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चूरू नगर परिषद चुनाव: वार्ड 31 के 2833 मतदाता बुनियादी सुविधाओं और अंडरब्रिज निर्माण के मुद्दे पर मांग रहे जवाबराजस्थान
30 अग॰ 2026, 12:46 pm (26 दिन पहले)· 4

चूरू नगर परिषद चुनाव: वार्ड 31 के 2833 मतदाता बुनियादी सुविधाओं और अंडरब्रिज निर्माण के मुद्दे पर मांग रहे जवाब

चूरू नगर परिषद के वार्ड संख्या 31 में 9 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले जनसमस्याएं गरमा गई हैं। स्थानीय नागरिक टूटी सड़कों, दूषित पानी, सीवरेज की दुर्गंध और लटके अंडरब्रिज के निर्माण को लेकर प्रत्याशियों से जवाब मांग रहे हैं।

राजस्थान के चूरू शहर में स्थानीय निकाय चुनाव की प्रक्रिया के साथ ही सियासी हलचल काफी तेज हो गई है। आगामी 9 सितंबर को होने जा रहे मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे विभिन्न वार्डों में स्थानीय बुनियादी समस्याएं चुनावी बहस का केंद्र बनती जा रही हैं। चूरू नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले वार्ड संख्या 31 में इस बार मतदाताओं का मिजाज काफी मुखर नजर आ रहा है। क्षेत्र के निवासी अपने वार्ड में लंबे समय से लंबित पड़ी जनसमस्याओं, विकास कार्यों की अनदेखी और मूलभूत सुविधाओं के अभाव को लेकर बेहद नाराज हैं। चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों से जनता अब यह पूछने के मूड में है कि सालों से लटके अंडरब्रिज का निर्माण और पीने के साफ पानी की व्यवस्था कब तक पूरी होगी।

राजनीतिक समीकरण और वार्ड के जनसांख्यिकीय आंकड़े

वार्ड 31 चूरू शहर का एक काफी बड़ा और घनी आबादी वाला क्षेत्र माना जाता है। इस वार्ड में कुल 2833 पंजीकृत मतदाता हैं, जिनमें से 1444 पुरुष मतदाता और 1389 महिला मतदाता शामिल हैं। इतने बड़े जनसांख्यिकीय दायरे के बावजूद स्थानीय लोगों की शिकायत है कि उनकी बुनियादी जरूरतों के हिसाब से क्षेत्र का विकास नहीं किया गया। पिछले निकाय चुनावों के रिकॉर्ड को देखें तो चूरू नगर परिषद में कांग्रेस का बोर्ड बना था, जबकि वार्ड संख्या 31 से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी जगदीश प्रसाद मेघवाल जीतकर पार्षद बने थे।

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इस बार चुनावी दंगल में भाजपा की ओर से रामेश्वर लाल नायक और कांग्रेस की ओर से फूलचंद किरोड़िया मुख्य प्रत्याशी के रूप में सामने आए हैं। दोनों ही दलों के प्रमुख उम्मीदवारों के लिए वार्डवासियों को अपनी बातों से संतुष्ट करना और क्षेत्र की विकट समस्याओं के स्थायी समाधान का ठोस भरोसा दिलाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। वार्ड के नागरिकों का कहना है कि जब तक प्रत्याशी उनकी वास्तविक तकलीफों का हल निकालने की समयबद्ध योजना प्रस्तुत नहीं करते, तब तक सिर्फ वादों पर विश्वास करना मुश्किल है।

रेलवे फाटक की समस्या और स्वीकृत अंडरब्रिज की सुस्त रफ्तार

वार्ड संख्या 31 के निवासियों के लिए सबसे बड़ी और चिंताजनक समस्या रेलवे फाटक का लंबे समय तक बंद रहना है। रेलवे लाइन से जुड़े इस मार्ग पर ट्रेन संचालन के दौरान अक्सर फाटक घंटों बंद रहता है, जिससे सड़क के दोनों ओर गाड़ियों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इस स्थिति के कारण रोजाना आने-जाने वाले राहगीरों, नौकरीपेशा लोगों और विद्यार्थियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ती है।

