यह भारतीय रॉक पाइथन प्रजाति का अजगर था, जो विषहीन लेकिन आकार में बेहद विशाल होता है।
भारतीय रॉक पाइथन की लंबाई कितनी हो सकती है?
इस प्रजाति की लंबाई 20 फीट तक हो सकती है।
क्या भारतीय रॉक पाइथन कानूनी रूप से संरक्षित है?
हां, यह प्रजाति भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 के तहत पूरी तरह संरक्षित है।
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