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बीस गांवों को जोड़ने वाली मऊ जिले के चिरैयाकोट क्षेत्र की सड़क पर एक दशक से जलजमाव, रोज हो रहे हादसेभारत
8 सित॰ 2026, 1:08 pm (23 दिन पहले)· 2

बीस गांवों को जोड़ने वाली मऊ जिले के चिरैयाकोट क्षेत्र की सड़क पर एक दशक से जलजमाव, रोज हो रहे हादसे

मऊ जिले के चिरैयाकोट में बीस गांवों को जोड़ने वाली सड़क पर करीब 10 साल से जल जमाव बना हुआ है, गड्ढों की वजह से यहां रोज लोग गिरकर घायल हो रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में चिरैयाकोट क्षेत्र की एक सड़क पिछले करीब 10 साल से इस कदर टूटी हुई है कि उस पर चलना अब हर दिन का खतरा बन गया है। यह सड़क करीब 20 गांवों को आपस में जोड़ती है, लेकिन जगह-जगह जमा पानी और गहरे गड्ढों की वजह से लोग रोज गिरकर चोटिल हो रहे हैं। बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक इसकी मरम्मत नहीं हुई है।

जिले का आखिरी गांव, इसलिए नेताओं की नजर नहीं

ग्रामीण मोहम्मद हाशिम बताते हैं कि यह गांव मऊ जिले की मोहम्मदाबाद गोहना विधानसभा का सबसे आखिरी गांव है और यहीं से गाजीपुर और आजमगढ़ जिलों की सीमा शुरू होती है। तीन जिलों को जोड़ने वाली यह सड़क करीब 20 गांवों के लोगों के आने-जाने का मुख्य जरिया है, लेकिन हालत यह है कि हर दिन कोई न कोई इस सड़क पर गिरकर घायल हो जाता है। जिले के आखिरी छोर पर बसा होने की वजह से इस गांव में आमतौर पर कोई नेता या जनप्रतिनिधि झांकने तक नहीं आता।

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हाशिम के मुताबिक चुनाव के वक्त तस्वीर बदल जाती है। हर पार्टी के बड़े नेता गांव पहुंचते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं और वोट लेकर लौट जाते हैं, लेकिन इसके बाद गांव के विकास की सुध कोई नहीं लेता। यही वजह है कि साल दर साल सड़क टूटी ही रह जाती है। सिर्फ 2 किलोमीटर का यह रास्ता तय करने में ग्रामीणों को 2 घंटे से ज्यादा वक्त लगता है, और बरसात के मौसम में यही टूटी-फूटी सड़क पानी से लबालब भरकर और खतरनाक हो जाती है।

ऊंचा बना नाला और सड़क पर भरता पानी

सेराज शाह के अनुसार गांव की सबसे बड़ी दिक्कत सड़क और नाले को लेकर है। नाले का पानी सीधे सड़क पर बहता है, जिससे वहां हमेशा जल जमाव बना रहता है। उनका कहना है कि सिर्फ बारिश का पानी ही इस जल जमाव की वजह नहीं है, बल्कि नाला भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। नाला तो बनवाया गया, लेकिन इतनी ऊंचाई पर बनाया गया कि बरसात का पानी उसमें से निकल ही नहीं पाता और नतीजतन वह पानी सड़क पर ही जमा रह जाता है।

इसी लगातार जल जमाव के चलते सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिनके बीच से होकर ही अब ग्रामीणों को गुजरना पड़ता है। शाह कहते हैं कि इस सड़क पर हर दिन कोई न कोई हादसा हो रहा है, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे। उनका कहना है कि गांव के लिए यह सड़क अब सिरदर्द बन चुकी है और अगर इसकी मरम्मत हो जाए और जल जमाव की समस्या खत्म हो जाए, तो गांव की सबसे बड़ी परेशानी अपने आप दूर हो जाएगी।

नाला पूरी तरह जाम, सफाई कर्मी भी नहीं आते

इकबाल सुलेमानी बताते हैं कि गांव की असली समस्या नाले और सड़क को लेकर ही है। सड़क पर पानी भरने की मुख्य वजह यह है कि नाला पूरी तरह जाम हो चुका है। उनके मुताबिक गांव में सफाई कर्मी आते ही नहीं, जिसकी वजह से नाले की सफाई कभी हो ही नहीं पाती और उसका गंदा पानी बहकर सड़क पर ही आ जाता है। जैसे ही बारिश होती है, यह समस्या और बढ़ जाती है और पूरी सड़क जल जमाव में तब्दील हो जाती है।

