बेंगलुरु में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 11 अक्टूबर को केंद्र सरकार के कामकाज पर कड़े सवाल खड़े किए। खरगे ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी और वोट चोरी को आसान बनाने के मकसद से चुनाव आयोग जैसी महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता को लगातार चोट पहुंचाई जा रही है। उन्होंने देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था की मौजूदा स्थिति पर गहरी चिंता जताई और बताया कि इस पूरे मामले को लेकर वे और राहुल गांधी 12 अक्टूबर को भारत के प्रधान न्यायाधीश यानी सीजेआई सूर्यकांत से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने वाले हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस महत्वपूर्ण बैठक के लिए औपचारिक तौर पर पत्राचार किया जा चुका है। दोनों नेताओं ने सीजेआई को अलग-अलग पत्र लिखकर 12 अक्टूबर की शाम 4:00 से 5:00 बजे के बीच मिलने का समय मांगा है। खरगे ने कहा, “हम उनके सामने मौजूदा हालात रखेंगे। हम उनसे कोई मांग नहीं कर सकते, केवल हाथ जोड़कर अपनी विनती पेश करेंगे।” उन्होंने कहा कि न्यायपालिका के समक्ष सिर्फ देश के जमीनी हालात और संस्थाओं के भीतर चल रही विसंगतियों को सामने रखा जाएगा ताकि संविधान के मूल सिद्धांतों की रक्षा हो सके।
चुनाव आयोग के भीतर आंतरिक असंतोष और मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर सीधा हमला बोलते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि आयोग के अंदर लोकतांत्रिक माहौल खत्म हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि संस्था में साथी चुनाव आयुक्तों की आवाज को दबाया जा रहा है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष फैसले लेने की आयोग की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
खरगे ने कहा, “सीईसी एक संवैधानिक संस्था है। वे स्वतंत्र हैं। वे स्वतंत्र फ़ैसले ले सकते हैं। लेकिन वह उन्हें स्वतंत्र फैसले नहीं लेने दे रहे हैं।” उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के दो सदस्यों ने खुद सामने आकर व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे और अंदरूनी गड़बड़ियों को लेकर अपनी बात रखी थी, लेकिन उस पर भी किसी तरह का संज्ञान या कार्रवाई नहीं की गई। खरगे के मुताबिक, सत्ताधारी पार्टी को सीधे चुनावी लाभ पहुंचाने के लिए इस प्रतिष्ठित संवैधानिक संस्था की गरिमा के साथ समझौता किया जा रहा है और उसी के जरिए केंद्र और विभिन्न राज्यों में सत्ता हासिल की गई है।
2023 के कानून और कानूनी सुरक्षा के प्रावधानों पर उठाए सवाल
साल 2023 में पारित मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति तथा सेवा शर्तों से जुड़े कानून का जिक्र करते हुए खरगे ने सरकार की नीयत पर बड़ा सवाल खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के जरिए आयोग के शीर्ष अधिकारियों को असाधारण कानूनी सुरक्षा यानी इम्युनिटी दी गई है।
खरगे ने सवाल किया कि जो सुरक्षा या छूट देश के राष्ट्रपति और सीजेआई तक को हासिल नहीं है, वह एक चुनाव आयुक्त को किस आधार पर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कानून के आने के बाद ईवीएम और चुनावी प्रक्रिया में मनमानी की आशंकाएं बढ़ गई हैं क्योंकि अधिकारियों को गलतियों के लिए भी जीवन भर की कानूनी छूट मिल गई है। उन्होंने इसे मतदाताओं के अधिकारों के साथ बड़ा धोखा करार दिया और कहा कि कांग्रेस पार्टी इस व्यवस्था के खिलाफ अपनी राजनीतिक व लोकतांत्रिक लड़ाई जारी रखेगी।
अघोषित आपातकाल का आरोप और राजधानी में कड़े सुरक्षा पहरे की आलोचना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि देश इस समय एक अघोषित आपातकाल जैसी स्थिति से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष की ओर से लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की अनदेखी की जा रही है और चारों तरफ भय का वातावरण बनाया जा रहा है।
राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए खरगे ने कहा कि 10 अक्टूबर को राष्ट्रीय राजधानी में लगभग 32,000 पुलिसकर्मियों का भारी पहरा लगाया गया था। उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी तादाद में सुरक्षा बलों का जमावड़ा दिखाता है कि सरकार जनता और विपक्ष के विरोध से किस कदर डरी हुई है। उल्लेखनीय है कि 10 अक्टूबर को दिल्ली में सीजेपी के विरोध प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के दौरान व्यापक पैमाने पर टकराव देखने को मिला था।
दिल्ली में बड़े पैमाने पर हिरासत और विपक्षी नेताओं का विरोध
जंतर-मंतर पर सीजेपी के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने कड़े कदम उठाए थे। इस दौरान सीजेपी से जुड़े अभिजीत दिपके, आशुतोष रंका और सौरव दास को एक विमान से हिरासत में ले लिया गया था। इसके साथ ही गाजीपुर बॉर्डर पर भारी बैरिकेडिंग की गई थी और दिल्ली मेट्रो के 45 स्टेशनों के गेट बंद कर दिए गए थे।
इन कड़े सुरक्षा प्रतिबंधों के बीच लगभग 1,000 लोगों को हिरासत में लिया गया। हिरासत में लिए गए प्रमुख विपक्षी नेताओं में आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल, सीपीआई(एम) नेता पिनाराई विजयन और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी शामिल थीं। विपक्ष ने इन कदमों को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया, जबकि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से भी इस पूरे घटनाक्रम पर पलटवार किया गया। खरगे ने दोहराया कि विपक्ष ऐसे कदमों से पीछे नहीं हटेगा और निष्पक्ष चुनावी प्रणाली के लिए अपनी आवाज उठाता रहेगा।

















