पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित प्रसिद्ध एनआरएस मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक ऑन-ड्यूटी नर्स की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने अस्पताल प्रशासन और चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया है। गायनेकोलॉजी और ऑब्सटेट्रिक्स विभाग के हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) में तैनात नर्स रुपाली बर्मन की रात की शिफ्ट के दौरान टॉयलेट के अंदर मौत हो गई। घटनास्थल से एक शक्तिशाली ओपिओइड दवा फेंटानिल की तीन खाली शीशियां बरामद होने और उनके बाएं हाथ पर इंजेक्शन जैसा निशान मिलने के बाद इस पूरे मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट की होमिसाइड टीम और स्वास्थ्य विभाग दोनों ही इस घटना की अलग-अलग कोणों से जांच में जुट गए हैं।
ड्यूटी के दौरान सात मिनट का रहस्य और टॉयलेट में अचेत अवस्था
घटना की पूरी समयरेखा 12 अगस्त की रात से शुरू होती है। रुपाली बर्मन ने रात करीब 8 बजे अपनी नियमित ड्यूटी संभाली थी। वे अस्पताल के संवेदनशील एचडीयू वार्ड में मरीजों की देखभाल कर रही थीं। रात लगभग 10:20 बजे रुपाली कुछ समय के लिए टॉयलेट गईं। जब करीब सात मिनट बीत जाने के बाद भी वे बाहर नहीं आईं, तो उनके सहकर्मियों को चिंता हुई। साथ में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने टॉयलेट का दरवाजा खटखटाया, उनका नाम लेकर आवाजें लगाईं और उनके मोबाइल फोन पर कॉल भी किया, लेकिन अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
लगातार आवाज देने के बाद भी कोई उत्तर न मिलने पर सहकर्मियों ने अनहोनी की आशंका के चलते टॉयलेट का दरवाजा तोड़ दिया। अंदर का दृश्य देखकर हर कोई स्तब्ध रह गया। रुपाली फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ी हुई थीं। तुरंत मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने उनकी जांच की, परंतु तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। महज सात मिनट के भीतर घटी इस घटना ने पूरे अस्पताल परिसर में खलबली मचा दी।
फेंटानिल की तीन शीशियां और शरीर पर मिले शारीरिक लक्षण
घटनास्थल की शुरुआती तलाशी के दौरान पुलिस को टॉयलेट से फेंटानिल दवा की तीन शीशियां बरामद हुईं। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि ये शीशियां एनआरएस अस्पताल के ही आधिकारिक दवा स्टॉक का हिस्सा थीं। बरामद की गई प्रत्येक शीशी की क्षमता दो मिलीलीटर बताई गई है। चिकित्सकीय संभावनाओं के अनुसार, इस बात का अंदेशा जताया जा रहा है कि यह तेज असरदार दवा कोहनी के पास नस के जरिए शरीर में पहुंचाई गई हो सकती है। हालांकि, जांच अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक विस्तृत फॉरेंसिक रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक इसे मौत का अंतिम कारण नहीं माना जा सकता।
मृतक नर्स के शारीरिक परीक्षण में बाएं हाथ पर सुई चुभने जैसा एक स्पष्ट निशान भी मिला है, जिसने फेंटानिल के इस्तेमाल की आशंका को और गहरा कर दिया है। प्रारंभिक पोस्टमार्टम जांच के दौरान शरीर पर कुछ अन्य महत्वपूर्ण लक्षण भी दर्ज किए गए हैं। रुपाली के नाखूनों, जीभ और आंखों के सफेद हिस्से में नीलापन देखा गया है। चिकित्सा विज्ञान में इस प्रकार के नीलेपन को शरीर के अंगों में ऑक्सीजन की भारी कमी यानी हाइपोक्सिया का मुख्य संकेत माना जाता है। पोस्टमार्टम टीम इस बात की गहनता से पड़ताल कर रही है कि क्या शरीर पर किसी अन्य स्थान पर भी ऐसे सुई के निशान मौजूद हैं।
बाहरी सीसीटीवी फुटेज की जांच और अप्राकृतिक मौत का मामला