सुलेमानी बताते हैं कि इसी वजह से सड़क पर बने गड्ढों में लोग गिरकर चोटिल हो जाते हैं, क्योंकि पानी भरा होने से यह पता ही नहीं चलता कि कौन सा गड्ढा कितना बड़ा और कितना गहरा है। यही वजह है कि इस सड़क पर हर दिन कोई न कोई दुर्घटना हो रही है।

बीमार पड़ने पर अस्पताल पहुंचना भी मुश्किल

रामलाल श्रीवास्तव और राज गुप्ता का कहना है कि अगर गांव में किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए और उसे जल्दी अस्पताल पहुंचाना हो, तो यह सड़क वहां तक वक्त पर पहुंचने ही नहीं देती। हल्की सी बारिश होते ही सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढे पानी से भर जाते हैं और महज 2 किलोमीटर की दूरी तय करने में भी 2 घंटे से ज्यादा वक्त लग जाता है।

उनके मुताबिक इन गहरे गड्ढों में हर दिन गाड़ियां फिसल जाती हैं और लोग गिरकर घायल होते हैं। दोनों ग्रामीणों की मांग है कि इस सड़क की जल्द से जल्द मरम्मत कराई जाए, ताकि ग्रामीणों की सबसे बड़ी मुसीबत खत्म हो सके। गाजीपुर और मऊ जिलों को जोड़ने वाली यह मुख्य सड़क है, जिस पर करीब 20 गांवों के लोग रोज आते-जाते हैं, लेकिन गड्ढों में तब्दील हो चुकी इस सड़क की वजह से उन्हें हर दिन भारी परेशानी झेलनी पड़ती है।

सवाल-जवाब

यह सड़क कहां स्थित है?
यह सड़क उत्तर प्रदेश के मऊ जिले के चिरैयाकोट क्षेत्र में है और गाजीपुर व आजमगढ़ जिलों की सीमा पर स्थित है।
यह सड़क कितने गांवों को जोड़ती है?
यह सड़क करीब 20 गांवों के लोगों के आने-जाने का मुख्य जरिया है।
सड़क कब से खराब है?
ग्रामीणों के मुताबिक यह सड़क करीब 10 साल से टूटी हुई है।
सड़क पर जल जमाव की मुख्य वजह क्या है?
सड़क किनारे का नाला जरूरत से ज्यादा ऊंचाई पर बना है और पूरी तरह जाम भी है, जिससे बारिश और नाले का पानी सड़क पर ही जमा रहता है।
2 किलोमीटर का सफर तय करने में कितना समय लगता है?
ग्रामीणों के मुताबिक बारिश के बाद इस सड़क पर 2 किलोमीटर की दूरी तय करने में 2 घंटे से ज्यादा समय लग जाता है।
ग्रामीणों की मुख्य मांग क्या है?
ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क की जल्द मरम्मत हो और जल जमाव की समस्या स्थायी रूप से खत्म की जाए।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

यह प्रशासनिक उपेक्षा और जवाबदेही के अभाव का गंभीर मामला है। तीन जिलों की सीमा पर स्थित होने और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के कारण नागरिक बुनियादी अधिकारों से वंचित हैं। यदि इस पर तुरंत कार्रवाई नहीं हुई, तो किसी बड़ी दुर्घटना की स्थिति में मामला मानवाधिकार आयोग या उच्च न्यायालय तक पहुँच सकता है, जिससे स्थानीय प्रशासन पर कानूनी शिकंजा कसना तय है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

यह केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय आपूर्ति श्रृंखला के लिए एक बड़ा अवरोध है। जब तीन जिलों की सीमा से जुड़े बीस गांवों का मुख्य मार्ग एक दशक तक टूटा रहता है, तो कृषि उपज के परिवहन और समय पर आपातकालीन सेवाओं के न मिलने से स्थानीय व्यापार और आजीविका सीधे प्रभावित होती है। प्रशासनिक सुस्ती का यह आर्थिक नुकसान क्षेत्र के विकास को पीछे धकेल रहा है।

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