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बिहार के मुजफ्फरपुर में पकड़ा गया राजस्थान नंबर का कंटेनर, छिपाकर लाई गई पंजाब की शराब और दो गिरफ्तारबिहार
8 सित॰ 2026, 12:03 am (17 दिन पहले)· 2

बिहार के मुजफ्फरपुर में पकड़ा गया राजस्थान नंबर का कंटेनर, छिपाकर लाई गई पंजाब की शराब और दो गिरफ्तार

मुजफ्फरपुर में उत्पाद विभाग ने मैथी टोल प्लाजा के पास कार्रवाई करते हुए राजस्थान नंबर के कंटेनर से पंजाब निर्मित 375 कार्टन अवैध शराब बरामद की है। इस दौरान हरियाणा के रहने वाले चालक और कंडक्टर को भी गिरफ्तार किया गया है।

बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बावजूद अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लग पा रही है। तस्कर कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए आए दिन परिवहन के नए और अनोखे हथकंडे अपनाते रहते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, बीते 10 सालों में राज्य के भीतर 5.13 करोड़ लीटर से ज्यादा अवैध शराब जब्त की जा चुकी है और 17 लाख से अधिक लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। ताजा मामले में, उत्पाद विभाग की टीम ने मुजफ्फरपुर जिले में एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। मैथी टोल प्लाजा के पास पकड़े गए एक राजस्थान रजिस्टर्ड कंटेनर से भारी मात्रा में पंजाब निर्मित शराब जब्त की गई है।

लोहे की चादर और खाली कैरेट की आड़ में खेल

तस्करों ने जांच एजेंसियों और स्कैनर मशीनों को धोखा देने के लिए इस वाहन में खास इंतजाम कर रखे थे। उत्पाद अधिकारियों की जांच में यह बात सामने आई कि कंटेनर के पिछले हिस्से के दोनों किनारों पर मोटी लोहे की चादरें वेल्ड की गई थीं। इसका मुख्य उद्देश्य यह था कि बॉर्डर पर लगाई जाने वाली हैंड स्कैनर मशीनों की पकड़ से अंदर छिपाई गई खेप बच सके। इसके अलावा, अवैध शराब के 375 कार्टनों को ऊपर से खाली कैरेटों की आड़ में छिपाकर रखा गया था। इन कार्टनों को खाली कैरेटों के नीचे एक विशेष चैंबर बनाकर इस तरह व्यवस्थित किया गया था कि वाहन के चलने पर किसी भी तरह की संदिग्ध आवाज न आए और किसी को भी शक न हो सके।

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टोल प्लाजा के पास संदिग्ध हालत में खड़ा था वाहन

उत्पाद विभाग को पहले ही गुप्त सूचना मिल चुकी थी कि पंजाब से भारी मात्रा में अवैध शराब की खेप उत्तर प्रदेश के रास्ते बलिया, सिवान और छपरा होते हुए मुजफ्फरपुर पहुंचने वाली है। इस पुख्ता सूचना के आधार पर एएसआई रंजन कुमार सिंह और अजीत कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने मैथी टोल प्लाजा के पास घेराबंदी की। अधिकारियों के मुताबिक, यह कंटेनर टोल प्लाजा से लगभग 100 मीटर की दूरी पर पहले से ही खड़ा था। चालक लगातार मोबाइल फोन पर किसी से बात कर रहा था और किसी स्थानीय संपर्क के आने का इंतजार कर रहा था। जब तय समय तक कोई व्यक्ति वहां नहीं पहुंचा और काफी देर तक वाहन वहीं खड़ा रहा, तो उत्पाद विभाग की टीम ने उसकी तलाशी लेने का फैसला किया।

रात में होनी थी स्थानीय तस्करों को डिलीवरी

उत्पाद इंस्पेक्टर प्रकाश कुमार राम ने जानकारी दी कि इस खेप की डिलीवरी रात के अंधेरे में स्थानीय स्तर के तस्करों को की जानी थी। चालक को स्पष्ट निर्देश मिले थे कि वह पूरे दिन कंटेनर को उसी स्थान पर खड़ा रखे। इस पूरी कार्रवाई के दौरान वाहन के चालक और कंडक्टर को मौके से ही हिरासत में ले लिया गया। पकड़े गए दोनों आरोपियों की पहचान हरियाणा के रहने वाले कुलदीप (चालक) और रामचरण (कंडक्टर) के रूप में हुई है। पूछताछ के दौरान कुछ स्थानीय तस्करों के नाम भी सामने आए हैं, जिनकी भूमिका की गहराई से जांच की जा रही है और उनके संभावित ठिकानों पर दबिश देने की तैयारी चल रही है।

उत्पाद अधिनियम के तहत कानूनी शिकंजा

विभाग ने गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों के खिलाफ उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। बिहार में पिछले एक दशक में शराबबंदी कानूनों के तहत व्यापक स्तर पर जब्ती और गिरफ्तारियां हुई हैं। पुलिस और उत्पाद विभाग की संयुक्त टीमें अब इस पूरे तस्करी नेटवर्क की तह तक जाने के लिए काम कर रही हैं ताकि इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों को भी कानून के दायरे में लाया जा सके।

