उत्तर प्रदेश की सियासत में समाजवादी पार्टी और सत्ताधारी गठबंधन के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक निजी कार्यक्रम के सिलसिले में कानपुर पहुंचे और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा प्रहार किया। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राज्य की कानून-व्यवस्था, विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों और हालिया चुनावों को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर विस्तृत जवाब दिया।
सपा शासनकाल की कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनों और महिला सुरक्षा के विषय पर चर्चा करते हुए ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव के हालिया बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें सपा प्रमुख ने कहा था कि उत्तर प्रदेश वालों ने विवाद खड़ा किया है। राजभर ने इस पर पलटवार करते हुए कहा कि मौजूदा सरकार पर उंगली उठाने से पहले सपा प्रमुख को अपने पुराने शासनकाल के रिकॉर्ड की समीक्षा करनी चाहिए।
राजभर ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान सड़कों पर आम नागरिकों के साथ खुलेआम बदसलूकी की घटनाएं होती थीं। उन्होंने कहा कि उस दौर में अपराधी और माफिया बेखौफ होकर हथियारों के साथ घूमा करते थे, जिससे पूरे प्रदेश में जनता के बीच गंभीर भय और असुरक्षा का माहौल बन गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्ष को आज के हालात पर टिप्पणी करने से पहले अपने पुराने कार्यकाल में जनता के सामने पेश आई चुनौतियों का भी जवाब देना होगा।
चुनावी नतीजों और वोट चोरी के आरोपों पर घेराबंदी
विपक्षी दलों की ओर से लगातार लगाए जा रहे वोट चोरी के आरोपों और विरोध-प्रदर्शनों की रणनीति पर भी ओमप्रकाश राजभर ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव लंबे अरसे से सत्ता की कुर्सी से दूर हैं और उन्हें जनता के चुनावी जनादेश को खुले दिल से स्वीकार करना सीखना चाहिए। इस सिलसिले में उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों का हवाला दिया।
राजभर ने याद दिलाया कि 2024 के संसदीय चुनावों में समाजवादी पार्टी के 37 सांसद और कांग्रेस के छह सांसद जीतकर संसद पहुंचे। वहीं दूसरी तरफ 2019 में 303 सीटें जीतने वाली भारतीय जनता पार्टी 2024 में घटकर 240 सीटों पर सिमट गई। उन्होंने तर्क दिया कि जब निष्पक्ष चुनाव प्रणाली के जरिए विभिन्न विपक्षी दलों को इतनी बड़ी संख्या में सीटें हासिल हुई हैं, तो फिर वोट चोरी की बात कहकर सड़कों पर हंगामा करने का कोई तार्किक आधार नहीं बचता। उन्होंने कहा कि चुनावों में पराजय का सामना करने के बाद विपक्ष केवल ध्यान भटकाने के लिए निराधार आरोप उछालने का काम करता है।
जहूराबाद से सीधे मुकाबले की खुली चुनौती
अयोध्या से चुनाव लड़ने के संबंध में अखिलेश यादव को मिली चुनौती के सवाल पर भी ओमप्रकाश राजभर ने बेहद आक्रामक अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने चुनावी मैदान में उतरने से हिचकते हैं, तो उन्हें सबसे पहले गाजीपुर जिले की जहूराबाद विधानसभा सीट पर आकर उनसे सीधा मुकाबला करना चाहिए।
राजभर ने दो टूक शब्दों में कहा कि अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुकाबले की बात सोचने से पहले जहूराबाद सीट पर आकर चुनावी परीक्षा पास करनी चाहिए। राजनीतिक हलकों में राजभर के इस बयान को सीधे तौर पर समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को दी गई जमीनी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।























