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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में राहुल अग्रवाल को बड़ा झटका, बिलासपुर हाईकोर्ट ने होटल वेस्टिन गोवा की कुर्की बरकरार रखीछत्तीसगढ़
4 सित॰ 2026, 1:25 am (21 दिन पहले)· 2

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में राहुल अग्रवाल को बड़ा झटका, बिलासपुर हाईकोर्ट ने होटल वेस्टिन गोवा की कुर्की बरकरार रखी

बिलासपुर हाईकोर्ट ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी द्वारा की गई होटल वेस्टिन गोवा की अंतरिम कुर्की को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर याचिका पर सुनवाई नहीं की जा सकती क्योंकि कानून के तहत इसके लिए पूरी व्यवस्था मौजूद है।

छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में बिलासपुर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी द्वारा गोवा के लग्जरी होटल वेस्टिन गोवा की गई अंतरिम कुर्की के फैसले को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया है। यह फैसला चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच की तरफ से सुनाया गया है।

बेंच ने अपने फैसले में साफ किया कि इस कानूनी चरण पर याचिका पर विचार करना संभव नहीं है। अदालत का कहना है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट यानी PMLA के तहत प्रोविजनल अटैचमेंट के फैसलों से निपटने के लिए पूरी वैधानिक व्यवस्था पहले से ही मौजूद है। इसके अलावा, जांच एजेंसी पहले ही इस मामले में अपनी शिकायत Adjudicating Authority के सामने पेश कर चुकी है, जिसके बाद कानून अपनी तय प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है।

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यह पूरा कानूनी विवाद 28 मई 2026 को ईडी द्वारा जारी किए गए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर से शुरू हुआ था। इस आदेश के दायरे में गोवा का प्रसिद्ध होटल वेस्टिन गोवा आया था, जिसे जांच एजेंसी ने PMLA की धारा 5(1) के अंतर्गत अटैच किया था। जांच के दौरान अधिकारियों ने पाया था कि इस लग्जरी होटल को खरीदने में कुल 110 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया गया था। इसमें से 60 करोड़ रुपए को सीधे तौर पर अपराध की अवैध कमाई यानी प्रोसीड्स ऑफ क्राइम माना गया था, जबकि बाकी के 50 करोड़ रुपए को उस संपत्ति के मूल्य के रूप में आंका गया था।

कारोबारी राहुल अग्रवाल और पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और ईडी की इस कार्रवाई को रद्द करने की मांग उठाई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि इस होटल को खरीदने में लगाए गए 60 करोड़ रुपए पूरी तरह से वैध और साफ-सुथरे हैं। उनका कहना था कि इस संबंध में पहले ही इनकम टैक्स अधिकारियों के सामने विस्तार से स्पष्टीकरण दिया जा चुका है और सभी जरूरी दस्तावेज पेश किए गए हैं।

हालांकि, अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर जोर दिया कि इस समय मुख्य मुद्दा यह तय करना बिल्कुल नहीं है कि जांच एजेंसी भविष्य में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के संबंधों को पुख्ता तौर पर साबित कर पाएगी या नहीं। अदालत के अनुसार असली सवाल यह है कि क्या PMLA की धारा 5(1) के तहत अधिकृत अधिकारी के पास उस समय 'Reason to Believe' यानी विश्वास करने के लिए पर्याप्त और प्रासंगिक सामग्री मौजूद थी या नहीं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई थी।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे प्रशासनिक और कानूनी आधारों की वैधता निश्चित रूप से न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है। इसके बावजूद, रिट क्षेत्राधिकार का इस्तेमाल करते हुए अदालत के लिए किसी तरह का मिनी-ट्रायल करना या यह तय करना जरूरी नहीं है कि उपलब्ध कराई गई सामग्री आखिरकार मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों को पूरी तरह साबित कर देगी या नहीं। इसी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए अदालत ने होटल की कुर्की के खिलाफ आई इस याचिका को खारिज कर दिया है।