सवाल-जवाब

मुजफ्फरपुर में शराब की यह खेप कहाँ पकड़ी गई?
यह खेप मैथी टोल प्लाजा के पास पकड़ी गई।
कंटेनर से कुल कितने कार्टन अवैध शराब बरामद हुई?
कंटेनर से पंजाब निर्मित अवैध शराब के 375 कार्टन बरामद किए गए।
गिरफ्तार किए गए चालक और कंडक्टर कहाँ के रहने वाले हैं?
गिरफ्तार चालक कुलदीप और कंडक्टर रामचरण दोनों हरियाणा के रहने वाले हैं।
तस्करों ने शराब छिपाने के लिए क्या तरीका अपनाया था?
शराब को कंटेनर में लोहे की चादरों की आड़ और खाली कैरेटों के नीचे विशेष चैंबर बनाकर छिपाया गया था।
इस मामले में कार्रवाई किसने की?
यह कार्रवाई उत्पाद विभाग की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर की।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·17 दिन पहले

यह घटना दिखाती है कि कैसे तस्कर अंतर-राज्यीय आपूर्ति श्रृंखलाओं और आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके कानून से बचने की कोशिश कर रहे हैं। पंजाब से लेकर बिहार तक हज़ारों किलोमीटर की इस यात्रा में कई सुरक्षा चौकियों को पार करना यह संकेत देता है कि प्रवर्तन तंत्र में अभी भी कुछ खामियां हैं। भविष्य में ऐसी तस्करी रोकने के लिए केवल सीमा जांच काफी नहीं होगी, बल्कि खुफिया तंत्र और डिजिटल निगरानी को अधिक मजबूत करना होगा ताकि स्थानीय सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को समय रहते तोड़ा जा सके।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

यह मामला सिर्फ शराबबंदी की प्रशासनिक चुनौती नहीं, बल्कि अवैध आपूर्ति श्रृंखलाओं के वित्तीय तंत्र और अंतर-राज्यीय तस्करी के बढ़ते नेटवर्क को उजागर करता है। राजस्थान नंबर के वाहन में पंजाब से शराब लाकर बिहार में खपाना यह साबित करता है कि संगठित अपराध अब तकनीकी और लॉजिस्टिक स्तर पर कितने उन्नत हो चुके हैं। इस तरह के वित्तीय और परिवहन सिंडिकेट्स पर लगाम कसने के लिए केवल ज़ब्ती काफी नहीं है, बल्कि इनके फंडिंग और लोकल सिंडिकेट के पूरे आर्थिक ताने-बाने को ध्वस्त करना होगा ताकि बार-बार होने वाली ऐसी गतिविधियों पर वित्तीय मोर्चे पर रोक लग सके।

Arjun Mehta@arjun-mehta·17 दिन पहले

मुजफ्फरपुर में पकड़ी गई यह खेप दर्शाती है कि अंतर-राज्यीय तस्करी के तार पंजाब से हरियाणा और उत्तर प्रदेश होते हुए बिहार तक फैले हैं। पिछले एक दशक में हुई सत्रह लाख गिरफ्तारियों और पांच करोड़ लीटर से अधिक की जब्ती के बावजूद तस्करों का यह जटिल नेटवर्क और लोहे की चादरों व स्कैनर को चकमा देने वाली तकनीक यह साबित करती है कि महकमे को अब ज़मीनी खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करना होगा। स्थानीय सिंडिकेट्स की पहचान कर उनकी वित्तीय जड़ों पर प्रहार करने से ही इस अवैध व्यापार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

बिहार में शराबबंदी के बीच तस्करों द्वारा पंजाब से राजस्थान नंबर के कंटेनर में स्कैनर और चेकिंग को चकमा देने के लिए लोहे की चादरें वेल्डिंग कराना और गुप्त चैंबर बनाना यह दर्शाता है कि यह संगठিত अंतर-राज्यीय गिरोह का काम है। उत्पाद विभाग और पुलिस को अब सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित न रहकर इस सिंडिकेट के उन स्थानीय मास्टरमाइंडों पर शिकंजा कसना होगा जो रात के अंधेरे में डिलीवरी लेने वाले थे। यदि वित्तीय जांच कर इनकी संपत्ति जब्त नहीं की गई, तो यह नेटवर्क नए तरीकों से सक्रिय रहेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·17 दिन पहले

बिहार में शराबबंदी के बीच इस तरह की अंतर-राज्यीय तस्करी यह साबित करती है कि पंजाब से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक सक्रिय अपराधियों का नेटवर्क काफी मजबूत है। जिस प्रकार से इस कंटेनर में स्कैनर को धोखा देने के लिए लोहे की चादरें वेल्ड की गईं और विशेष चैंबर बनाए गए, वह पेशेवर अपराधियों की संलिप्तता को उजागर करता है। जब तक इस सिंडिकेट के वित्तीय और स्थानीय संपर्कों की तह तक जाकर सख्त कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक तस्कर नए तरीकों से कानून को चुनौती देते रहेंगे।

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