सीकर जिले के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए एक बेहद सकारात्मक और बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। समग्र शिक्षा अभियान के तहत जिले के सभी 12 ब्लॉकों में विशेष संदर्भ कक्ष तैयार किए जाएंगे। इन कमरों को बनाने का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग और विशेष आवश्यकता वाले छात्र-छात्राओं को उनकी सामान्य पढ़ाई-लिखाई के साथ-साथ उनके अनुकूल अन्य रचनात्मक और पाठ्येतर गतिविधियों में मदद करना है। इस पहल के जरिए बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार सहायक शिक्षण सामग्री, अत्याधुनिक उपकरण और अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही छत के नीचे प्रदान की जाएंगी, जिससे उनका शैक्षणिक सफर आसान हो सके।
विशेष शिक्षकों की निगरानी में होगी पढ़ाई और थेरेपी
राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन निर्देशों के मुताबिक, इन संदर्भ कक्षों में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान ही नहीं दिया जाएगा, बल्कि उन्हें उनकी शारीरिक और मानसिक आवश्यकताओं के अनुसार शैक्षणिक और थेरेपी संबंधी जरूरी सहयोग भी प्रदान किया जाएगा। प्रत्येक बच्चे की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ही इन कमरों में संसाधन जुटाए जाएंगे। संदर्भ कक्षों में प्रशिक्षित विशेष शिक्षकों की तैनाती की जाएगी, जो इन बच्चों को पाठ्यपुस्तकों को समझने, अभ्यास करने और स्कूल की अन्य गतिविधियों में बिना किसी झिझक के भाग लेने के लिए प्रेरित और तैयार करेंगे।
कक्षाओं में मिलेंगे व्हीलचेयर, ब्रेल किट और हियरिंग एड जैसे उपकरण
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के मार्ग में आने वाली शारीरिक और मानसिक बाधाओं को दूर करने के लिए इन संदर्भ कक्षों में कई तरह के आधुनिक सहायक उपकरण और शिक्षण सामग्री रखी जाएगी। इनमें शारीरिक रूप से अक्षम बच्चों के लिए ट्राईसाइकिल, व्हीलचेयर और स्टैंडिंग फ्रेम जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसके साथ ही, दृष्टिबाधित बच्चों के लिए विशेष ब्रेल किट, सुनने में असमर्थ बच्चों के लिए हियरिंग एड और गणितीय गणनाओं को आसान बनाने वाले विशेष कैलकुलेटर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इन सभी उपकरणों का उपयोग संबंधित बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाएगा, ताकि वे बिना किसी परेशानी के पढ़ाई कर सकें और स्कूल की हर गतिविधि में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
कमरे का चयन और दैनिक संचालन के कड़े नियम
प्रशासनिक दिशा-निर्देशों में संदर्भ कक्ष के लिए स्कूल परिसर के भीतर कमरे के चयन को लेकर भी सख्त नियम बनाए गए हैं। संदर्भ कक्ष के लिए केवल ऐसे कमरे का चयन किया जाएगा जो स्कूल के भूतल पर हो या जहां तक दिव्यांग बच्चों की पहुंच बेहद आसान और सुरक्षित हो। इस कमरे में बिजली की सुचारू व्यवस्था, पीने के साफ पानी की सुविधा और रैंप जैसी बुनियादी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी होंगी। इसके अलावा, योजना में पारदर्शिता और उपकरणों की निगरानी के लिए संदर्भ कक्ष में उपलब्ध सभी सामग्रियों का एक विस्तृत रिकॉर्ड रखा जाएगा, ताकि यह पता चल सके कि किस उपकरण का कितना उपयोग हो रहा है और उसकी वर्तमान स्थिति क्या है।
इस पूरे केंद्र का संचालन विशेष शिक्षक की सीधी देखरेख में किया जाएगा। स्कूल समय के दौरान बच्चों को उनकी आवश्यकता के अनुसार एक निर्धारित समय पर संदर्भ कक्ष में बुलाया जाएगा, ताकि उनकी नियमित पढ़ाई भी प्रभावित न हो और उन्हें विशेष मार्गदर्शन भी मिल सके। संदर्भ कक्ष के भीतर पढ़ाने के लिए बच्चों की सीखने की व्यक्तिगत क्षमता और गति के अनुसार ही शिक्षण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। शिक्षा विभाग ने इसके दैनिक संचालन के लिए एक स्पष्ट लक्ष्य भी निर्धारित किया है, जिसके तहत प्रत्येक संदर्भ कक्ष में रोजाना कम से कम 10 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शैक्षणिक और थेरेपी सहायता प्रदान करना अनिवार्य होगा।
पूरे राजस्थान में लागू होगी योजना, सीकर के लिए जारी हुआ बजट
सीकर जिले के अलावा इस बेहतरीन व्यवस्था को पूरे राजस्थान राज्य में बड़े पैमाने पर लागू किया जा रहा है। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्रदेश के सभी 378 ब्लॉक मुख्यालयों पर इस तरह के संदर्भ कक्ष संचालित किए जाएंगे। योजना को सुचारू रूप से चलाने के लिए प्रत्येक ब्लॉक मुख्यालय के संदर्भ कक्ष को प्रतिवर्ष 20 हजार रुपये का बजट आवंटित करने का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग संदर्भ कक्ष में आने वाले बच्चों के वास्तविक यात्रा किराए का भुगतान करने, वहां रखे उपकरणों के नियमित रखरखाव, नई शिक्षण सामग्री खरीदने और अन्य आवश्यक प्रबंधों पर किया जाएगा ताकि बच्चों को ब्लॉक स्तर पर ही हर जरूरी सुविधा मिल सके।
सीकर जिले के कुल 12 ब्लॉकों के लिए विभाग की ओर से कुल 2.40 लाख रुपये का बजट स्वीकृत किया गया है। इस बजट के तहत प्रत्येक संदर्भ कक्ष के लिए आवंटित 20 हजार रुपये में से 12 हजार रुपये की राशि बच्चों के वास्तविक किराए या परिवहन खर्च के लिए रखी गई है, जबकि शेष 8 हजार रुपये की राशि का उपयोग वहां मौजूद उपकरणों के रखरखाव, नई पाठ्य सामग्री खरीदने और अन्य दैनिक व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने में किया जाएगा। शिक्षा विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने से विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों को उनके घर के नजदीक ही स्थानीय स्तर पर बेहतरीन शैक्षणिक सहयोग मिल सकेगा और वे अपनी पढ़ाई को बिना किसी बाधा के आगे बढ़ा सकेंगे।


