सवाल-जवाब

बिलासपुर हाईकोर्ट ने किस याचिका को खारिज किया है?
हाईकोर्ट ने होटल वेस्टिन गोवा की अंतरिम कुर्की को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया है।
यह मामला किस घोटाले से जुड़ा हुआ है?
यह मामला छत्तीसगढ़ शराब घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग प्रकरण से संबंधित है।
होटल वेस्टिन गोवा की कुर्की का आदेश कब जारी हुआ था?
प्रवर्तन निदेशालय ने 28 मई 2026 को यह प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया था।
होटल खरीदने में कुल कितने रुपए का इस्तेमाल हुआ था?
जांच के अनुसार होटल खरीदने में 110 करोड़ रुपए का इस्तेमाल किया गया था।
याचिकाकर्ता कौन थे?
राहुल अग्रवाल और पैसिफिका होटल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड इस मामले में याचिकाकर्ता थे।
कोर्ट ने याचिका खारिज करने का क्या कारण बताया?
कोर्ट ने कहा कि PMLA के तहत वैधानिक व्यवस्था मौजूद है और इस शुरुआती चरण में रिट क्षेत्राधिकार के तहत मिनी-ट्रायल करने की जरूरत नहीं है।
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टिप्पणियाँ 5

Aisha Khan@aisha-khan·21 दिन पहले

छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में राहुल अग्रवाल के होटल वेस्टिन गोवा की कुर्की बरकरार रहने से यह साफ है कि वित्तीय मामलों की जांच में प्रवर्तन निदेशालय की शुरुआती कानूनी कार्रवाई को अदालतों से मजबूत आधार मिल रहा है। इस मामले में 110 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों पर आगे की कानूनी प्रक्रिया एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने तय नियमों के तहत ही आगे बढ़ेगी, जिससे इस उच्च-प्रोफाइल मामले में उद्योग जगत की नजरें अब आगामी न्यायिक और वैधानिक कदमों पर टिकी हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·21 दिन पहले

बिलासपुर हाईकोर्ट के इस फैसले से मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में वित्तीय और कॉर्पोरेट जगत के लिए यह स्पष्ट संदेश गया है कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट की धारा 5(1) के तहत 'रीजन टू बिलीव' के शुरुआती आधारों और वैधानिक प्रक्रियाओं को अदालतें फिलहाल सीधे हस्तक्षेप से बचाए रखेंगी। इस कानूनी स्थिति के बाद अब एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के स्तर पर होने वाली आगे की कार्यवाही और पैसिफिका होटल्स जैसे कॉर्पोरेट प्रतिष्ठानों की वित्तीय साख पर इसके दीर्घकालिक असर का बाजार में गहरा प्रभाव पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·21 दिन पहले

यह फैसला इस बात का बड़ा उदाहरण है कि कैसे अदालतें पीएमएलए के तहत शुरुआती तकनीकी और प्रक्रियात्मक मामलों में सीधा हस्तक्षेप करने से बच रही हैं। जब्ती के आदेश और 'रीजन टू बिलीव' के स्तर पर न्यायिक समीक्षा का दायरा सीमित रखना यह दिखाता है कि इस तरह के बड़े वित्तीय मामलों में वैधानिक संस्थागत प्रक्रिया ही मुख्य आधार बनेगी। इससे यह साफ है कि ऐसे मामलों से जुड़े कारोबारियों को अब कानूनी राहत पाने के लिए लंबी वैधानिक प्रक्रिया और एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के स्तर पर ही अपनी कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़नी होगी।

Rohan Verma@rohan-verma·21 दिन पहले

बिलासपुर हाईकोर्ट का यह निर्णय प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत जांच एजेंसियों की शुरुआती कार्रवाई और न्यायिक समीक्षा के बीच की सीमा को स्पष्ट करता है। अदालत ने साफ किया है कि रिट याचिका के माध्यम से मिनी-ट्रायल नहीं किया जा सकता और वैधानिक प्रावधानों के तहत एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के समक्ष ही मामले की तय प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इस कानूनी स्थिति से राहुल अग्रवाल और अन्य संबंधित पक्षों के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं, क्योंकि अब उन्हें अपनी बेगुनाही साबित करने के लिए तयशुदा कानूनी मंच का ही पूरी तरह से सामना करना होगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·21 दिन पहले

यह फैसला इस बात पर मुहर लगाता है कि PMLA के तहत 'रीज़न टू बिलीव' के आधार पर की गई शुरुआती कुर्की में अदालतें तुरंत दखल नहीं देंगी। राहुल अग्रवाल के मामले में अब असली कानूनी लड़ाई एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के सामने होगी, जहाँ उन्हें यह साबित करना होगा कि होटल खरीदने में इस्तेमाल 60 करोड़ रुपये अपराध की कमाई नहीं बल्कि वैध स्रोतों से थे। यदि वे वहाँ प्रासंगिक सामग्री से अधिकारियों का संतोषजनक समाधान नहीं कर पाए, तो कुर्की को स्थायी करने का रास्ता साफ हो जाएगा, जो अन्य आरोपियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है।

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