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चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी सुरक्षा कवच को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा विपक्षी गठबंधनभारत
2 अक्तू॰ 2026, 3:25 pm (20 मिनट पहले)· 0

चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी सुरक्षा कवच को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा विपक्षी गठबंधन

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों को आधिकारिक फैसलों पर दी गई कानूनी छूट के खिलाफ विपक्षी दल एकजुट होकर शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं.

देश के मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को 2023 के अधिनियम के जरिए प्रदान किए गए विशेष कानूनी संरक्षण को लेकर सियासी हलकों में नई रार छिड़ गई है. विपक्षी दलों का साझा मंच, विपक्षी गठबंधन, इस वैधानिक व्यवस्था को देश की शीर्ष अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर चुका है. कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी दलों और राष्ट्रीय जनता दल समेत कई प्रमुख घटक दल इस मामले में एक संयुक्त याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर करने जा रहे हैं.

कानूनी संरक्षण के तहत क्या हैं प्रावधान

विवाद के केंद्र में 2023 का वह नया कानून है, जिसके अंतर्गत चुनाव आयोग के शीर्ष अधिकारियों को उनके कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों पर व्यापक कानूनी सुरक्षा दी गई है. इस वैधानिक व्यवस्था के तहत किसी भी वर्तमान अथवा पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त के खिलाफ सिविल या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता, बशर्ते संबंधित कार्रवाई उनके आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान की गई हो. कानून यह भी साफ करता है कि यह संरक्षण पूरी तरह आधिकारिक कामकाज तक ही सीमित है, जिसका अर्थ है कि किसी भी निजी आचरण या ड्यूटी के दायरे से बाहर किए गए कृत्यों पर यह कानूनी कवच निष्प्रभावी रहेगा.

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जवाबदेही और निष्पक्षता पर विपक्ष के सवाल

इस कानूनी सुरक्षा को लेकर विपक्षी खेमे ने तीखी आपत्तियां दर्ज कराई हैं. विपक्षी दलों का तर्क है कि इस तरह का विशेषाधिकार संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता, पारदर्शिता और जनता के प्रति उनकी जवाबदेही को कमजोर करता है. विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए शीर्ष पदों पर बैठे पदाधिकारियों की निगरानी और कानूनी उत्तरदायित्व आवश्यक है. एसआईआर जैसे अत्यंत संवेदनशील मसलों में भी इस बात की कानूनी व्याख्या बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है कि कौन सी कार्रवाई आधिकारिक दायित्व के भीतर आती है और किसे दायित्व से बाहर माना जाएगा. इन्हीं विसंगतियों को आधार बनाकर अब सुप्रीम कोर्ट से इस कानून की समीक्षा की मांग की जा रही है.

सवाल-जवाब

विपक्षी दल किस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं?
विपक्षी दल 2023 के कानून के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को मिले कानूनी संरक्षण के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर रहे हैं.
2023 के कानून में चुनाव आयुक्तों के लिए क्या सुरक्षा दी गई है?
इस कानून के तहत वर्तमान या पूर्व चुनाव आयुक्तों पर उनके कार्यकाल के दौरान आधिकारिक कर्तव्यों के तहत किए गए कार्यों पर कोई सिविल या आपराधिक केस नहीं चलाया जा सकता.
क्या चुनाव आयुक्तों को निजी मामलों में भी कानूनी छूट प्राप्त है?
नहीं, यह कानूनी संरक्षण पूरी तरह से केवल आधिकारिक दायित्वों तक सीमित है और निजी कृत्यों या ड्यूटी से बाहर के मामलों पर लागू नहीं होता.
इस संयुक्त याचिका में कौन-कौन से प्रमुख विपक्षी दल शामिल हैं?
इस संयुक्त याचिका में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वामपंथी पार्टियां और राष्ट्रीय जनता दल सहित विपक्षी गठबंधन के कई दल शामिल हैं.
विपक्षी दलों की मुख्य चिंता क्या है?
विपक्ष का मानना है कि इस तरह की कानूनी छूट चुनावी संस्थाओं की निष्पक्षता, स्वायत्तता और जनता के प्रति जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाती है.
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