उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में बनी एक मस्जिद के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। नगर मजिस्ट्रेट की अदालत ने करीब डेढ़ साल तक चली सुनवाई के बाद यह माना कि यह ढांचा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से खड़ा किया गया है और इसे हटाने का आदेश दे दिया है। अदालत ने इसके साथ ही जिम्मेदार पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया है। आदेश का पालन करने के लिए 30 दिन की मोहलत दी गई है।
बजरंग दल के पूर्व पदाधिकारी की शिकायत से शुरू हुआ मामला
यह पूरा विवाद तब सामने आया जब बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने प्रशासन से इसकी शिकायत की। उनका आरोप था कि जिलाधिकारी कार्यालय परिसर में मौजूद यह मस्जिद सरकारी जमीन पर बनाई गई है। त्यागी ने यह भी दावा किया कि इस जगह का इस्तेमाल सिर्फ धार्मिक कामों के लिए नहीं हो रहा था, बल्कि वहां कथित रूप से व्यावसायिक गतिविधियां भी चल रही थीं। इसी शिकायत के आधार पर प्रशासन ने मामले की पड़ताल शुरू की।
डाकघर और किराये के कमरों का आरोप
शिकायत में कहा गया था कि परिसर के भीतर एक डाकघर संचालित किया जा रहा था और इससे जुड़े कुछ कमरे किराये पर दिए गए थे, जिनसे नियमित आय हो रही थी। इन आरोपों के बाद मामला नगर मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा और वहां लंबी सुनवाई चली।
अदालत में स्वामित्व साबित नहीं कर पाया मस्जिद पक्ष
सरकारी अधिवक्ता विनय चौहान के अनुसार, सुनवाई के दौरान मस्जिद की तरफ से जमीन पर मालिकाना हक साबित करने वाला कोई वैध दस्तावेज पेश नहीं किया जा सका। पक्ष ने बिजली का बिल और नगर पालिका के असेसमेंट से जुड़े कागजात अदालत में रखे, लेकिन इन्हें जमीन के स्वामित्व का पुख्ता सबूत नहीं माना गया। मजिस्ट्रेट की जांच में सामने आया कि करीब 315 वर्गमीटर क्षेत्र में बना यह ढांचा सरकारी भूमि पर खड़ा है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने निर्माण को अवैध करार देते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया। आदेश आने के बाद मौके पर नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है।
1951 से परिसर में होने का दावा
शिकायतकर्ता विकास त्यागी का कहना है कि यह मस्जिद साल 1951 से इसी परिसर में मौजूद है और लंबे समय से इससे जुड़े कमरों को किराये पर देकर आर्थिक फायदा उठाया जा रहा था। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि चुनाव के दौरान परिसर में बाहरी लोगों का आना-जाना प्रशासनिक कामकाज और चुनावी गोपनीयता को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल प्रशासन अदालत के आदेश पर आगे की कार्रवाई की तैयारी में जुटा है। अगर तय 30 दिन की समयसीमा में आदेश का पालन नहीं होता है, तो नियमों के मुताबिक प्रशासन अगला कानूनी कदम उठा सकता है।











