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बंगाल की खाड़ी में बने डिप्रेशन से 19 अगस्त तक देश भर में 70 KMPH हवाओं और भारी बारिश का अलर्टपश्चिम बंगाल
14 अग॰ 2026, 8:03 am (30 दिन पहले)· 1

बंगाल की खाड़ी में बने डिप्रेशन से 19 अगस्त तक देश भर में 70 KMPH हवाओं और भारी बारिश का अलर्ट

बंगाल की खाड़ी में बने नए मौसम तंत्र के कारण भारत के पूर्वी, मध्य, उत्तर-पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों में 19 अगस्त 2026 तक तेज तूफानी हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश होने की संभावना जताई गई है।

भारत में मानसून एक बार फिर अपनी पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। बंगाल की खाड़ी के तटीय हिस्से के ऊपर एक नया डिप्रेशन बनने से देश के बड़े भूभाग पर मौसम का मिजाज पूरी तरह बदलने वाला है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि इस नए मौसमी तंत्र का प्रभाव अगले सात दिनों तक बना रहेगा। इसके कारण पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश सहित कई राज्यों में भीषण बारिश का सामना करना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त मैदानी और पहाड़ी इलाकों में भी मध्यम से तेज वर्षा का अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों ने तेज वर्षा के चलते जलभराव और यातायात प्रणालियों में बाधा आने की संभावना को देखते हुए नागरिकों को सतर्क रहने की हिदायत दी है।

पूर्वी और मध्य भारत में मूसलाधार बारिश की चेतावनी

मौसम विभाग के विस्तृत पूर्वानुमान के अनुसार 13 अगस्त से 19 अगस्त 2026 के बीच मानसून का यह दौर अत्यंत उग्र रूप ले सकता है। गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड में 13 अगस्त को अलग-अलग स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। इसी तरह छत्तीसगढ़ में 13 और 14 अगस्त को कई स्थानों पर मूसलाधार वर्षा का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 15 अगस्त को छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों में बहुत भारी बारिश और 16 तथा 17 अगस्त को भी भारी बारिश की स्थिति बनी रहेगी।

झारखंड और ओडिशा के कई जिलों में आकाशीय बिजली गिरने और तीव्र थंडरस्क्वॉल की चेतावनी जारी की गई है। इस मौसमी बदलाव के दौरान 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी, जो बढ़कर 70 किलोमीटर प्रति घंटे के झोंकों में बदल सकती हैं। मौसम कार्यालय ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल पर एक्स पर जारी विशेष बुलेटिन के माध्यम से 7 दिनों की चेतावनियों का पूरा विवरण साझा किया है।

मध्य भारत के अन्य राज्यों में भी स्थिति चुनौतीपूर्ण रहने वाली है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 19 अगस्त तक लगातार व्यापक बारिश होने का अनुमान है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 15 से 17 अगस्त के दौरान भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा विदर्भ क्षेत्र में 18 अगस्त तक बारिश का क्रम जारी रहेगा, जहां 14 से 16 अगस्त के मध्य भारी वर्षा हो सकती है। पूरे मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इलाकों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर विशेष एहतियात बरतने की सलाह दी गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत और दिल्ली-NCR में मौसम का हाल

उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी और मैदानी राज्यों में भी मानसून की गतिविधियां काफी तेज रहने वाली हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख में 19 अगस्त तक व्यापक वर्षा की संभावना जताई गई है। पहाड़ी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में 14 अगस्त के साथ-साथ 17 और 18 अगस्त को बहुत भारी वर्षा होने का जोखिम है। उत्तराखंड में 14 अगस्त और 16 से 17 अगस्त के दौरान इसी तरह की बहुत भारी बारिश की स्थिति बन सकती है।

मैदानी इलाकों में पंजाब के भीतर 14 और 15 अगस्त को व्यापक बारिश का अलर्ट है। हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 14-15 अगस्त तथा 17 अगस्त को तेज बारिश होने का अनुमान है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली-NCR में 14 से 19 अगस्त के बीच अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 से 16 अगस्त और पूर्वी उत्तर प्रदेश में 14 से 18 अगस्त के बीच भारी वर्षा का दौर जारी रहने का अनुमान व्यक्त किया गया है।

पूर्वोत्तर और पश्चिमी राज्यों में वर्षा का पूर्वानुमान

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में भी मानसून की सक्रियता अगले पूरे सप्ताह तक देखने को मिलेगी। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 19 अगस्त तक व्यापक स्तर पर वर्षा दर्ज होगी। अरुणाचल प्रदेश में 15 से 17 अगस्त के दौरान अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है, जबकि असम और मेघालय में पूरे सप्ताह के दौरान भारी वर्षा का दौर बना रहेगा।

पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा के तटीय इलाकों में 19 अगस्त तक लगातार व्यापक बारिश जारी रहने का अनुमान है। मध्य महाराष्ट्र के क्षेत्रों में 15 अगस्त तक भारी वर्षा और 16 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश दर्ज की जा सकती है। गुजरात के इलाकों में 14 अगस्त को मध्यम से भारी बारिश होने का पूर्वानुमान लगाया गया है।

