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बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अर्नब का संकट, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों पर भारी बारिश की चेतावनीभारत
22 सित॰ 2026, 2:33 pm (36 दिन पहले)· 1

बंगाल की खाड़ी में चक्रवात अर्नब का संकट, ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटों पर भारी बारिश की चेतावनी

बंगाल की खाड़ी में बन रहा निम्न दबाव गहरा डिप्रेशन बनकर भीषण तूफान में बदल सकता है. मौसम वैज्ञानिकों ने ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना समेत कई राज्यों में 27 सितंबर तक मूसलाधार बारिश और बाढ़ की आशंका जताई है.

कम दबाव का मौसमी सिस्टम समुद्र में तेजी से ताकतवर होकर भीषण रूप लेने लगा है. बंगाल की खाड़ी के ऊपर सक्रिय यह मौसमी हलचल आने वाले वक्त में भीषण चक्रवाती तूफान में तब्दील हो सकती है, जिसे अर्नब नाम दिया जाएगा. अगर समुद्र में यह पूरी तरह सक्रिय होकर चक्रवात बनता है, तो यह इस कैलेंडर साल की पहली बड़ी चक्रवाती आपदा साबित हो सकती है. इसके असर से पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में मौसम अचानक बिगड़ चुका है.

समुद्र में सिस्टम की स्थिति और दिशा

भारतीय मौसम विभाग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में मौजूद डिप्रेशन बहुत जल्द एक डीप डिप्रेशन का रूप ले सकता है. यह सिस्टम पश्चिम दिशा की ओर 18 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से आगे बढ़ा है. 22 सितंबर 2026 को सुबह 8:30 बजे दर्ज आंकड़ों के आधार पर यह अक्षांश 17.9 डिग्री उत्तर और देशांतर 86.0 डिग्री पूर्व के निकट केंद्रित था.

स्थानिक दूरी के लिहाज से यह क्षेत्र ओडिशा के गोपालपुर से लगभग 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व में मौजूद है. इसके अतिरिक्त, यह आंध्र प्रदेश के कालिंगपट्टनम से 200 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, ओडिशा के पुरी से 210 किलोमीटर दक्षिण और विशाखापट्टनम से 290 किलोमीटर पूर्व की दूरी पर समुद्र में आगे बढ़ रहा है. निजी मौसम विश्लेषक एजेंसी स्काईमेट ने भी अनुमान व्यक्त किया है कि बुधवार तक यह दबाव और अधिक सघन होकर गहरे दबाव में बदल जाएगा.

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तट से टकराने का समय और प्रभावित क्षेत्र

वैज्ञानिक गणनाओं के मुताबिक, यह मौसमी सिस्टम 23 सितंबर को तटीय रेखा को पार कर सकता है. अगर यह प्रक्रिया चक्रवात का रूप लेती है, तो सबसे व्यापक क्षति उत्तरी आंध्र प्रदेश और दक्षिणी ओडिशा की तटवर्ती पट्टियों में होने का अंदेशा है. इस प्रभाव का फैलाव पश्चिम बंगाल के समुद्री किनारों तक दर्ज किया जा सकता है. सिस्टम के सशक्त होने से ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अत्यधिक मूसलाधार बारिश दर्ज हो सकती है, जबकि समुद्र तटीय इलाकों में लगातार घने बादलों का डेरा रहेगा.

तटीय इलाकों में लैंडफॉल के बाद 27 सितंबर तक का समय काफी नाजुक माना जा रहा है. इस दौरान तेलंगाना, दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश में निरंतर तेज बारिश के कारण जलभराव और सैलाब जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होने की आशंका है.

मध्य और पूर्वी भारत के राज्यों पर असर

खाड़ी के इस विक्षोभ ने पहले ही देश के मैदानी और पठारी इलाकों में मानसूनी सक्रियता बढ़ा दी है. सोमवार से ही महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश के कई अंचलों में वर्षा का दौर आरंभ हो चुका है. मौसम विज्ञानियों ने चेतावनी दी है कि मध्य प्रदेश के पूर्वी भूभाग, पूर्वी उत्तर प्रदेश, विदर्भ, झारखंड, छत्तीसगढ़ और बिहार में भी भारी पानी बरस सकता है. कुछ संवेदनशील मैदानी इलाकों में स्थानीय बाढ़ आने का संकट खड़ा हो गया है.

