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जोधपुर रियासत के विजन से बना सुमेरपुर, कैसे बना पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा कृषि हबभारत
11 अक्तू॰ 2026, 7:09 pm (2 घंटे पहले)· 0

जोधपुर रियासत के विजन से बना सुमेरपुर, कैसे बना पश्चिमी राजस्थान का सबसे बड़ा कृषि हब

पाली जिले का सुमेरपुर कस्बा मारवाड़ क्षेत्र में अनाज और तिलहन कारोबार का प्रमुख केंद्र बन चुका है। 20वीं सदी की शुरुआत में स्थापित इस कस्बे और कृषि मंडी ने किसानों तथा व्यापारियों के लिए मजबूत आधार तैयार किया।

पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में ऐतिहासिक विरासत और शौर्य गाथाओं के साथ व्यापारिक सूझबूझ का भी समृद्ध इतिहास रहा है। पाली जिले के दक्षिण-पश्चिमी छोर पर बसा सुमेरपुर कस्बा आज पूरे मारवाड़ अंचल के आर्थिक तंत्र की धुरी बन चुका है। अनाज और तिलहन के थोक कारोबार के लिए विख्यात महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी इस पूरे क्षेत्र के ग्रामीण और शहरी बाजार को आपस में जोड़ती है। दूरदर्शी सोच के साथ स्थापित यह व्यापारिक केंद्र आज केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों के लिए भी आपूर्ति का मजबूत गलियारा बनकर उभरा है।

जोधपुर रियासत के शासकों का व्यापारिक विजन

सुमेरपुर की नींव 20वीं सदी के आरंभिक दौर में जोधपुर रियासत के 34वें शासक महाराजा सुमेर सिंह (1911–1918 ई.) ने रखी थी। उस दौर में मारवाड़ में रेल नेटवर्क और नए वाणिज्यिक मार्गों का विस्तार तेजी से चल रहा था। रियासत के रणनीतिकारों ने मेवाड़, सिरोही और मारवाड़ की भौगोलिक सीमाओं के मिलन बिंदु पर स्थित इस भूभाग के सामरिक और व्यापारिक महत्व को पहचाना। महाराजा सुमेर सिंह की मंशा सीमावर्ती ग्रामीण अंचल में एक आधुनिक व्यापारिक बस्ती बसाने की थी, जिससे दूरदराज के काश्तकारों को अपनी फसलों की उचित कीमत मिल सके और मारवाड़ तथा मेवाड़ के बीच व्यापारिक आदान-प्रदान सुगम हो सके। उन्हीं के नाम पर इस विकसित कस्बे को सुमेरपुर नाम मिला।

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महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी की स्थापना

महाराजा सुमेर सिंह के निधन के पश्चात जोधपुर रियासत की सत्ता संभालने वाले महाराजा उम्मेद सिंह ने इस व्यापारिक परिकल्पना को आगे बढ़ाते हुए संस्थागत रूप दिया। उन्होंने किसानों की उपज को व्यवस्थित विपणन ढांचा मुहैया कराने के लिए सुमेरपुर में विशाल कृषि मंडी की आधारशिला रखी, जिसका नाम महाराजा उम्मेद सिंह कृषि उपज मंडी रखा गया। इस मंडी ने असंगठित जिंस व्यापार को एक संगठित नीलामी व्यवस्था में बदलकर पूरे पश्चिमी राजस्थान के कृषि परिदृश्य में क्रांतिकारी बदलाव किया।

जवाई बांध और कृषि उत्पादन में ऐतिहासिक उछाल

मारवाड़ क्षेत्र को बार-बार पड़ने वाले भीषण अकाल से स्थायी राहत दिलाने के लिए महाराजा उम्मेद सिंह ने जवाई बांध निर्माण की ऐतिहासिक परियोजना शुरू की थी। जवाई बांध से जब सुमेरपुर और उसके आसपास की कृषि भूमि को सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध हुआ, तो कृषि उत्पादन में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई। नहरों के जाल और बेहतर सिंचाई सुविधाओं ने स्थानीय किसानों को नकदी फसलों की ओर उन्मुख किया। फसलों की भारी आवक ने सुमेरपुर कृषि मंडी के दैनिक कारोबार को अभूतपूर्व विस्तार दिया, जिससे यह मंडी पूरे पश्चिमी राजस्थान की सबसे भरोसेमंद व्यापारिक मंडी बन गई।

