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सहारनपुर में डेढ़ साल की सुनवाई के बाद DM परिसर की मस्जिद पर ध्वस्तीकरण का आदेश, 6.41 करोड़ जुर्माना भीउत्तर प्रदेश
17 जुल॰ 2026, 1:02 am (45 दिन पहले)· 1

सहारनपुर में डेढ़ साल की सुनवाई के बाद DM परिसर की मस्जिद पर ध्वस्तीकरण का आदेश, 6.41 करोड़ जुर्माना भी

सहारनपुर के DM कार्यालय परिसर में बनी मस्जिद को अदालत ने सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण मानते हुए हटाने का आदेश दिया है, साथ ही 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में बनी एक मस्जिद के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद यह माना कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से खड़ा किया गया है और इसे हटाने का आदेश दे दिया है। अदालत ने इसके साथ ही जिम्मेदार पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन की मोहलत दी गई है।

बजरंग दल के पूर्व पदाधिकारी की शिकायत से शुरू हुआ मामला

यह पूरा विवाद तब सामने आया जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने प्रशासन से इसकी शिकायत की। उनका आरोप था कि जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में मौजूद यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनाई गई है। त्यागी ने यह भी दावा किया कि इस जगह का इस्तेमाल सिर्फ धार्मिक कामों के लिए नहीं हो रहा था, बल्कि वहां कथित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही थीं। इसी शिकायत के आधार पर प्रशासन ने मामले की पड़ताल शुरू की।

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डाकघर और किराये के कमरों का आरोप

शिकायत में कहा गया था कि परिसर के भीतर एक डाकघर संचालित किया जा रहा था और इससे जुड़े कुछ कमरे किराये पर दिए गए थे, जिनसे नियमित आय हो रही थी। इन आरोपों के बाद मामला नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा और वहां लंबी सुनवाई चली।

अदालत में स्वामित्व साबित नहीं कर पाया मस्जिद पक्ष

सरकारी अधिवक्ता विनय चौहान के अनुसार, सुनवाई के दौरान मस्जिद की तरफ से जमीन पर मालिकाना हक साबित करने वाला कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका। पक्ष ने बिजली का बिल और नगर पालिका के असेसमेंट से जुड़े कागजात अदालत में रखे, लेकिन इन्हें जमीन के स्वामित्व का पुख्ता सबूत नहीं माना गया। मजिस्ट्रेट की जांच में सामने आया कि करीब 315 वर्गमीटर क्षेत्र में बना यह ढांचा सरकारी भूमि पर खड़ा है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने निर्माण को अवैध करार देते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया। आदेश आने के बाद मौके पर नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है।

1951 से परिसर में होने का दावा

शिकायतकर्ता विकास त्यागी का कहना है कि यह मस्जिद साल 1951 से इसी परिसर में मौजूद है और लंबे समय से इससे जुड़े कमरों को किराये पर देकर आर्थिक फायदा उठाया जा रहा था। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि चुनाव के दौरान परिसर में बाहरी लोगों का आना-जाना प्रशासनिक कामकाज और चुनावी गोपनीयता को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल प्रशासन अदालत के आदेश पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। अगर तय 30 दिन की समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होता है, तो नियमों के मुताबिक प्रशासन अगला कानूनी कदम उठा सकता है।

सवाल-जवाब

सहारनपुर में किस मस्जिद पर कार्रवाई हुई है?
यह मस्जिद उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिलाधिकारी (DM) कार्यालय परिसर में बनी हुई थी।
अदालत ने क्या आदेश दिया है?
नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध अतिक्रमण मानते हुए हटाने का आदेश दिया है और लगभग 6.41 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।
आदेश का पालन करने के लिए कितना समय दिया गया है?
आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन का समय निर्धारित किया गया है।
यह मामला सामने कैसे आया?
बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत के बाद यह मामला सामने आया, जिन्होंने आरोप लगाया था कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है।
शिकायत में और क्या आरोप लगाए गए थे?
शिकायत में कहा गया था कि परिसर में एक डाकघर चल रहा था और कुछ कमरे किराये पर देकर आय अर्जित की जा रही थी।
अदालत ने ढांचे को अवैध क्यों माना?
मस्जिद पक्ष सुनवाई में जमीन के स्वामित्व से जुड़े वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सका और मजिस्ट्रेट की जांच में करीब 315 वर्गमीटर क्षेत्र सरकारी भूमि पर पाया गया।
मस्जिद परिसर में कब से मौजूद होने का दावा किया गया है?
शिकायतकर्ता विकास त्यागी के मुताबिक, यह मस्जिद 1951 से इस परिसर में मौजूद है।
अगर 30 दिन में आदेश का पालन नहीं हुआ तो क्या होगा?
ऐसी स्थिति में प्रशासन नियमानुसार अगली कानूनी कार्रवाई कर सकता है।
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