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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्नैक्स खाने पर ट्रोल हुए MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल, मेजर जनरल राजू चौहान ने आलोचकों को सिखाया सबकभारत
14 सित॰ 2026, 5:20 pm (17 दिन पहले)· 1

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में स्नैक्स खाने पर ट्रोल हुए MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल, मेजर जनरल राजू चौहान ने आलोचकों को सिखाया सबक

नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स 2026 सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल को सोशल मीडिया पर स्नैक्स खाने के लिए ट्रोल किया गया, जिसके बाद सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों ने ट्रोल्स की क्लास लगाई।

नई दिल्ली में भारत की मेजबानी में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की शानदार कूटनीतिक सफलताओं की चारों ओर चर्चा हो रही है। इस महत्वपूर्ण सम्मेलन में वैश्विक नेताओं के बीच कई अहम समझौते हुए और बेहद गंभीर अंतरराष्ट्रीय मसलों पर बातचीत की गई। लेकिन इस बड़ी कूटनीतिक कामयाबी के बीच सोशल मीडिया पर एक बिल्कुल ही निरर्थक और अजीबोगरीब विवाद खड़ा हो गया। इंटरनेट पर कुछ लोगों ने गंभीर कूटनीतिक विमर्श पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय, सम्मेलन के दौरान अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे वरिष्ठ अधिकारियों के खान-पान को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इस बेवजह की ट्रोलिंग के केंद्र में आए विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल, जिनका एक आधिकारिक सत्र के दौरान स्नैक्स खाते हुए वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और एडिटिंग का खेल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा आपत्तिजनक बात यह रही कि इंटरनेट पर वायरल किए गए इस वीडियो के साथ सोची-समझी साजिश के तहत छेड़छाड़ की गई थी। ट्रोल्स ने रणधीर जायसवाल के स्नैक्स खाने की इस बेहद सामान्य सी गतिविधि वाले वीडियो को तीन गुना तेज गति यानी 3X स्पीड पर एडिट करके प्रसारित किया। गति बढ़ाने के कारण वह स्वाभाविक पल स्क्रीन पर देखने में काफी अजीबोगरीब और असामान्य लगने लगा। इस चालाकी भरे संपादन के जरिए वरिष्ठ राजनयिक की छवि को हास्यास्पद बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि, जैसे ही यह भ्रामक वीडियो सामने आया, कई जागरूक और संवेदनशील सोशल मीडिया यूजर्स तुरंत अधिकारी के बचाव में आगे आए। इन लोगों ने ट्रोल्स की इस हरकत को बेहद घटिया बताते हुए उन्हें आईना दिखाया और साफ किया कि राजनयिक बैठकों में मेज पर रखे गए स्नैक्स वहां मौजूद प्रतिनिधियों और अधिकारियों के खाने के लिए ही होते हैं, न कि सजावट के लिए।

कटाक्ष और बचाव की जंग

इस सोशल मीडिया बहस में कई तरह की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। सेना के पूर्व अधिकारी अनिल तलवार ने रणधीर जायसवाल की इस वीडियो क्लिप पर कटाक्ष करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि विदेश मंत्रालय को अपने अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भेजने से पहले भोजन कराना शुरू कर देना चाहिए। उन्होंने मजाकिया लहजे में टिप्पणी की कि ऐसा लग रहा था कि जायसवाल ने एक महत्वपूर्ण ब्रिक्स सत्र को अपने निजी स्नैक ब्रेक में बदल दिया है और असली बातचीत अधिकारी तथा स्नैक्स की कटोरी के बीच हो रही है। इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ट्रोल्स की एक बड़ी भीड़ भी इस उपहास में शामिल हो गई।

हालांकि, इस अनुचित ट्रोलिंग के खिलाफ मेजर जनरल राजू चौहान (वेटरन) ने मोर्चा संभाला और ट्रोल्स की कड़ी क्लास लगा दी। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर रणधीर जायसवाल का बचाव करते हुए लिखा, "मुझे यकीन है कि इवेंट को ठीक से चलाने के लिए उन्होंने कई बार खाना भी नहीं खाया होगा और शायद कई दिनों तक घर भी नहीं गए होंगे।" मेजर जनरल राजू चौहान ने साफ तौर पर कहा कि देश का प्रतिनिधित्व करने वाले एक सम्मानित अधिकारी के भोजन करने जैसी सामान्य बात पर इस तरह की शर्मनाक और ओछी टिप्पणियां करना बेहद निंदनीय है।