सबसे अधिक गंभीर स्थिति आपातकालीन परिस्थितियों में उत्पन्न होती है, खासकर जब किसी बीमार व्यक्ति या मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना होता है। स्थानीय निवासियों का दावा है कि फाटक बंद होने की वजह से कई बार एंबुलेंस और निजी वाहन समय पर अस्पताल नहीं पहुंच सके। इलाज में हुई देरी के कारण पूर्व में कुछ गंभीर परिस्थितियां बनीं और कई बार युवाओं को अपनी जान तक गंवानी पड़ी। हालांकि, नागरिकों के लगातार विरोध और मांग के बाद इस स्थान पर एक अंडरब्रिज निर्माण की योजना को स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन स्वीकृति मिलने के काफी समय बाद भी धरातल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है, जिससे स्थानीय लोगों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति गहरा असंतोष व्याप्त है।

पेयजल का गहरा संकट: खारा पानी और आपणी योजना से निराशा

वार्ड 31 में पीने के पानी की समस्या भी एक बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा बनी हुई है। क्षेत्र के अधिकतर मोहल्लों में नलों से खारा और अत्यधिक फ्लोराइड युक्त पानी आता है। इस तरह के पानी के निरंतर सेवन से स्थानीय निवासियों में स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं पैदा होने की आशंका बनी रहती है। लोग मजबूरी में यह पानी इस्तेमाल करने को विवश हैं।

क्षेत्रवासियों ने बताया कि मीठे पानी की आपूर्ति के लिए शुरू की गई आपणी योजना का लाभ भी उन्हें सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है। आपणी योजना के तहत मीठे पानी की सप्लाई बेहद अनियमित है और कई-कई दिनों के अंतराल पर सिर्फ कभी-कभार ही पानी उपलब्ध कराया जाता है। लोगों की प्रमुख मांग है कि चुनाव के बाद जो भी पार्षद बने, वह वार्ड में नियमित और स्वच्छ पेयजल की निर्बाध व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि खारे और दूषित पानी से लोगों को मुक्ति मिल सके।

ओम कॉलोनी सीवरेज प्लांट और दुर्गंध से पलायन का दर्द

वार्ड 31 के अंतर्गत आने वाली ओम कॉलोनी में बना सार्वजनिक पार्क भी एक गंभीर विवाद और जनसमस्या का केंद्र बना हुआ है। इस सार्वजनिक पार्क के परिसर में ही एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित कर दिया गया है। प्लांट के संचालन से उठने वाली तीव्र दुर्गंध ने आसपास के रिहायशी इलाके में रहने वाले लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बदबू इतनी ज्यादा फैलती है कि घरों के खिड़की-दरवाजे बंद रखने के बाद भी राहत नहीं मिलती। दुर्गंध और उससे पैदा होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों से परेशान होकर आसपास के कुछ परिवारों को अपना पैतृक मकान छोड़कर दूसरे स्थानों पर किराए पर या नए मकान में शिफ्ट होने के लिए मजबूर होना पड़ा है। वार्डवासी मांग कर रहे हैं कि सीवरेज प्लांट से उत्पन्न होने वाली इस दुर्गंध का कोई स्थायी और तकनीकी समाधान निकाला जाए ताकि पार्क का वातावरण स्वच्छ हो सके और लोग अपने घरों में शांति से रह सकें।

सफाई व्यवस्था, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य नागरिक सुविधाओं का अभाव

नगर परिषद के कामकाज और वार्ड की व्यवस्था को लेकर स्थानीय नागरिकों में काफी गुस्सा है। सफाई व्यवस्था की बात करें तो वार्डवासियों का आरोप है कि कचरा उठाने वाले ऑटो टिपर नियमित रूप से गलियों में नहीं आते, जिसके कारण घरों और सड़कों पर कूड़ा जमा रहता है। इसके अतिरिक्त, वार्ड की नालियों की नियमित सफाई नहीं होती, जिससे जलभराव और गंदगी की समस्या बनी रहती है।

