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छत्तीसगढ़ में आधार कार्ड संशोधन हुआ आसान, सेवा सेतु पोर्टल से इतने रुपये में होगा कामछत्तीसगढ़
18 सित॰ 2026, 11:41 am (7 दिन पहले)· 1

छत्तीसगढ़ में आधार कार्ड संशोधन हुआ आसान, सेवा सेतु पोर्टल से इतने रुपये में होगा काम

छत्तीसगढ़ सरकार ने नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए आधार कार्ड में नाम और पता बदलने की प्रक्रिया को सेवा सेतु पोर्टल पर ऑनलाइन कर दिया है। अब इस काम के लिए मात्र 430 रुपये का शुल्क तय किया गया है और सभी आवेदन 29 कार्य दिवसों के भीतर निपटाए जाएंगे।

रायपुर के निवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। छत्तीसगढ़ प्रशासन ने आधार कार्ड दस्तावेजों में नाम, आयु, पता या अन्य किसी भी प्रकार के बदलाव को बेहद सरल बना दिया है। अब आम नागरिकों को अपने व्यक्तिगत विवरण अपडेट कराने के लिए आधार सेवा केंद्रों के चक्कर लगाने या राजपत्र में छपवाने के सिलसिले में राजनंदगांव की यात्रा करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं पड़ेगी।

सेवा सेतु पोर्टल पर ऑनलाइन हुई पूरी प्रक्रिया

राज्य प्रशासन ने पहली बार आधार संशोधन से जुड़ी सम्पूर्ण कार्यप्रणाली को ‘सेवा सेतु’ पोर्टल के माध्यम से डिजिटल और ऑनलाइन कर दिया है। इस नई व्यवस्था के आ जाने से प्रदेश के आम लोग अब अपने घर पर बैठकर ही नाम दुरुस्त कराने और अन्य कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने की सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। पहले इस तरह के कार्यों के लिए लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

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भारी खर्च और दलालों से मिलेगी मुक्ति

पूर्व समय में सरनेम या नाम में बड़े बदलाव के लिए राजपत्र में प्रकाशन करवाना जरूरी था, जिसके कारण नागरिकों को मानसिक तनाव के साथ-साथ आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता था। सरकारी शुल्क के अतिरिक्त लोगों को बिचौलियों और दलालों के चक्कर में पड़कर 10 से 12 हजार रुपये तक खर्च करने पड़ते थे। इस जनसमस्या को जड़ से खत्म करने के वास्ते ही प्रशासन ने फीस और प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और तय कर दिया है।

अब नए नियमों के दायरे में आने वाले आवेदकों को ‘सेवा सेतु’ पोर्टल के जरिए ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर अपना आवेदन ऑनलाइन दर्ज कराना होगा। इसके साथ ही भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के माध्यम से ₹430 का चालान शुल्क भी भरना अनिवार्य किया गया है।

ट्रैकिंग और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया

आवेदन प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होने के बाद हर नागरिक को एक विशिष्ट यूनिक ARN (एप्लीकेशन रेफरेंस नंबर) प्रदान किया जाएगा। इस नंबर की सहायता से आवेदक घर बैठे ही अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकने में सक्षम होंगे। पोर्टल पर अपलोड किए गए दस्तावेजों की शुरुआती जांच सबसे पहले स्थानीय तहसीलदार द्वारा की जाएगी, जिसके बाद फाइल को आगे की पुष्टि के लिए एसडीएम (SDM) के पास भेजा जाएगा।

एसडीएम कार्यालय से हरी झंडी मिलने के बाद दस्तावेज शासकीय मुद्रणालय में राजपत्र प्रकाशन के वास्ते अग्रसारित किए जाएंगे। राजपत्र में सूचना छप जाने के बाद उसकी डिजिटल प्रति भी सीधे पोर्टल से ही आवेदक को ऑनलाइन डाउनलोड करने के लिए मिल जाएगी।

समय-सीमा और जरूरी दस्तावेज

प्रशासन ने इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय कर दी है जिसके निर्देश जारी हो चुके हैं। आधार संशोधन से जुड़े प्रत्येक आवेदन का निपटारा अब हर हाल में 29 कार्य दिवसों के भीतर पूरा किया जाना अनिवार्य है। ऑनलाइन फॉर्म भरते समय नागरिकों को स्थानीय समाचार पत्रों में नाम परिवर्तन की छपी सूचना, दो गवाहों के हस्ताक्षर युक्त दस्तावेज, पचास रुपये के स्टाम्प पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र और अपनी पहचान से जुड़े तमाम जरूरी कागजात पोर्टल पर अपलोड करने होंगे। इस कदम से छत्तीसगढ़ के लाखों नागरिकों का बहुमूल्य समय और पैसा दोनों ही बचने की उम्मीद है।

