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भोपाल की सड़कों से लूटे गए फोन कैसे पहुंचते थे बांग्लादेश, चार लुटेरों की गिरफ्तारी से खुली पूरी कहानीमध्य प्रदेश
26 जून 2026, 2:13 am (79 दिन पहले)· 3

भोपाल की सड़कों से लूटे गए फोन कैसे पहुंचते थे बांग्लादेश, चार लुटेरों की गिरफ्तारी से खुली पूरी कहानी

अयोध्या नगर पुलिस ने मोबाइल झपटमारी करने वाले चार आरोपियों को पकड़ा, जिनसे 22 फोन बरामद हुए। पूछताछ में भोपाल से मुंबई और फिर बांग्लादेश तक फैले इंटरनेशनल सिंडिकेट का खुलासा हुआ।

भोपाल की सड़कों पर चलते राहगीरों को अंदाजा भी नहीं था कि उनकी जेब और हाथ में मौजूद मोबाइल पर सरहद पार बैठे तस्करों की नजर है। अयोध्या नगर पुलिस ने जब मोबाइल झपटने वाले चार शातिर लुटेरों को दबोचा, तो परत दर परत एक ऐसा नेटवर्क सामने आया जिसकी जड़ें भोपाल की अमन कॉलोनी के बदनाम ईरानी डेरे से निकलकर देश की आर्थिक राजधानी मुंबई और वहां से सीधे पड़ोसी देश बांग्लादेश की सीमाओं तक जुड़ी हुई थीं।

किसी फिल्मी थ्रिलर जैसा था पूरा रूट

इस गिरोह का तरीका किसी बॉलीवुड क्राइम थ्रिलर से कम नहीं था। भोपाल की गलियों से झपटे गए मोबाइल कूरियर और गुर्गों के जरिए फौरन मुंबई भेज दिए जाते थे। वहां अंडरवर्ल्ड और चोर बाजारों में इन फोन के IMEI नंबर को फ्लैश या टेंपर कर दिया जाता था, ताकि भारतीय एजेंसियां इन्हें कभी ट्रैक न कर पाएं।

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जो फोन महंगे और प्रीमियम होते थे, उन्हें टुकड़ों में काट दिया जाता था। उनकी स्क्रीन, महंगे कैमरे और मदरबोर्ड मुंबई के लोकल दुकानदारों को मोटी कीमत पर बेच दिए जाते थे। वहीं जो फोन चालू हालत में रहते थे, उन्हें समुद्र और जमीनी रास्तों से अवैध तरीके से बांग्लादेश की सरहद पार पहुंचा दिया जाता था।

सबदर ईरानी है पूरे खेल का सरगना

अयोध्या नगर थाना प्रभारी महेश लिल्हारे ने बताया कि अयोध्या नगर इलाके से चार आरोपियों को पकड़ा गया है, जिनके पास से 22 मोबाइल बरामद हुए हैं। पूछताछ में पता चला कि इस पूरे नेटवर्क का हब ईरानी डेरा था और इसका सरगना सबदर ईरानी है। यही गिरोह मोबाइल पहले मुंबई और फिर वहां से बांग्लादेश भेजता था।

पकड़े गए आरोपियों ने बताया कि सबदर तीन से चार हजार रुपये में एक मोबाइल खरीद लेता था। उसके गुर्गे भोपाल के सेवनिया, गोविंदपुरा, पिपलानी और अयोध्या नगर जैसे इलाकों में फैले हुए थे।

पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी अनिल शर्मा भी मानते हैं कि शुरुआत में ही इन फोन के IMEI नंबर फ्लैश कर दिए जाते हैं ताकि अपराधी पकड़ में न आएं। उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इन फोन का इस्तेमाल किसी अनैतिक या गलत गतिविधि में होने से इनकार नहीं किया जा सकता।

छह महीने पहले भी पड़ी थी दबिश

यह पहला मौका नहीं है जब ईरानी डेरा सुर्खियों में आया हो। ठीक छह महीने पहले भी पुलिस ने आधी रात भारी फोर्स के साथ यहां छापा मारा था। उस वक्त 32 आरोपी पकड़े गए थे और 51 मोबाइल बरामद हुए थे। इससे साफ है कि जेल जाने के बाद भी यह सिंडिकेट थमने का नाम नहीं ले रहा।

अब पुलिस का मकसद सिर्फ इन छोटे मोहरों को पकड़ना नहीं है, बल्कि मुंबई में बैठे बड़े खरीदारों और बांग्लादेश की सीमा पर सक्रिय तस्करों की पूरी चेन को तोड़ना है। फिलहाल पुलिस को तलाश है सबदर ईरानी की, जिसके पकड़े जाते ही इस इंटरनेशनल नेटवर्क के कई और राज खुलने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

पुलिस ने कितने आरोपी पकड़े और कितने मोबाइल बरामद हुए?
अयोध्या नगर पुलिस ने चार आरोपियों को पकड़ा है, जिनके पास से 22 मोबाइल बरामद हुए हैं।
इस गिरोह का सरगना कौन है?
इस नेटवर्क का हब ईरानी डेरा था और इसका सरगना सबदर ईरानी बताया गया है, जिसकी पुलिस को तलाश है।
लूटे गए फोन कहां भेजे जाते थे?
फोन पहले भोपाल से मुंबई भेजे जाते थे और फिर वहां से समुद्र और जमीनी रास्तों के जरिए बांग्लादेश की सीमा पार तस्करी कर दिए जाते थे।
फोन को ट्रेस होने से बचाने के लिए क्या किया जाता था?
मुंबई में इन फोन के IMEI नंबर को फ्लैश या टेंपर कर दिया जाता था ताकि एजेंसियां इन्हें ट्रैक न कर सकें।
सबदर ईरानी एक मोबाइल कितने में खरीदता था?
पकड़े गए आरोपियों के मुताबिक सबदर तीन से चार हजार रुपये में एक मोबाइल खरीद लेता था।
क्या ईरानी डेरा पहले भी पकड़ में आया था?
हां, ठीक छह महीने पहले पुलिस ने यहां आधी रात छापा मारा था, जिसमें 32 आरोपी पकड़े गए थे और 51 मोबाइल बरामद हुए थे।
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