टॉयलेट के भीतर बीते उन सात मिनटों की कड़ियों को जोड़ने के लिए कोलकाता पुलिस पूरी ताकत लगा रही है। चूंकि टॉयलेट के ठीक बाहर के हिस्से में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं, इसलिए पुलिस ने आसपास के सभी कैमरों की फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। जांच अधिकारी यह विश्लेषण कर रहे हैं कि रुपाली के टॉयलेट में प्रवेश करने से पहले या उस दौरान गलियारे में कौन-कौन मौजूद था। पुलिस इस कोण से भी जांच कर रही है कि क्या कोई व्यक्ति उनके पीछे गया था, क्या किसी ने उन्हें कोई पदार्थ दिया, अथवा यह पूरी तरह से व्यक्तिगत स्तर पर उठाया गया कदम था।
घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान पुलिस को अब तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इसके अतिरिक्त, मृतका के शरीर पर संघर्ष या किसी बाहरी हमले के कोई प्रत्यक्ष चोट के निशान भी नहीं मिले हैं। किसी एक निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय पुलिस ने फिलहाल अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कोलकाता पुलिस के डिटेक्टिव डिपार्टमेंट की होमिसाइड टीम को भी जांच में शामिल किया गया है, ताकि हर सूक्ष्म पहलू का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जा सके।
परिजन की मांग पर दूसरे अस्पताल में पोस्टमार्टम और मंत्री का बयान
इस दुखद घटना के बाद जांच की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए परिवार ने एक अहम कदम उठाया। मूल रूप से पूर्व मेदिनीपुर की रहने वाली रुपाली शादीशुदा थीं और कोलकाता में अपने पति के साथ रहती थीं। घटना की सूचना मिलने के बाद परिजन एनआरएस अस्पताल पहुंचे और उन्होंने पोस्टमार्टम उसी अस्पताल में कराने के बजाय किसी अन्य स्वतंत्र सरकारी अस्पताल में कराने का अनुरोध किया। परिवार की मांग को स्वीकार करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए मेडिकल कॉलेज, कोलकाता स्थानांतरित कर दिया गया।
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री शारदवत मुखर्जी ने मामले की गंभीरता पर वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख की सीधी देखरेख में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। स्वास्थ्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि किसी भी तरह की अटकलों या पूर्वधारणाओं के आधार पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल आधिकारिक वैज्ञानिक जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी।
अस्पताल की सात दिवसीय आंतरिक जांच समिति और पुलिस कार्रवाई
इस मामले में पुलिस की आपराधिक जांच के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग ने भी एनआरएस अस्पताल के प्रशासनिक और सुरक्षा ढांचे की आंतरिक जांच शुरू कर दी है। इसके लिए एक छह-स्तरीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति में फॉरेंसिक मेडिसिन, अस्पताल प्रशासन, नर्सिंग, मनोचिकित्सा, सफाई और सुरक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारियों को शामिल किया गया है। इस आंतरिक जांच कमेटी को सात कार्य दिवसों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सा शिक्षा निदेशक को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। यह समिति विशेष रूप से इस बात की जांच कर रही है कि अस्पताल के सुरक्षित स्टॉक से फेंटानिल जैसी नियंत्रित दवा टॉयलेट तक कैसे पहुंची और ड्यूटी के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किस तरह हो रहा था।
दूसरी ओर, पुलिस ने मृतका का मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसकी कॉल डिटेल तथा संदेशों की जांच की जा रही है। जांच टीम ने रुपाली के पति से संपर्क कर उनका बयान दर्ज किया है। इसके अलावा, 12 अगस्त की रात ड्यूटी पर मौजूद साथी नर्सों, ऑन-कॉन्ट्रैक्ट सुरक्षा कर्मियों और डॉक्टरों से भी पूछताछ की जा रही है। फिलहाल परिजन की ओर से कोई लिखित औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है, लेकिन पुलिस और स्वास्थ्य प्रशासन दोनों ही स्तरों पर जांच की रफ्तार तेज कर दी गई है।





















