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चेतन बघोरिया की बढ़ी मुश्किलें, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग गड़बड़ी मामले में आठ दिन की रिमांड परछत्तीसगढ़
16 सित॰ 2026, 11:13 pm (8 दिन पहले)· 0

चेतन बघोरिया की बढ़ी मुश्किलें, छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग गड़बड़ी मामले में आठ दिन की रिमांड पर

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने चेतन बघोरिया को विशेष अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें आठ दिन की रिमांड पर भेज दिया गया है।

छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी सीजीपीएससी परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई गड़बड़ियों के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच का दायरा लगातार व्यापक होता जा रहा है। इसी क्रम में जांच एजेंसी ने मुख्य आरोपियों में शामिल अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बघोरिया को निर्धारित रिमांड अवधि पूरी होने के बाद रायपुर स्थित विशेष अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उनकी रिमांड अवधि को आठ दिन के लिए और विस्तारित करने का निर्णय लिया है।

कोर्ट में पेशी और रिमांड का विस्तार

इससे पहले न्यायिक आदेश के तहत चेतन बघोरिया छह दिन की हिरासत में थे। शुरुआती पूछताछ का समय पूरा होने पर अन्वेषण एजेंसी ने कुछ नए तथ्यों और महत्वपूर्ण कड़ियों का हवाला देते हुए अदालत से हिरासत अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया था। विशेष न्यायालय ने एजेंसी के तर्कों को स्वीकार करते हुए यह नया आदेश जारी किया है। अब उन्हें आगामी तेरह सितंबर को दोबारा अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा।

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हिरासत के दौरान होगी विस्तृत पूछताछ

इस विस्तारित हिरासत अवधि के दौरान एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया में बरती गई कथित अनियमितताओं और वित्तीय लेन-देन के मामलों को लेकर गहराई से पूछताछ करेगी। इस बात का भी पता लगाया जा रहा है कि इस प्रक्रिया में और कौन-कौन लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए थे। जांच का मुख्य केंद्र इस पूरी गड़बड़ी के जरिए अर्जित की गई अवैध संपत्ति, बेनामी संपत्तियों की पहचान और संदिग्ध बैंक खातों की जांच करना है।

कांग्रेस शासनकाल के दौरान उठा था मामला

यह पूरा विवाद सरकारी नौकरियों में भाई-भतीजावाद और चयन प्रक्रिया में धांधली से जुड़ा हुआ है। उस समय आरोप सामने आए थे कि तत्कालीन आयोग अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने रिश्तेदारों को नौकरियां दिलाई थीं और कई योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों की अनदेखी की गई थी। घटना के वक्त राज्य में कांग्रेस पार्टी की सरकार थी और मुख्यमंत्री के पद पर भूपेश बघेल कार्यरत थे। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई अन्य महत्वपूर्ण तथ्य सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

सवाल-जवाब

चेतन बघोरिया कौन हैं?
चेतन बघोरिया अतिरिक्त कलेक्टर हैं और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के ओएसडी रह चुके हैं।
उन्हें अदालत में कब पेश किया गया?
रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया।
अदालत ने कितने दिनों की रिमांड दी है?
अदालत ने चेतन बघोरिया को आठ दिनों की ईडी रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है।
उनकी अगली पेशी कब होगी?
उन्हें 23 सितंबर को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा।
यह मामला किस से जुड़ा है?
यह मामला छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग यानी सीजीपीएससी परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और भाई-भतीजावाद से जुड़ा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sophie Laurent@sophie-laurent·8 दिन पहले

प्रशासनिक अखंडता और योग्यता किसी भी मजबूत लोकतंत्र के बुनियादी स्तंभ हैं। सीजीपीएससी भर्ती अनियमितताओं की यह जांच इस बात को रेखांकित करती है कि भ्रष्टाचार कैसे सार्वजनिक संस्थानों और युवाओं के विश्वास को कमजोर करता है। रिमांड का बढ़ना यह दर्शाता है कि प्रशासनिक मिलीभगत के ऐसे जाल बेहद गहरे होते हैं। केवल कानूनी कार्रवाई ही काफी नहीं है; भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने और जनता का भरोसा बहाल करने के लिए पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सुधारों की तत्काल आवश्यकता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·8 दिन पहले

चेतन बघोरिया की रिमांड बढ़ना इस बात का संकेत है कि वित्तीय जांच एजेंसी सीजीपीएससी घोटाले की जड़ तक पहुँचने के लिए वित्तीय लेन-देन और बेनामी संपत्तियों के सुरागों को खंगाल रही है। चूंकि यह मामला पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान भाई-भतीजावाद और चयन प्रक्रिया में धांधली से जुड़ा है, इसलिए इस राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामले में आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे होने की पूरी संभावना है, जिससे कई अन्य चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·8 दिन पहले

यह मामला सिर्फ प्रशासनिक भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके वित्तीय निहितार्थ बहुत गहरे हैं। प्रवर्तन निदेशालय द्वारा बेनामी संपत्तियों और संदिग्ध बैंक खातों की जांच से यह स्पष्ट होता है कि इस भर्ती घोटाले में बड़े पैमाने पर अवैध धन का सृजन और निवेश हुआ है। आने वाले दिनों में मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से होने वाली सख्त जांच और वित्तीय लेन-देन के खुलासे कॉर्पोरेट और राजनीतिक गलियारों में बड़े भूचाल का कारण बन सकते हैं, क्योंकि अनुचित तरीकों से अर्जित की गई डिजिटल और पारंपरिक संपत्तियों की ट्रेल एजेंसी के लिए मुख्य फोकस होगी।

Karan Malhotra@karan-malhotra·8 दिन पहले

सीजीपीएससी घोटाले में अतिरिक्त कलेक्टर चेतन बघोरिया की आठ दिन की रिमांड बढ़ना यह संकेत देता है कि वित्तीय जांच एजेंसी के हाथ कुछ ठोस डिजिटल साक्ष्य और बेनामी संपत्तियों के सुराग लगे हैं। टामन सिंह सोनवानी के कार्यकाल से जुड़े इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय लेन-देन की कड़ियां जिस तरह से जोड़ी जा रही हैं, उससे आने वाले दिनों में कुछ और बड़े प्रशासनिक अधिकारियों या राजनीतिक रूप से जुड़े लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पूछताछ के दौरान मिलने वाले नए इनपुट इस पूरी साजिश के दायरे को और व्यापक बना सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·8 दिन पहले

करन मल्होत्रा के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह स्पष्ट है कि इस पूरे मामले में जांच का दायरा केवल प्रशासनिक अधिकारियों तक सीमित नहीं रहेगा। जैसे-जैसे वित्तीय लेन-देन और बेनामी संपत्तियों के सुराग सामने आ रहे हैं, केंद्रीय एजेंसी की यह कार्रवाई पूर्ववर्ती कांग्रेस शासनकाल के दौरान प्रशासनिक तंत्र और राजनीतिक गलियारों के बीच की सांठगांठ को पूरी तरह बेनकाब कर सकती है। आगामी तेरह सितंबर को होने वाली अगली पेशी से पहले मिलने वाले नए डिजिटल साक्ष्य इस बहुचर्चित भर्ती घोटाले में कई और नए चेहरों को बेनकाब कर सकते हैं।

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