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छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट भू-अर्जन घोटाले की जांच के लिए क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट टीमें गठित, राजस्व विभाग में मचा हड़कंपछत्तीसगढ़
9 सित॰ 2026, 3:10 am (16 दिन पहले)· 3

छत्तीसगढ़ में भारतमाला प्रोजेक्ट भू-अर्जन घोटाले की जांच के लिए क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट टीमें गठित, राजस्व विभाग में मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग में भारतमाला परियोजना के भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुए फर्जीवाड़े की जांच के लिए विशेष अंतर-ज़िला समितियां बनाई गई हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो की एफआईआर के बाद अधिकारियों की साठगांठ खत्म करने के लिए दूसरे ज़िलों की टीमों को फाइलें खंगालने की जिम्मेदारी दी गई है।

छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित बिलासपुर संभाग के भीतर राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित 'भारतमाला परियोजना' के लिए की गई भू-अर्जन प्रक्रिया में व्यापक पैमाने पर घपलेबाज़ी का मामला सामने आया है। सड़क निर्माण हेतु अधिगृहीत की गई जमीनों के बदले वितरित किए गए मुआवजे में भारी वित्तीय गड़बड़ियों और धांधली के गंभीर आरोपों ने समूचे प्रशासनिक व राजनीतिक ढाँचे को झकझोर कर रख दिया है। इन कथित अनियमितताओं की पारदर्शी व निष्पक्ष पड़ताल सुनिश्चित करने के उद्देश्य से शासन ने ज़िला-वार विशेष जाँच समितियों की स्थापना की है।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज

मामले में कड़ा रुख अख्तियार करते हुए रायपुर स्थित राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो (EOW/ACB) ने आधिकारिक तौर पर आपराधिक प्रकरण पंजीकृत कर लिया है। जांच एजेंसी द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(सी) के साथ-साथ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 420 (धोखाधड़ी), धारा 467 (फर्जी दस्तावेज़ तैयार करना), धारा 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से कूटरचना), धारा 471 (फर्जी दस्तावेज़ों को असली के रूप में इस्तेमाल करना) तथा धारा 120बी (आपराधिक षड्यंत्र) के अंतर्गत मामला दर्ज कर वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

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बिलासपुर संभाग के चार प्रमुख जिलों तक फैली जांच की आंच

प्राप्त शिकायतों की सूक्ष्म एवं विस्तृत जाँच का दायरा बिलासपुर संभाग के चार मुख्य ज़िलों तक फैला हुआ है, जिनमें बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ शामिल हैं। ईओडब्ल्यू तथा एसीबी मुख्यालय रायपुर द्वारा 06 अगस्त और 24 अगस्त 2026 को प्रेषित शासकीय पत्रों के आधार पर इन सभी ज़िलों में दर्ज शिकायतों का गहन परीक्षण किया जा रहा है।

स्थानीय प्रभाव समाप्त करने के लिए क्रॉस-जाँच का अनोखा मॉडल

जाँच की संपूर्ण प्रक्रिया को बाहरी दबाव या किसी भी प्रकार के प्रभाव से मुक्त रखने हेतु एक विशेष प्रशासनिक रणनीति तैयार की गई है। यद्यपि गठित टीमों में राजस्व विभाग के अधिकारियों व कर्मचारियों को ही शामिल किया गया है, परंतु मुख्य रणनीति यह है कि कोई भी अधिकारी अपने ही ज़िले के मामलों की पड़ताल नहीं करेगा। नई व्यवस्था के तहत एक ज़िले का राजस्व अमला दूसरे ज़िले में हुए भूमि अर्जन, नामांतरण और मुआवजा राशि वितरण से संबंधित अभिलेखों व फाइलों की गहन छानबीन करेगा।

राजस्व महकमे में हलचल और कड़ी कार्रवाई की संभावना

इस अंतर-ज़िला अदला-बदली व्यवस्था (क्रॉस-जाँच) से स्थानीय अधिकारियों की संभावित साठगांठ या व्यक्तिगत प्रभाव की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इस अप्रत्याशित कदम के लागू होते ही बिलासपुर संभाग के संपूर्ण राजस्व महकमे में हलचल का माहौल है। वर्षों से बंद पड़ी फाइलों और दस्तावेज़ों को दोबारा खोला जाने लगा है, जिससे आने वाले समय में कई रसूखदार अधिकारियों एवं प्रभावशाली व्यक्तियों पर दंडात्मक कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है।