दक्षिण भारत के राज्यों में तूफानी हवाएं और बारिश

दक्षिणी प्रायद्वीप में तटीय कर्नाटक के जिलों में 19 अगस्त तक व्यापक बारिश जारी रहेगी। केरल और माहे क्षेत्र में 17 अगस्त तक और लक्षद्वीप में भी इसी अवधि के दौरान वर्षा की संभावना जताई गई है। केरल और तमिलनाडु के अलग-अलग स्थानों पर 14 अगस्त को भारी वर्षा हो सकती है।

तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु के कई हिस्सों में गरज के साथ तेज आंधी चलने और बिजली कड़कने का अलर्ट जारी किया गया है। तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा के क्षेत्रों में 17 अगस्त तक, तेलंगाना में 16 अगस्त तक और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में 14 अगस्त को तूफानी हवाएं चलने का अंदेशा जताया गया है।

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सवाल-जवाब

मौसम में इस अचानक बदलाव की मुख्य वजह क्या है?
बंगाल की खाड़ी के तटीय हिस्से पर एक नया डिप्रेशन (कम दबाव का क्षेत्र) बना है, जिसके कारण मानसून प्रणाली अत्यधिक मजबूत हो गई है।
यह भारी बारिश की चेतावनी किस तारीख तक लागू रहेगी?
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 19 अगस्त 2026 तक देश के विभिन्न हिस्सों में व्यापक बारिश की चेतावनी जारी की है।
थंडरस्क्वॉल के दौरान हवा की रफ्तार कितनी रह सकती है?
थंडरस्क्वॉल के दौरान हवा की गति 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे रहने और झोंकों में 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।
किन राज्यों में अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है?
गांगेय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड में 13 अगस्त और छत्तीसगढ़ में 13 तथा 14 अगस्त को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट है।
दिल्ली-NCR और उत्तर भारत में मौसम कैसा रहेगा?
दिल्ली-NCR, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में 14 से 19 अगस्त के बीच व्यापक से भारी बारिश की संभावना है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Neha Verma@neha-verma·29 दिन पहले

यह मौसमी बदलाव लाइफस्टाइल और फैशन इंडस्ट्री दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। भारी बारिश और 70 किमी/घंटा की रफ्तार वाली हवाओं के कारण आवागमन बाधित होने से न केवल दैनिक दिनचर्या प्रभावित होगी, बल्कि आगामी त्योहारी और वेडिंग सीजन के लिए चल रही आउटडोर फैशन शूट और रैंप तैयारियां भी बुरी तरह डिस्टर्ब हो सकती हैं। ऐसे में लाइफस्टाइल और स्टाइल मेंटेन करने के लिए लोगों को अपनी प्राथमिकताओं में मौसम के अनुकूल बदलाव करने होंगे।

Arjun Mehta@arjun-mehta·29 दिन पहले

यह मौसमी हलचल केवल आपदा प्रबंधन की चुनौती नहीं है, बल्कि केंद्र और राज्यों के बीच प्रभावी नीति समन्वय की एक बड़ी परीक्षा है। अगस्त के मध्य में कृषि और परिवहन का प्रभावित होना ग्रामीण अर्थव्यवस्था और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर गहरा दबाव डालेगा। आपदा से निपटने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को तुरंत धरातल पर सक्रिय करना होगा।

Ravikash Gupta@ravikash·29 दिन पहले

अगस्त के इस दौर में मौसम की यह मार देश के लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन को सीधे तौर पर बाधित कर रही है। पूर्वी और मध्य भारत के प्रमुख औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में भारी बारिश से उत्पादन और माल ढुलाई पर जो असर पड़ेगा, वह आने वाले हफ्तों में कमोडिटी बाजार और मुद्रास्फीति के आंकड़ों को प्रभावित कर सकता है। कृषि आधारित राज्यों में फसल सुरक्षा के लिए त्वरित कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट से महंगाई न बढ़े।

Karan Malhotra@karan-malhotra·29 दिन पहले

यह आपदा प्रबंधन और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक संवेदनशील स्थिति है। मौसम विभाग की इस चेतावनी के बाद, प्रशासन को किसी भी आपात स्थिति या जलभराव से निपटने के लिए आपदा राहत बलों को तुरंत मुस्तैद करना चाहिए, ताकि जनजीवन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

Rohan Verma@rohan-verma·29 दिन पहले

यह केवल तटीय या मैदानी राज्यों तक सीमित संकट नहीं है, बल्कि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार होने वाली मूसलाधार बारिश से भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुँचने की आशंका बढ़ गई है। उत्तराखंड और हिमाचल जैसे संवेदनशील राज्यों में जिला प्रशासनों को सड़क परिवहन बाधित होने की स्थिति में वैकल्पिक मार्ग तैयार रखने और निचले इलाकों में त्वरित निकासी योजना को धरातल पर उतारने की सख्त जरूरत है।

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