सवाल-जवाब

आधार संशोधन के लिए नया ऑनलाइन पोर्टल कौन सा है?
छत्तीसगढ़ सरकार ने इसके लिए सेवा सेतु पोर्टल और ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल को अधिकृत किया है।
आधार संशोधन प्रक्रिया के लिए कितना शुल्क तय किया गया है?
इस प्रक्रिया के लिए भारतीय स्टेट बैंक का 430 रुपये का चालान जमा करना होगा।
आवेदन की स्थिति देखने के लिए क्या मिलेगा?
आवेदन पूरा होने पर नागरिकों को एक यूनिक एआरएन नंबर मिलेगा जिससे स्थिति ट्रैक की जा सकेगी।
सभी आवेदनों का निराकरण कितने दिनों में होगा?
शासन के निर्देशानुसार सभी आवेदनों का निपटारा 29 कार्य दिवसों के भीतर किया जाएगा।
ऑनलाइन आवेदन के साथ कौन से मुख्य दस्तावेज जरूरी हैं?
समाचार पत्र में प्रकाशन की सूचना, दो गवाहों के हस्ताक्षर और 50 रुपये के स्टाम्प पर नोटरी शपथ पत्र जरूरी है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Arjun Mehta@arjun-mehta·6 दिन पहले

यह प्रशासनिक सुधार 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' की दिशा में छत्तीसगढ़ सरकार का एक बड़ा नीतिगत कदम है। डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (सेवा सेतु) के माध्यम से बिचौलियों के चंगुल से मुक्ति दिलाना और भ्रष्टाचार पर सीधे प्रहार करना, नागरिकों के 'ईज ऑफ लिविंग' को बढ़ावा देगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पारदर्शी व्यवस्था और 29 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा से जन-शिकायतों में भारी कमी आएगी। शासन व्यवस्था का यह लोक-केंद्रित विकेंद्रीकरण न केवल सरकारी कार्यप्रणाली पर जनता का भरोसा बढ़ाएगा, बल्कि नीतिगत स्तर पर अन्य राज्यों के लिए भी एक अनुकरणीय मॉडल साबित हो सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·6 दिन पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, आर्थिक दृष्टि से यह सुधार बेहद महत्वपूर्ण है। पहले जहां नागरिकों को बिचौलियों के कारण 10,000 से 12,000 रुपये तक गंवाने पड़ते थे, वहीं अब मात्र 430 रुपये का पारदर्शी शुल्क सीधे राज्य के डिजिटल वित्तीय ढांचे को मजबूत करेगा। इस कदम से अनौपचारिक क्षेत्र में होने वाली पूंजी की बर्बादी रुकेगी और आम लोगों की क्रय शक्ति बचेगी। भारतीय स्टेट बैंक के माध्यम से डिजिटल भुगतान और समयबद्ध सेवा वितरण से प्रशासनिक लागत में कमी आएगी। यह मॉडल दिखाता है कि कैसे सार्वजनिक सेवाओं का डिजिटलीकरण करके न केवल भ्रष्टाचार मिटाया जा सकता है, बल्कि नागरिकों के व्यक्तिगत वित्त को सुरक्षित कर आर्थिक न्याय भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·6 दिन पहले

ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में यह पहल नागरिक-केंद्रित शासन का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। राजपत्र में नाम या विवरण संशोधन जैसी जटिल प्रक्रियाओं में बिचौलियों का प्रभाव और अत्यधिक समय-खर्च लंबे समय से आम जनता के लिए बड़ी चुनौती रहा है। ₹430 का पारदर्शी शुल्क और 29 कार्य दिवसों की समयावधि तय करने से न केवल भ्रष्टाचार पर अंकुश लगेगा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही भी तय होगी। हालांकि, इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता स्थानीय तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर आवेदनों के त्वरित सत्यापन पर निर्भर करेगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो अन्य राज्यों को भी अपनी राजस्व और नागरिक सेवाओं के सरलीकरण के लिए इस डिजिटल व्यवस्था को अपनाना चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·6 दिन पहले

रोहन की बात से आगे बढ़ते हुए, कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह कदम बेहद महत्वपूर्ण है। पहचान पत्रों में बदलाव के नाम पर सक्रिय दलालों का नेटवर्क न केवल लोगों से 10-12 हजार रुपये ऐंठता था, बल्कि फर्जी दस्तावेजों का जोखिम भी बना रहता था। डिजिटल राजपत्र और ट्रैकिंग सिस्टम से अब हर आवेदन का एक स्पष्ट ऑडिट ट्रेल तैयार होगा, जिससे पहचान संबंधी धोखाधड़ी पर लगाम लगेगी। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से यह आवश्यक है कि तहसीलदार और एसडीएम स्तर पर भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की गहन जांच में कोई ढिलाई न बरती जाए ताकि इस पारदर्शी व्यवस्था का दुरुपयोग न हो सके।

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