सवाल-जवाब

बिलासपुर संभाग में किस परियोजना के तहत भू-अर्जन घोटाला हुआ है?
यह घोटाला राष्ट्रीय स्तर की सड़क निर्माण परियोजना 'भारतमाला परियोजना' के भूमि अधिग्रहण मुआवजे में हुआ है।
ईओडब्ल्यू/एसीबी रायपुर ने किन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है?
ब्यूरो ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7(सी) और आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471 तथा 120बी के तहत केस दर्ज किया है।
जांच प्रक्रिया में कौन-कौन से चार जिले शामिल हैं?
इस जांच का दायरा बिलासपुर संभाग के चार प्रमुख जिलों बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ तक फैला हुआ है।
जांच को निष्पक्ष रखने के लिए कौन सी नई रणनीति अपनाई गई है?
जांच में 'क्रॉस-जांच' रणनीति अपनाई गई है, जिसके तहत एक जिले के राजस्व अधिकारी दूसरे जिले की फाइलों और मुआवजा वितरण की पड़ताल करेंगे।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच संबंधी पत्र कब भेजे थे?
राज्य आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो ने 06 अगस्त और 24 अगस्त 2026 को जांच के संबंध में पत्र भेजे थे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·16 दिन पहले

भारतमाला जैसी राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजनाओं में ज़मीन अधिग्रहण और मुआवजा वितरण का यह घोटाला गंभीर शासन और प्रशासनिक विफलता को दर्शाता है। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर संभाग में क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट जांच टीमों का गठन एक रणनीतिक कदम है, जो स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और भू-माफ़िया की साठगांठ को तोड़ने में मददगार साबित होगा। ईओडब्ल्यू और एसीबी द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की धाराओं के तहत मामला दर्ज किए जाने से आने वाले दिनों में कई रसूखदारों पर शिकंजा कसना तय है, जिससे पारदर्शी बुनियादी ढांचा विकास की दिशा में एक कड़ा संदेश जाएगा।

Ravikash Gupta@ravikash·16 दिन पहले

भारतमाला जैसी मेगा-इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में ज़मीन अधिग्रहण के दौरान वित्तीय अनियमितताएं और मुआवजा घोटाला देश के राजकोषीय स्वास्थ्य और कॉरपोरेट निवेश के सेंटीमेंट पर सीधा असर डालता है। छत्तीसगढ़ में ईओडब्ल्यू/एसीबी की एफआईआर के बाद क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट जांच मॉडल का उपयोग प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने की दिशा में एक सख्त कदम है। स्थानीय प्रभाव को रोकने के लिए दूसरे ज़िलों के राजस्व अमले को फाइलें सौंपने से न केवल साठगांठ टूटेगी, बल्कि भविष्य में ऐसी बड़ी विकास परियोजनाओं के वित्तीय प्रबंधन में निवेशकों का भरोसा भी मजबूत होगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·16 दिन पहले

भारतमाला परियोजना में भू-अर्जन मुआवजे की यह धांधली सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के सुनियोजित दुरुपयोग का गंभीर मामला है। क्रॉस-डिस्टिक जांच मॉडल लागू होने से स्थानीय स्तर पर फाइलें दबाने वाले रसूखदारों पर शिकंजा कसेगा। इस कार्रवाई का दायरा केवल राजस्व अमले तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि यह देखना अहम होगा कि इस वित्तीय गड़बड़ी में कौन से राजनीतिक और बाहरी हितधारक पर्दे के पीछे सक्रिय थे, क्योंकि ऐसे घोटालों की तह तक जाना ही असल शासन सुधार है।

Rohan Verma@rohan-verma·16 दिन पहले

भारतमाला जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण का यह घोटाला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में गहरी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। ईओडब्ल्यू की एफआईआर और क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट जांच मॉडल यह तय करता है कि स्थानीय स्तर पर साठगांठ कर सबूतों को मिटाया न जा सके। बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ जैसे चार प्रमुख जिलों में राजस्व महकमे की फाइलों की इस अदला-बदली से कई रसूखदार अधिकारियों और प्रभावशाली व्यक्तियों पर शिकंजा कसना तय है, जिससे आने वाले दिनों में प्रशासनिक फेरबदल और बड़ी गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 दिन पहले

इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और आईपीसी की गंभीर धाराओं के तहत ईओडब्ल्यू और एसीबी द्वारा एफआईआर दर्ज किया जाना एक कड़ा कानूनी कदम है। क्रॉस-डिस्ट्रिक्ट जांच मॉडल यह सुनिश्चित करेगा कि बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा और रायगढ़ में फर्जी दस्तावेजों के जरिए हुए मुआवजे के खेल में शामिल कोई भी अधिकारी स्थानीय प्रभाव का फायदा न उठा सके। आने वाले दिनों में इस व्यापक जांच से राजस्व महकमे की कार्यप्रणाली पर बड़ा असर पड़ेगा और कई छिपे हुए चेहरों पर कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

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