धर्म नगरी चित्रकूट स्थित पावन रामघाट पर मंदाकिनी नदी के तट पर शाम ढलते ही गूंजने वाले मंत्रोच्चार, घंटियों की ध्वनि और भव्य आरती का आध्यात्मिक वैभव बहुत जल्द दोबारा लौटने जा रहा है। पिछले दिनों मंदाकिनी नदी के अप्रत्याशित जलस्तर और तेज बहाव ने इस पूरे तटवर्ती क्षेत्र की रोजमर्रा की व्यवस्थाओं को अस्त-व्यस्त कर दिया था, जिसके चलते यहां होने वाली भव्य सामूहिक आरती को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। शाम के वक्त हजारों की तादाद में जुटने वाले देशी-विदेशी श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह तट आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है, जहां लोग बनारस के गंगा घाटों की तर्ज पर आयोजित होने वाली भव्य आरती का दर्शन करने पहुंचते थे।
प्रलयंकारी बहाव और जलभराव से हुआ था भारी नुकसान
धर्म नगरी में 29 अगस्त को मंदाकिनी नदी में आई ऐतिहासिक बाढ़ ने रामघाट के बड़े हिस्से को जलमग्न कर दिया था। नदी का पानी तट के पास बने दो मंजिला आश्रमों, व्यावसायिक दुकानों और आवासीय मकानों तक में घुस गया था। पानी का तेज बहाव आरती स्थल पर रखे विशेष पूजा उपकरणों और सामग्रियों को अपने साथ बहा ले गया। इसके साथ ही तट पर स्थापित बड़ा साउंड सिस्टम, विद्युत सज्जा और लाइटिंग का पूरा ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इस अप्रत्याशित तबाही के बाद सुरक्षा और अव्यवस्था के मद्देनजर नियमित भव्य आरती को स्थगित करना पड़ा था और केवल परंपरा को जीवित रखने के लिए शाम के समय एकल आरती की जा रही थी।
पुनर्बहाली का काम तेज, नवरात्रि से भव्य आयोजन का फैसला
प्रशासन और स्थानीय जिलाधिकारी के सक्रिय सहयोग से अब रामघाट पर मलबा हटाने, तट की सफाई करने और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे की मरम्मत का काम तेजी से पूरा किया जा रहा है। आरती प्रबंधन से जुड़े अश्वनी अवस्थी ने स्पष्ट किया कि आरती ट्रस्ट के पदाधिकारियों ने व्यापक विमर्श के बाद आगामी नवरात्रि की द्वितीया तिथि से बनारस की तर्ज पर होने वाली भव्य आरती को विधिवत बहाल करने का फैसला किया है। तट पर नए सिरे से आवश्यक उपकरणों की स्थापना, ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त करने का काम अंतिम चरण में है ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को भक्तिमय और सुव्यवस्थित वातावरण मिल सके।
वर्ष 2003 की आपदा की यादें और बहाली की उम्मीद
आरती प्रबंधन के अनुसार मंदाकिनी नदी में इस प्रकार का विकराल जलभराव वर्ष 2003 में भी देखा गया था। उस समय भी बाढ़ के पानी ने रामघाट के बुनियादी ढांचे को तहस-नहस कर दिया था और आरती की परंपरा प्रभावित हुई थी। अब वर्ष 2026 की इस बड़ी आपदा के बाद घाट पर जनजीवन और पर्यटन को पटरी पर लाने की पुरजोर कोशिशें जारी हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सीढ़ियों की मरम्मत, सुरक्षा घेरे और स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। प्रबंधन को पूरी उम्मीद है कि नवरात्रि के पावन पर्व पर महाआरती की पुनर्स्थापना के साथ ही धर्म नगरी चित्रकूट में श्रद्धालुओं और पर्यटकों की चहल-पहल अपनी पुरानी रंगत में वापस आ जाएगी।
















