कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच बृहस्पतिवार को नई दिल्ली में तीखी बयानबाजी देखने को मिली. कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विपक्षी दलों को तोड़ने का आरोप लगाया, जिसके बाद भाजपा ने पलटवार करते हुए कहा कि तथाकथित इंडिया यानी इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस गठबंधन अपने ही कर्मों और नेतृत्व की अक्षमता के कारण बिखर रहा है.
जयराम रमेश का आरोप, दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश का दावा
जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि अमित शाह ने विपक्षी पार्टियों को तोड़ा है और अब वे चालाकी से संसद में दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश में लगे हैं. रमेश ने कहा कि अगर ऐसा किया गया तो यह संविधान का सीधा अपमान होगा. उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह से जुटाया गया बहुमत लोकतंत्र पर एक धब्बे की तरह होगा. रमेश का यह बयान भाजपा को नागवार गुजरा और पार्टी ने कुछ ही घंटों में कई मोर्चों से जवाब दिया.
सुधांशु त्रिवेदी का पलटवार, गठबंधन के अस्तित्व पर ही उठाया सवाल
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और राज्यसभा सदस्य सुधांशु त्रिवेदी ने रमेश के आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि विपक्ष का तथाकथित इंडिया गठबंधन शुरू से ही अंतर्विरोधों, हताशा और सत्ता की लालसा पर टिका था. त्रिवेदी ने यह भी दावा किया कि विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति हताशा और ईर्ष्या के चलते ही यह गठबंधन खड़ा किया था. उनके मुताबिक, यह गठबंधन अब अपने ही कर्मों और नेतृत्व की अक्षमता के कारण खुद-ब-खुद बिखरता नजर आ रहा है.
त्रिवेदी ने रमेश से सीधा सवाल पूछा कि क्या इंडिया गठबंधन का वास्तव में कोई वजूद भी है. उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस ने लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा के सभापति को लिखित रूप में यह बताया है कि कौन-कौन से दल इंडिया गठबंधन के सदस्य हैं, और क्या इसकी पुष्टि की गई है कि इन सभी दलों ने मिलकर किसी एक नेता को अपना नेतृत्वकर्ता चुना है. त्रिवेदी ने कहा कि अगर ऐसा कुछ वजूद में है ही नहीं, तो जो चीज असल में मौजूद ही नहीं, उसके बिखरने का ठीकरा दूसरों के सिर फोड़कर अपनी नाकामियां छिपाने की कोशिश बेकार है. उनके मुताबिक कांग्रेस को इसके बजाय आत्मचिंतन करना चाहिए. त्रिवेदी ने यह भी आरोप लगाया कि इंडिया गठबंधन में शामिल दल और उनके नेता आपस में एक-दूसरे पर भरोसा तक नहीं करते.
तुहिन सिन्हा बोले, दल-बदल कानून के दायरे में हर बदलाव कानूनी
भाजपा के एक और प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने जयराम रमेश के आरोप को पूरी तरह गलत करार दिया. उन्होंने कहा कि पार्टी में हुए सभी राजनीतिक बदलाव दल-बदल रोधी कानून के दायरे में आते हैं और पूरी तरह कानूनी हैं. सिन्हा ने कहा कि जो नेता और कार्यकर्ता विपक्ष से अलग होकर भाजपा से जुड़ना चाहते हैं, पार्टी यह सुनिश्चित करती है कि ऐसा करते समय दल-बदल रोधी कानून के सभी प्रावधानों का पालन हो और उनका पूरा सम्मान किया जाए. यह कानून किसी भी जनप्रतिनिधि को कुछ तय शर्तों के बगैर पार्टी बदलने से रोकता है, और भाजपा का कहना है कि हाल में हुआ हर बदलाव इन्हीं शर्तों के दायरे में हुआ है.
सिन्हा ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर तृणमूल कांग्रेस के 22 सदस्य दल-बदल रोधी कानून के प्रावधानों का पालन करते हुए अलग होकर कोई नई पार्टी बनाते हैं या किसी अन्य पार्टी से जुड़ जाते हैं, या फिर उद्धव ठाकरे की पार्टी विभाजित होकर किसी दूसरी पार्टी में मिल जाती है, तो इसमें भाजपा की क्या गलती है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का ही एक हिस्सा बताया. सिन्हा ने यह भी कहा कि एक दौर में कांग्रेस के पास संख्या बल हुआ करता था, लेकिन आज यह संख्या बल भाजपा के पास है. उन्होंने इसे गैर-कानूनी तरीके से जुटाई गई संख्या बताना पूरी तरह हास्यास्पद करार दिया और कहा कि यह सिर्फ कांग्रेस की हताशा को दिखाता है.
परिसीमन पर भी भिड़ीं दोनों पार्टियां
बातचीत का दायरा परिसीमन, यानी चुनावी क्षेत्रों की समय-समय पर होने वाली नए सिरे से सीमांकन प्रक्रिया, तक भी पहुंचा. तुहिन सिन्हा ने कांग्रेस के परिसीमन विरोध को खारिज करते हुए आरोप लगाया कि पार्टी को डर है कि इस प्रक्रिया से देश के राजनीतिक परिवारों का दबदबा कमजोर पड़ जाएगा. उन्होंने कहा कि जयराम रमेश खुलेआम कह चुके हैं कि वे परिसीमन का पुरजोर विरोध करेंगे, और यह बयान कांग्रेस पार्टी की विशेषाधिकार वाली मानसिकता को उजागर करता है. सिन्हा ने यहां तक कह दिया कि इस रुख से कांग्रेस युवा-विरोधी और महिला-विरोधी नजर आती है. भाजपा प्रवक्ता ने यह भी कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया लंबे समय से लंबित पड़ी है और इसके पूरा होने से राजनीति में नए और युवा चेहरों के लिए अवसर पैदा होंगे.




















