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छह माह की कड़ी तपस्या से गढ़ी 16 फीट ऊंची देवी प्रतिमा, गाजियाबाद के भक्तों ने चुकाए दो लाखहरियाणा
14 अक्तू॰ 2026, 7:31 pm (23 दिन पहले)· 2

छह माह की कड़ी तपस्या से गढ़ी 16 फीट ऊंची देवी प्रतिमा, गाजियाबाद के भक्तों ने चुकाए दो लाख

हरियाणा के फरीदाबाद में बंगाल से आए एक मूर्तिकार दंपती ने 16 फीट ऊंची भव्य दुर्गा प्रतिमा तैयार की है, जिसकी कीमत करीब दो लाख रुपये है। इस बार कुल 25 प्रतिमाएं गढ़ी गई हैं, जिनकी मांग कई राज्यों में है।

शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा के आगमन के साथ ही मूर्तिकारों की कला अपनी चमक बिखेरने लगी है। हरियाणा के औद्योगिक शहर फरीदाबाद में पश्चिम बंगाल से आकर बसे एक शिल्पकार दंपती की कारीगरी इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। पदमा और उनके पति पिछले तीन दशकों से यहां रहकर देवी-देवताओं की सजीव मिट्टी की मूरतें गढ़ रहे हैं। इस वर्ष उनके हाथों से तैयार की गई लगभग 16 फीट ऊंची एक विशालकाय दुर्गा प्रतिमा विशेष आकर्षण का केंद्र बनी है, जिसे गाजियाबाद की एक संस्था ने दो लाख रुपये के मूल्य पर खरीदा है।

अप्रैल से आरंभ हुआ निर्माण, छह महीने में निखरा रूप

विशाल प्रतिमाओं का निर्माण कोई साधारण काम नहीं होता, बल्कि इसमें महीनों का धैर्य और श्रम लगता है। पदमा के अनुसार, इस 16 फीट ऊंची भव्य संरचना का कार्य अप्रैल के महीने में ही प्रारंभ कर दिया गया था। पूरे छह माह तक लगातार तराशने और संवारने के उपरांत यह प्रतिमा पूरी तरह सज-धजकर तैयार हो पाई है। इस सत्र में कार्यशाला में करीब 25 प्रतिमाओं का निर्माण हुआ है, जबकि सामान्य तौर पर हर साल लगभग 30 प्रतिमाएं गढ़ी जाती हैं। यहां बनने वाली सामान्य मूर्तियों का प्रारंभिक मूल्य 50 हजार रुपये से शुरू होता है और कद-काठी तथा बारीक नक्काशी के आधार पर यह राशि लाखों रुपये तक पहुंच जाती है।

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चार किस्म की मिट्टी और कोलकाता से मंगाया साजो-सामान

प्रतिमाओं को प्राकृतिक मजबूती और सुंदरता देने के लिए विशेष तकनीक अपनाई जाती है। निर्माण प्रक्रिया में कम से कम चार विभिन्न प्रकार की विशिष्ट मिट्टियों का मिश्रण उपयोग में लाया जाता है। मूर्तियों को जीवंत आभा और पारंपरिक रूप-रंग देने के लिए सभी विशेष रंग, आभूषण और साज-सज्जा की सामग्रियां सीधे कोलकाता से मंगाई जाती हैं। शुरुआत में केवल पति-पत्नी ने मिलकर मिट्टी सानने का सफर शुरू किया था, परंतु अब उनके साथ कई अन्य सहायक कारीगर भी जुड़े हुए हैं। इसी हुनर के सहारे न सिर्फ परिवार का भरण-पोषण हो रहा है, बल्कि बच्चों को अच्छी शिक्षा भी मिल सकी है।

