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दक्षिण दिल्ली के आउटर रिंग रोड को जाम मुक्त बनाने का मास्टरप्लान, मोदी मिल से चिराग दिल्ली तक सीधे कनेक्टिविटी की तैयारीदिल्ली
16 सित॰ 2026, 4:09 pm (44 दिन पहले)· 2

दक्षिण दिल्ली के आउटर रिंग रोड को जाम मुक्त बनाने का मास्टरप्लान, मोदी मिल से चिराग दिल्ली तक सीधे कनेक्टिविटी की तैयारी

दिल्ली सरकार आउटर रिंग रोड पर वाहनों की बेरोकटोक आवाजाही के लिए एक एकीकृत एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने की संभावना तलाश रही है। इस योजना के तहत मोदी मिल से चिराग दिल्ली के बीच करीब चार किलोमीटर लंबे मार्ग को पूरी तरह सिग्नल फ्री करने का प्रस्ताव है।

दक्षिण दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर रोजाना सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। इस व्यस्त मार्ग पर लगने वाले भीषण जाम से स्थाई मुक्ति दिलाने के लिए एक व्यापक ट्रैफिक कॉरिडोर बनाने की रूपरेखा तैयार की जा रही है। कालकाजी से चिराग दिल्ली के बीच पीक आवर्स के दौरान मिनटों का सफर तय करने में घंटों लग जाते हैं। इस गंभीर ट्रैफिक समस्या को हल करने के लिए दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार अब छोटे-छोटे टुकड़ों में निर्माण करने के बजाय एक निर्बाध एलिवेटेड मार्ग की संभावना पर गंभीरता से विचार कर रही है।

मौजूदा निर्माण कार्य और वित्तीय बजट

ट्रैफिक के दबाव को कम करने के लिए सरकार ने पहले से जारी परियोजनाओं पर काम तेज कर दिया है। वर्तमान में सिंगल लेन वाले कालकाजी फ्लाईओवर की दूसरी लेन के निर्माण और इसे मोदी मिल फ्लाईओवर से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। इन दोनों महत्वाकांक्षी परियोजनाओं पर कुल 312.94 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर खर्च किया जा रहा है। इसके साथ ही, 435 मीटर लंबे सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर की दूसरी लेन का काम भी जल्द धरातल पर शुरू होने वाला है, जिस पर 58.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

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मोदी मिल से चिराग दिल्ली तक 4 किलोमीटर का एकीकृत प्लान

हालांकि अलग-अलग हिस्सों में बनाए जा रहे इन फ्लाईओवरों से स्थानीय स्तर पर राहत तो मिलेगी, लेकिन पूरे मार्ग का जाम पूरी तरह समाप्त नहीं हो पाएगा। इसी स्थिति को देखते हुए स्थानीय विधायक शिखा राय ने मुख्यमंत्री के समक्ष एक एकीकृत योजना पेश करने का निर्णय लिया है। इस प्रस्ताव की मुख्य मांग यह है कि कालकाजी फ्लाईओवर को सीधे नेहरू प्लेस फ्लाईओवर से जोड़ा जाए और फिर इस संरचना को आगे बढ़ाते हुए सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर तक विस्तार दिया जाए। यदि इस कनेक्टिविटी को मंजूरी मिलती है, तो मोदी मिल से चिराग दिल्ली तक का लगभग चार किलोमीटर का सफर पूरी तरह सिग्नल फ्री और सुगम हो जाएगा।

जमीनी निरीक्षण और पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट

इस बड़े प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं का अध्ययन करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है। विधायक शिखा राय के अनुसार, पीडब्ल्यूडी की आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा खुद ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर स्थिति का जायजा लेंगे। इस संयुक्त निरीक्षण के दौरान ही कॉरिडोर के अंतिम नक्शे और कार्यान्वयन की रणनीति पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।

आउटर रिंग रोड पर जाम के मुख्य कारण और बॉटलनेक

दक्षिणी दिल्ली के आउटर रिंग रोड पर रोजाना लगने वाला जाम अब आम जनता के लिए दैनिक सिरदर्द बन चुका है। भैरव मंदिर के पास दर्शनार्थियों की गाड़ियों का जमावड़ा, तीन पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन पर लगने वाली वाहनों की लंबी कतारें मुख्य सड़क का बड़ा हिस्सा घेर लेती हैं। इसके कारण चार से पांच लेन वाली चौड़ी सड़क सिमटकर महज एक से डेढ़ लेन की रह जाती है। यह बॉटलनेक नेहरू प्लेस और आसपास के इलाकों से आने वाले पूरे ट्रैफिक की गति को थाम देता है। ट्रैफिक विभाग का भी मानना है कि इस स्थाई समस्या को केवल एक सतत एलिवेटेड कॉरिडोर के माध्यम से ही पूरी तरह हल किया जा सकता है।