फसलों की पहचान और राष्ट्रीय बाजार में मांग

सुमेरपुर मंडी पाली, जालौर, सिरोही और बाड़मेर जिलों के काश्तकारों के साथ-साथ सीमा से सटे गुजरात के किसानों का प्राथमिक बिक्री केंद्र बन चुकी है। यहां आने वाले सुमेरपुरिया गेहूं की पहचान अपनी बेहतरीन दानेदार गुणवत्ता के चलते राष्ट्रीय स्तर पर है। इसके अतिरिक्त सरसों, जीरा, अरंडी और विभिन्न तिलहन फसलों की प्रचुर आवक के कारण देश भर के बड़े कारोबारी इस मंडी से थोक खरीद करते हैं। पारदर्शी बोली और विशाल संग्रहण क्षमता के कारण किसानों को अपनी मेहनत का वाजिब प्रतिफल मिलता है।

सड़क-रेल कनेक्टिविटी और विविध व्यापारिक विस्तार

सुमेरपुर की भौगोलिक स्थिति और आधुनिक कनेक्टिविटी इसके कारोबार को पंख लगाती है। रेलवे लाइन तथा फोरलेन हाईवे से सीधे जुड़े होने के कारण मंडी से माल सीधे गुजरात के समुद्री बंदरगाहों और दक्षिण भारत के प्रमुख उपभोग केंद्रों तक त्वरित गति से पहुंचता है। कृषि जिंसों के अलावा सुमेरपुर शुद्ध देशी घी के प्रामाणिक कारोबार, किराना मर्चेंट और ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स के बहुत बड़े थोक केंद्र के रूप में भी पूरे राजस्थान में पहचान रखता है।

सवाल-जवाब

सुमेरपुर शहर का नामकरण किसके नाम पर हुआ था?
सुमेरपुर का नाम जोधपुर रियासत के 34वें शासक महाराजा सुमेर सिंह (1911–1918 ई.) के नाम पर रखा गया था।
सुमेरपुर में कृषि उपज मंडी की स्थापना किसने की थी?
जोधपुर के तत्कालीन शासक महाराजा उम्मेद सिंह ने किसानों को संगठित बाजार देने के लिए इस मंडी की स्थापना की थी।
सुमेरपुर मंडी किन प्रमुख फसलों के कारोबार के लिए जानी जाती है?
यह मंडी सुमेरपुरिया गेहूं, सरसों, जीरा, अरंडी और विभिन्न तिलहनों के व्यापार के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध है।
जवाई बांध का सुमेरपुर के कृषि व्यापार पर क्या असर पड़ा?
जवाई बांध से सिंचाई की सुविधा मिलने पर क्षेत्र में कृषि उत्पादन में जबरदस्त उछाल आया, जिससे मंडी के व्यापार को नई ऊंचाइयां मिलीं।
कृषि जिंसों के अलावा सुमेरपुर किन अन्य व्यवसायों के लिए प्रसिद्ध है?
सुमेरपुर शुद्ध देशी घी के व्यापार, किराना-मर्चेंट और ऑटोमोबाइल पार्ट्स के बड़े थोक बाजार के रूप में भी प्रसिद्ध है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·19 मिनट पहले

महाराजा सुमेर सिंह ने सौ साल पहले जो व्यापारिक सोच रखी थी, आज उसका इतना बड़ा असर देखकर हैरानी होती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·39 मिनट पहले

जोधपुर रियासत की नीतियां सिर्फ महलों तक सीमित नहीं थीं, पश्चिमी राजस्थान के किसानों की भलाई का ऐसा विजन आज के राजनेताओं में शायद ही दिखता है।

Ravikash Gupta@ravikash·39 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मैं सुमेरपुर गया था, तब एक बुजुर्ग किसान ने खुद जवाई बांध और वहां की मंडियों की ऐसी ही कहानियां सुनाई थीं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

जवाई बांध के पास से गुजरते हुए हमेशा उस पानी की कीमत समझ आती है, वरना मारवाड़ में तो हरियाली देखना भी किसी चमत्कार जैसा लगता था।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करण भाई, सच कहा आपने, जवाई बांध नहीं होता तो आज मारवाड़ की तस्वीर कुछ और ही होती।

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