वार्ड में विकास की अन्य कमियों को उजागर करते हुए लोगों ने बताया कि क्षेत्र की अधिकांश मुख्य और आंतरिक सड़कें बुरी तरह टूटी-फूटी अवस्था में हैं। वार्ड में न तो कोई सरकारी स्वास्थ्य केंद्र उपलब्ध है और न ही कोई सामुदायिक भवन बनाया गया है, जहां लोग अपने सामाजिक और पारिवारिक कार्यक्रम आयोजित कर सकें। कई गलियों में स्ट्रीट लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय अंधेरा छाया रहता है। सफाई, सड़क, लाइट, स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक भवन जैसी मौलिक सुविधाओं की कमी ने स्थानीय लोगों के दैनिक जीवन को कठिन बना दिया है।

9 सितंबर के मतदान पर टिकी चुनावी राजनीति की दिशा

चूरू नगर परिषद के वार्ड 31 में 9 सितंबर को होने वाले मतदान के दिन 2833 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। इस बार का चुनाव महज पार्टीगत राजनीति तक सीमित न रहकर सीधे तौर पर स्थानीय मुद्दों, समस्याओं और विकास के दावों पर आधारित दिखाई दे रहा है। भाजपा के रामेश्वर लाल नायक और कांग्रेस के फूलचंद किरोड़िया दोनों ही दावेदार अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नजर आ रहे हैं, लेकिन जनता के मन में छाए असंतोष को दूर करना उनके लिए आसान नहीं होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि 9 सितंबर को मतदाता इन जमीनी समस्याओं को ध्यान में रखकर वोट डालते हैं या फिर राजनीतिक समीकरण बाजी मारते हैं।

सवाल-जवाब

चूरू नगर परिषद के वार्ड 31 में मतदान किस तारीख को होगा?
चूरू नगर परिषद के वार्ड संख्या 31 में स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान 9 सितंबर को आयोजित होगा।
वार्ड 31 में कुल कितने पंजीकृत मतदाता हैं?
वार्ड 31 में कुल 2,833 मतदाता पंजीकृत हैं, जिनमें 1,444 पुरुष और 1,389 महिला मतदाता शामिल हैं।
इस चुनाव में मुख्य राजनीतिक प्रत्याशी कौन-कौन हैं?
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से रामेश्वर लाल नायक और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से फूलचंद किरोड़िया मुख्य उम्मीदवार हैं।
वार्ड 31 में रेलवे फाटक से जुड़ी प्रमुख समस्या क्या है?
रेलवे फाटक लंबे समय तक बंद रहने से यातायात बाधित होता है और आपात स्थिति में मरीज समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाते। अंडरब्रिज स्वीकृत होने के बावजूद निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है।
ओम कॉलोनी के लोग सीवरेज प्लांट का विरोध क्यों कर रहे हैं?
सार्वजनिक पार्क में बने सीवरेज प्लांट से अत्यधिक दुर्गंध फैलती है, जिससे परेशान होकर कुछ परिवारों को अपना घर छोड़कर पलायन करना पड़ा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·25 दिन पहले

चूरू के वार्ड 31 में बुनियादी सुविधाओं और खासकर अंडरब्रिज के निर्माण में देरी का मुद्दा यह साबित करता है कि स्थानीय चुनावों में अब जनता सिर्फ राजनीतिक नारों से संतुष्ट नहीं होने वाली। जब एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के मार्ग में रेलवे फाटक बाधा बनते हैं और लोगों की जान पर बन आती है, तो यह प्रशासनिक और राजनीतिक विफलता का स्पष्ट प्रमाण है। 9 सितंबर के मतदान में यह देखना अहम होगा कि क्या मतदाता इन गंभीर मुद्दों के आधार पर बदलाव लाते हैं या पारंपरिक समीकरण ही हावी रहते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·25 दिन पहले

रोहन वर्मा की रिपोर्ट से यह साफ है कि वार्ड 31 के 2833 मतदाताओं का यह संघर्ष सिर्फ चुनावी मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर जन-सुरक्षा और जीवन के अधिकार से जुड़ा मामला है। जब रेलवे फाटक पर एंबुलेंस फंसने से जान जाने जैसी घटनाएं सामने आती हैं, तो यह स्थानीय प्रशासन और जवाबदेह जनप्रतिनिधियों की बड़ी लापरवाही को उजागर करता है। आगामी 9 सितंबर को होने वाले मतदान में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या जनता बुनियादी विकास के इस एजेंडे पर वोट करती है या चुनाव पुराने राजनीतिक समीकरणों के दायरे में ही सिमटकर रह जाता है।

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