आगामी पंचायत चुनाव को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बल लगातार सघन तलाशी ले रहे हैं। इसी चौकसी के तहत धौलपुर जिले के सरमथुरा इलाके में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी, जब अंतरराज्यीय मार्ग पर दौड़ रही एक निजी सवारी गाड़ी की तलाशी के दौरान हथियारों की एक बड़ी खेप बरामद की गई। पकड़ा गया व्यक्ति अपने सामान में घातक असलहे छिपाकर दूसरे जिले में डिलीवरी देने के मकसद से ले जा रहा था, लेकिन सुरक्षाकर्मियों की सतर्कता के चलते उसकी योजना धरी की धरी रह गई।
खरैर नदी पुल के पास मिली थी गुप्त सूचना
यह पूरा घटनाक्रम 10 अक्टूबर 2026 की गश्त के दौरान सामने आया। सरमथुरा थाने का गश्ती दल पंचायत चुनाव के मद्देनजर सीमावर्ती रास्तों पर वाहनों की औचक पड़ताल कर रहा था। उसी वक्त खरैर नदी के पास सुरक्षा दल को एक पुख्ता खुफिया इनपुट मिला कि पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के ग्वालियर से चलकर करौली की दिशा में जाने वाली एक बस के भीतर संदिग्ध सामग्री ले जाई जा रही है। इनपुट में यह स्पष्ट किया गया था कि सवारियों के बीच बैठा एक शख्स लाल रंग के बैग में अवैध असलाह लेकर सफर कर रहा है।
अलर्ट मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत हरकत में आते हुए बसंतपुरा मोड़ से ठीक पहले मुख्य सड़क पर बैरिकेडिंग लगाकर सख्त नाकाबंदी कर दी। कुछ ही देर में मध्य प्रदेश के रजिस्ट्रेशन नंबर वाली सवारी बस वहां पहुंची। पुलिस बल ने बस को रुकने का इशारा किया। गाड़ी के थमते ही अंदर बैठा संदिग्ध व्यक्ति लाल बैग थामकर तेजी से नीचे उतरा और मुख्य सड़क छोड़कर बसंतपुरा लिंक मार्ग की तरफ दौड़ पड़ा। मौके पर मौजूद कांस्टेबल धर्मवीर सिंह ने तत्परता दिखाते हुए उसका पीछा किया और कुछ ही दूरी पर उसे दबोच लिया।
तलाशी में मिले पांच घातक हथियार और गोलियां
हिरासत में लिए जाने के बाद जब उस व्यक्ति के लाल बैग की चेन खोली गई, तो भीतर का नजारा देखकर सुरक्षाकर्मी भी चौंक गए। बैग के अंदर से 32 बोर की दो पिस्टल, दो मैगजीन, 315 बोर के दो देशी कट्टे और एक 315 बोर का पौना बरामद किया गया। हथियारों के साथ-साथ बैग में कारतूसों का बड़ा जखीरा भी मौजूद था, जिसमें 32 बोर के 18 जिंदा कारतूस और 315 बोर के 20 जिंदा कारतूस शामिल थे। इस तरह कुल पांच असलहे और 38 कारतूस जब्त किए गए।
बरामद हथियारों की जब प्राथमिक जांच की गई तो उनमें से एक पिस्टल की बॉडी पर मेड इन जापान अंकित मिला। पकड़े गए व्यक्ति से जब इन घातक हथियारों को अपने पास रखने या परिवहन करने से संबंधित कोई वैध कागजात या सरकारी लाइसेंस मांगा गया, तो वह कोई भी दस्तावेज पेश करने में पूरी तरह नाकाम रहा। इसके बाद उसे आर्म्स एक्ट के तहत मौके से गिरफ्तार कर लिया गया।
ग्वालियर से जुड़ा है आरोपी का ठिकाना
पुलिस पड़ताल में आरोपी की पहचान आदित्य सिंह ठाकुर के तौर पर की गई है। वह मूल रूप से मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में पड़ने वाले देवगढ़ थाना क्षेत्र के तिलावली गांव का निवासी है। हालांकि, हाल के दिनों में वह ग्वालियर शहर के भीतर एक किराए का कमरा लेकर रह रहा था और वहीं से अपनी संदिग्ध गतिविधियों को अंजाम दे रहा था।
धौलपुर पुलिस अधीक्षक विकास सांगवान के प्रत्यक्ष मार्गदर्शन में इस पूरी कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया गया। अधिकारियों के अनुसार, स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की घोषणा के बाद से ही सीमा पार से आने वाले संदिग्ध तत्वों पर पैनी नजर रखी जा रही है, ताकि चुनावी माहौल में किसी भी प्रकार की हिंसा या अशांति को समय रहते रोका जा सके।
कमीशन पर हथियार सप्लाई करने का खुलासा
प्रारंभिक पूछताछ के दौरान आदित्य सिंह ठाकुर ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उसने स्वीकार किया कि वह महज 2 से 3 हजार रुपये के मामूली मुनाफे और कमीशन के लालच में ग्वालियर के भीतर हथियारों की सप्लाई का काम करता था। इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियां अब इस पूरे गैरकानूनी नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।
पुलिस अब यह गहन पड़ताल कर रही है कि यह खेप मध्य प्रदेश के किस गिरोह से खरीदी गई थी और राजस्थान में इसे किन असामाजिक तत्वों तक पहुंचाया जाना था। आर्म्स एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस अवैध खरीद-फरोख्त में पर्दे के पीछे और कौन-कौन से चेहरे शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि पंचायत चुनावों के मद्देनजर अवैध हथियारों की तस्करी के खिलाफ यह विशेष धरपकड़ अभियान आगे भी पूरी सख्ती के साथ जारी रहेगा।


