ओडिशा में व्यापक सतर्कता के निर्देश

ओडिशा के तटीय प्रशासन को पहले से ही अत्यधिक सतर्क रहने के निर्देश जारी किए गए हैं. भुवनेश्वर स्थित मौसम विज्ञान केंद्र ने 18 सितंबर को ही सूचित कर दिया था कि समुद्र का निम्न दबाव धीरे-धीरे तीव्र होकर दक्षिणी ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश की ओर अग्रसर होगा. 22 सितंबर से ही दक्षिणी ओडिशा के जिलों में वर्षा का जोर बढ़ने लगा है, और 25 सितंबर तक राज्य के कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश का अलर्ट प्रभावी रहेगा.

सवाल-जवाब

बंगाल की खाड़ी में बन रहे इस संभावित तूफान का क्या नाम है?
इस संभावित चक्रवाती तूफान का नाम अर्नब रखा गया है, जो इस साल का पहला चक्रवात हो सकता है.
यह मौसमी सिस्टम वर्तमान में कहां स्थित है?
यह 22 सितंबर 2026 की सुबह गोपालपुर से 200 किमी दक्षिण-पूर्व और कालिंगपट्टनम से 200 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व में अक्षांश 17.9° उत्तर और देशांतर 86.0° पूर्व पर था.
इसके तट से टकराने की संभावना कब जताई गई है?
मौसम विज्ञानियों का अनुमान है कि यह मौसमी सिस्टम 23 सितंबर को तटीय क्षेत्र से टकरा सकता है.
इस तूफान से किन राज्यों में सबसे ज्यादा बारिश होने का अंदेशा है?
इसका मुख्य प्रभाव उत्तरी आंध्र प्रदेश, दक्षिणी ओडिशा और तेलंगाना पर पड़ेगा, जबकि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार में भी भारी बारिश हो सकती है.
खराब मौसम का यह सिलसिला कब तक जारी रह सकता है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 27 सितंबर तक कई राज्यों में भारी बारिश और बाढ़ जैसे हालात बने रहने की आशंका है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Amit Patel@amit-patel·35 दिन पहले

तटीय इलाकों में सप्लाई चेन और कारोबार पर असर दिखना तय है, भगवान करे ज्यादा नुकसान न हो।

Ravikash Gupta@ravikash·36 दिन पहले

उड़ीसा और आंध्र के तटों पर तो पहले से ही तैयारी शुरू हो गई होगी, लेकिन क्या इस तूफान से अंदरूनी इलाकों के बाजारों और फसलों को ज्यादा नुकसान का खतरा है?

Arjun Mehta@arjun-mehta·36 दिन पहले

रविकेश जी, सही कहा आपने। पिछली बार जब ऐसा तूफान आया था, तब मेरे एक रिश्तेदार की पूरी धान की फसल बर्बाद हो गई थी, अंदर के बाजारों में भी बहुत बुरा हाल हुआ था।

Karan Malhotra@karan-malhotra·36 दिन पहले

उड़िसा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों के लिए अगले कुछ दिन वाकई भारी रहने वाले हैं। मौसम विभाग के मुताबिक लैंडफॉल के बाद भी 27 सितंबर तक खतरा टलेगा नहीं। प्रशासन ने सुरक्षा के क्या पुख्ता इंतजाम किए हैं, यह देखना होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·36 दिन पहले

करण भाई, प्रशासन की तैयारी तो अपनी जगह है, पर मुझे लगता है कि ओडिशा और आंध्र के अलावा पूर्वी यूपी तक इसका ज्यादा असर नहीं दिखेगा, बस थोड़ी बहुत हवा चल सकती है।

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