राजनयिकों के काम का भारी दबाव

रणधीर जायसवाल उन वरिष्ठतम अधिकारियों में से हैं जो वैश्विक मंचों पर भारत का दृष्टिकोण रखते हैं और देश के डिप्लोमैटिक तथा सुरक्षा तंत्र को संचालित करते हैं। ब्रिक्स जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की मेजबानी और संचालन के पीछे अधिकारियों की महीनों की कड़ी मेहनत होती है। ऐसे आयोजनों के दौरान अधिकारियों को बिना सोए और कई बार बिना भोजन किए लगातार चौबीसों घंटे काम करना पड़ता है। इन परिस्थितियों में यदि कोई अधिकारी काम के बीच ऊर्जा बनाए रखने के लिए कुछ स्नैक्स खा लेता है, तो उसे मुद्दा बनाना जनता की संकीर्ण मानसिकता को दर्शाता है। समझदार लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि राजनयिक भी इंसान हैं और उनके काम के अत्यधिक दबाव को समझा जाना चाहिए।

पहले भी निशाने पर रहे हैं भारतीय राजनयिक

वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों का इस तरह ऑनलाइन हमलों और जांच-पड़ताल का शिकार होना कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले विदेश सचिव विक्रम मिसरी भी इंटरनेट यूजर्स के अनियंत्रित व्यवहार का दंश झेल चुके हैं। विक्रम मिसरी ने भारत के राजनयिक इतिहास में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। मई 2025 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत युद्धविराम की घोषणा की गई थी, तब विक्रम मिसरी सरकार की कूटनीतिक ब्रीफिंग का मुख्य चेहरा थे। उस शांति समझौते की घोषणा के बाद विक्रम मिसरी और उनकी बेटी को सोशल मीडिया पर अत्यधिक नफरत, व्यक्तिगत गाली-गलौज, डॉक्सिंग और अवांछित हमलों का सामना करना पड़ा था।

क्या रोबोट हैं हमारे सरकारी अधिकारी?

इस पूरे प्रकरण ने सोशल मीडिया संस्कृति और सरकारी अधिकारियों के प्रति जनता के नजरिए पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या हम अपने कूटनीतिज्ञों और अधिकारियों से यह उम्मीद करते हैं कि वे कैमरों के सामने हमेशा बिल्कुल स्थिर, बिना किसी मानवीय हाव-भाव के और हर समय रोबोट की तरह तैयार रहें? क्या उनका थोड़ा बहुत थका हुआ दिखना, हंसना या भोजन करना उनकी अयोग्यता का प्रमाण मान लिया जाएगा? समय आ गया है कि सोशल मीडिया की इस जहरीली ट्रोलिंग संस्कृति से हटकर देश के लिए दिन-रात काम करने वाले इन वरिष्ठ अधिकारियों को एक सामान्य इंसान के रूप में देखा जाए और उनके प्रति सम्मानजनक दृष्टिकोण अपनाया जाए।

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सवाल-जवाब

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 में क्या विवाद हुआ?
सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल का स्नैक्स खाते हुए एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया, जिसके बाद ट्रोल्स ने उन्हें निशाना बनाया।
रणधीर जायसवाल के वायरल वीडियो के साथ क्या छेड़छाड़ की गई थी?
ट्रोल्स ने उनके स्नैक्स खाने के वीडियो को तीन गुना तेज गति (3X स्पीड) पर एडिट किया ताकि उनकी स्वाभाविक गतिविधि अजीब और असामान्य दिखे।
मेजर जनरल राजू चौहान ने प्रवक्ता का बचाव कैसे किया?
उन्होंने एक्स पर लिखा कि इस अधिकारी ने इवेंट को ठीक से चलाने के लिए कई बार भोजन भी नहीं किया होगा और शायद कई दिनों से घर भी नहीं गए होंगे, इसलिए उन पर टिप्पणी करना शर्मनाक है।
विदेश सचिव विक्रम मिसरी को कब और क्यों ट्रोल किया गया था?
मई 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बाद विक्रम मिसरी और उनकी बेटी को गंभीर ट्रोलिंग और डॉक्सिंग का सामना करना पड़ा था।
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