सवाल-जवाब

प्रस्तावित नए कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी होगी?
मोदी मिल से चिराग दिल्ली तक बनने वाले इस प्रस्तावित एकीकृत एलिवेटेड कॉरिडोर की कुल लंबाई लगभग चार किलोमीटर होगी।
कालकाजी फ्लाईओवर परियोजना पर कुल कितना बजट खर्च किया जा रहा है?
कालकाजी फ्लाईओवर की दूसरी लेन के निर्माण और इसे मोदी मिल फ्लाईओवर से जोड़ने पर 312.94 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर के विस्तार की लागत और लंबाई क्या है?
सावित्री सिनेमा फ्लाईओवर की दूसरी लेन 435 मीटर लंबी होगी और इस प्रोजेक्ट पर 58.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी।
आउटर रिंग रोड पर सबसे बड़ा ट्रैफिक बॉटलनेक किस स्थान पर बनता है?
भैरव मंदिर, तीन पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन के पास वाहनों की कतारों के कारण सड़क 1 से 1.5 लेन जितनी संकरी हो जाती है, जो सबसे बड़ा बॉटलनेक है।
इस कॉरिडोर योजना पर अगला कदम क्या है?
पीडब्ल्यूडी द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पीडब्ल्यूडी मंत्री प्रवेश वर्मा ग्राउंड ज़ीरो पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·43 दिन पहले

भौगोलिक और संरचनात्मक दृष्टिकोण से, किसी भी प्रमुख शहरी मार्ग पर गति की निरंतरता ही समय और ऊर्जा के संतुलन को बनाए रखती है। अलग-अलग टुकड़ों में ढांचागत निर्माण करने के बजाय चार किलोमीटर लंबे एकीकृत एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव गणितीय प्रवाह और वास्तुीय संरेखण के सिद्धांतों के अनुकूल है। यदि मोदी मिल से चिराग दिल्ली के बीच निर्बाध मार्ग तैयार होता है, तो यह न केवल यात्रियों के समय की बचत करेगा बल्कि बॉटलनेक से उत्पन्न होने वाले मानसिक और वातावरणीय दबाव को भी घटाएगा। तकनीकी रिपोर्ट और ग्राउंड निरीक्षण में दिशात्मक समन्वय का ध्यान रखना इसकी दीर्घकालिक उपयोगिता तय करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·43 दिन पहले

टुकड़ों-टुकड़ों में फ्लाईओवर बनाने के बजाय एक एकीकृत एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव शहरी बुनियादी ढांचे और लोक नीति के लिहाज से एक दूरदर्शी कदम है। अलग-अलग फ्लाईओवर अक्सर ट्रैफिक जाम को खत्म करने के बजाय केवल अगले चौराहे तक स्थानांतरित कर देते हैं। इस परियोजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पीडब्ल्यूडी की तकनीकी रिपोर्ट में स्थानीय अड़चनों, जैसे पेट्रोल पंपों की कतारों और मौजूदा निर्माणों, से निपटने का क्या समाधान निकाला जाता है। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से, जमीनी निरीक्षण के बाद लिया जाने वाला फैसला दिल्ली में शहरी नियोजन का मानक तय करेगा।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·43 दिन पहले

अर्जुन की बात को आगे बढ़ाते हुए, किसी भी संरचना की गणितीय और व्यावहारिक सफलता उसकी निरंतरता पर निर्भर करती है। अलग-अलग हिस्सों में बजट बांटने के बजाय 4 किलोमीटर के पूरे गलियारे को एक एकीकृत चक्र में पिरोना वित्तीय और भौतिक दृष्टिकोण से अधिक संतुलित है। यदि प्रवेश और निकास बिंदुओं का सटीक संरेखण नहीं हुआ, तो ₹312.94 करोड़ और ₹58.81 करोड़ की लागत के बावजूद प्रवाह बाधित ही रहेगा। एक समग्र और निर्बाध मार्ग न केवल यात्रियों का समय बचाएगा, बल्कि दैनिक आवागमन से जुड़े मानसिक तनाव को घटाकर समग्र नागरिक जीवन पर दूरगामी प्रभाव डालेगा।

Rohan Verma@rohan-verma·43 दिन पहले

टुकड़ों में फ्लाईओवर बनाने से जाम खत्म नहीं होता बल्कि बॉटलनेक आगे खिसक जाता है। मोदी मिल से चिराग दिल्ली तक एकीकृत एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव तकनीकी रूप से सही दिशा में उठाया गया कदम है। हालाँकि, केवल एलिवेटेड मार्ग बना देने से समस्या पूरी तरह नहीं सुलझेगी; जब तक सीएनजी स्टेशनों, पेट्रोल पंपों और धार्मिक स्थलों के पास अवैध पार्किंग जैसी बुनियादी ज़मीनी बाधाओं को नहीं हटाया जाएगा, तब तक अंतिम मुहाने (एग्जिट पॉइंट्स) पर फिर से भीषण जाम की स्थिति बनी रहेगी। परियोजना की समयबद्ध मंज़ूरी और निर्माण के दौरान यातायात प्रबंधन ही इसकी असली सफलता तय करेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·43 दिन पहले

रोहन की बात बिल्कुल सही है। सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिहाज से देखें तो आउटर रिंग रोड पर लगातार लगने वाला भीषण जाम केवल यात्रा में देरी नहीं करता, बल्कि एम्बुलेंस और पुलिस जैसे आपातकालीन वाहनों के त्वरित आवागमन में भी बड़ी बाधा बनता है। महज एक एकीकृत एलिवेटेड कॉरिडोर बना देने से ज़मीनी स्तर पर कानून और यातायात नियमन की चुनौतियाँ समाप्त नहीं होंगी। जब तक ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन पेट्रोल पंपों तथा धार्मिक स्थलों के आसपास अवैध पार्किंग पर सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं करेंगे, तब तक सुरक्षा संबंधी जोखिम बने रहेंगे। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ-साथ ज़मीनी स्तर पर सख्त यातायात प्रवर्तन ही असली समाधान देगा।

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