विभिन्न प्रांतों तक फैला मूर्तियों का दायरा

पदमा और उनके परिवार का यह शिल्पकर्म केवल दुर्गा पूजा तक ही सीमित नहीं रहता। दुर्गा उत्सव संपन्न होते ही वे मां लक्ष्मी और फिर दीपावली के पावन पर्व हेतु अन्य देवी-देवताओं की प्रतिमाएं बनाने में जुट जाते हैं, जिससे वर्षभर काम का सिलसिला चलता रहता है। उनके हुनर की धाक दिल्ली-एनसीआर के अतिरिक्त राजस्थान, बिहार तथा बंगाल जैसे सुदूर राज्यों से आने वाले कद्रदानों के बीच भी जमी हुई है।

गाजियाबाद की पूजा समिति ने 20वें उत्सव पर सौंपी जिम्मेदारी

गाजियाबाद के इंदिरापुरम क्षेत्र से इस 16 फीट ऊंची प्रतिमा को लेने पहुंचे दिप्तेंद्र बोस ने बताया कि उनकी संस्था इस दफा दुर्गा पूजा का 20वां वार्षिक समारोह आयोजित कर रही है। बोस ने स्पष्ट किया कि उचित लागत और उत्कृष्ट शिल्प कौशल के कारण ही वे वर्षों से फरीदाबाद के इसी कारीगर दंपती से प्रतिमाएं ले जा रहे हैं।

सवाल-जवाब

फरीदाबाद में तैयार की गई विशाल दुर्गा प्रतिमा की ऊंचाई और कीमत कितनी है?
इस प्रतिमा की ऊंचाई करीब 16 फीट है और इसकी कीमत लगभग 2 लाख रुपये है।
प्रतिमा को बनाने में कितना समय लगा और काम कब शुरू हुआ था?
इस प्रतिमा का निर्माण कार्य अप्रैल महीने में शुरू हुआ था और इसे पूरा करने में लगभग छह महीने का समय लगा।
यह 16 फीट ऊंची मूर्ति किस शहर के संगठन ने खरीदी है?
गाजियाबाद के इंदिरापुरम निवासी दिप्तेंद्र बोस के संगठन ने अपने 20वें दुर्गा पूजा उत्सव के लिए यह मूर्ति बनवाई है।
प्रतिमा बनाने के लिए सामग्री कहां से मंगाई जाती है?
मूर्ति निर्माण में कम से कम चार तरह की मिट्टी लगती है, जबकि रंग और सजावट का सामान कोलकाता से मंगाया जाता है।
शिल्पकार दंपती कितने वर्षों से फरीदाबाद में मूर्तियां बना रहे हैं?
पश्चिम बंगाल से आए पदमा और उनके पति पिछले 30 वर्षों से फरीदाबाद में मूर्तियां गढ़ने का कार्य कर रहे हैं।
कार्यशाला में मूर्तियों की सामान्य शुरुआती कीमत क्या रहती है?
मूर्तियों की शुरुआती कीमत 50 हजार रुपये से शुरू होती है और आकार व नक्काशी के हिसाब से लाखों रुपये तक जाती है।
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टिप्पणियाँ 5

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·22 दिन पहले

छह महीने की मेहनत और चार तरह की मिट्टी... वाकई कला की असली कीमत चुकानी पड़ती है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 दिन पहले

छह महीने की मेहनत और दो लाख रुपये ठीक हैं, पर इतनी बड़ी मूर्ति को सुरक्षित ले जाना और संभालना गाजियाबाद वालों के लिए आसान नहीं होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 दिन पहले

रविकेश जी, छह महीने की मेहनत और दो लाख रुपये अपनी जगह, पर इंदिरापुरम तक 16 फीट ऊंची मूर्ति सुरक्षित पहुंचाना सचमुच बड़ा सिरदर्द होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·22 दिन पहले

छह महीने की मेहनत सच में मूर्ति के चेहरे के भावों में साफ दिख रही है। फरीदाबाद के इस कारीगर दंपती की कला का कोई जवाब नहीं, तभी गाजियाबाद वाले हर बार यहीं आते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·22 दिन पहले

रोहन भाई, मेहनत तो दिख रही है, पर छह महीने सिर्फ एक मूर्ति पर लगना थोड़ा ज़्यादा नहीं लग रहा? कारीगरों के पास और भी काम होते हैं।

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