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दवा की दुकानों पर सख्त पहरा, मेडिकल स्टोर्स में सीसीटीवी और प्रिस्क्रिप्शन के नए नियमों की तैयारीभारत
17 सित॰ 2026, 11:57 am (7 घंटे पहले)· 0

दवा की दुकानों पर सख्त पहरा, मेडिकल स्टोर्स में सीसीटीवी और प्रिस्क्रिप्शन के नए नियमों की तैयारी

केंद्र सरकार देश भर के मेडिकल स्टोर्स के लिए सख्त नियम लाने जा रही है, जिसके तहत दुकानों में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य होगा और रिकॉर्डिंग तीन महीने तक सुरक्षित रखनी होगी।

देशभर में दवाओं की बिक्री को लेकर नियमों को और अधिक कड़ा करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से एक अहम प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस नई व्यवस्था के लागू होने के बाद आपके आसपास मौजूद मेडिकल स्टोर्स पूरी तरह से सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में आ जाएंगे। सरकार का यह कदम बिना डॉक्टर के पर्चे के बेची जाने वाली दवाओं पर रोक लगाने और स्वास्थ्य सुरक्षा को पुख्ता करने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।

अनिवार्य होगी सीसीटीवी निगरानी और रिकॉर्डिंग

नए प्रस्तावित नियमों के मुताबिक हर फार्मेसी या मेडिकल स्टोर संचालक के लिए अपनी दुकान के भीतर सीसीटीवी कैमरा लगवाना अनिवार्य होगा। इन कैमरों को चौबीस घंटे चालू रखना होगा और इनकी फुटेज या रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित संभालकर रखना आवश्यक होगा। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रावधान से दवा विक्रेताओं की जवाबदेही तय होगी और वे नियमों का पालन करने के लिए बाध्य होंगे।

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प्रिस्क्रिप्शन के बिना नहीं बिकेंगी दवाएं

बिना उचित प्रिस्क्रिप्शन के बेरोकटोक बेची जा रही दवाओं की गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए यह रूपरेखा तैयार की गई है। आए दिन बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं दिए जाने के मामलों को देखते हुए सरकार अब इस मनमानी बिक्री को पूरी तरह समाप्त करना चाहती है। निगरानी बढ़ने से आम जनता को सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से दवाइयां मिल सकेंगी तथा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की आशंका कम हो जाएगी।

सुझावों और आपत्तियों के लिए खुला ड्राफ्ट

फिलहाल यह पूरा प्रस्ताव ड्राफ्ट चरण में है जिसे सार्वजनिक कर दिया गया है। आम नागरिकों, विशेषज्ञों और स्टेकहोल्डर्स से इस नए मसौदे पर अगले तीस दिनों के भीतर आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। इन तीस दिनों की समय सीमा पूरी होने और प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद इस प्रस्ताव को अंतिम रूप देकर कानून का रूप दिया जाएगा।

फर्जी और गलत दवाओं पर लगेगी लगाम

विभिन्न जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था के धरातल पर उतरने से बाजार में नकली, उप-मानक या गलत दवाओं के कारोबार पर भी प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो सकेगा। इसके अलावा दवा वितरण प्रणाली में फार्मासिस्ट की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और पारदर्शिता भी काफी हद तक बढ़ जाएगी। सरकार का मुख्य मकसद यही सुनिश्चित करना है कि दवाइयों की हर एक बिक्री पारदर्शी तरीके से हो और नियमों की अनदेखी करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जा सके।

सवाल-जवाब

केंद्र सरकार मेडिकल स्टोर्स के लिए कौन सा नया नियम ला रही है?
सरकार मेडिकल स्टोर्स में सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य करने जा रही है और रिकॉर्डिंग तीन महीने तक सुरक्षित रखनी होगी।
सीसीटीवी फुटेज कितने दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी?
दवा बिक्री की रिकॉर्डिंग को कम से कम तीन महीने तक सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
इस नए नियम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य बिना उचित प्रिस्क्रिप्शन के दवा बेचने पर अंकुश लगाना और पारदर्शिता बढ़ाना है।
क्या इस प्रस्ताव पर आम जनता से सुझाव मांगे गए हैं?
हाँ, सरकार ने इस ड्राफ्ट पर 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां माँगी हैं।
नियमों के उल्लंघन पर क्या होगा?
सुझाव और आपत्तियों की समीक्षा के बाद नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद इनका पालन न करने पर कार्रवाई होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·5 घंटे पहले

कानूनी और आपराधिक जाँच के दृष्टिकोण से देखा जाए तो मेडिकल स्टोर्स में अनिवार्य सीसीटीवी और रिकॉर्डिंग का नियम नशीली तथा प्रतिबंधित दवाओं की अवैध बिक्री पर अंकुश लगाने में एक अहम हथियार साबित होगा। कानून-व्यवस्था की एजेंसियों को अक्सर अवैध फार्मास्यूटिकल ड्रग्स के मामलों में अदालती कार्रवाई के दौरान पुख्ता डिजिटल साक्ष्य जुटाने में कठिनाई होती थी। तीन महीने का फुटेज बैकअप और पर्चों की सख्त निगरानी से न सिर्फ नशीली दवाओं की अवैध तस्करी की नेटवर्क श्रृंखला टूटेगी, बल्कि अदालतों में भी अभियुक्तों के खिलाफ जांच को मजबूती मिलेगी।

Arjun Mehta@arjun-mehta·5 घंटे पहले

सार्वजनिक नीति और शासन के दृष्टिकोण से देखें तो इस मसौदे का वास्तविक प्रभाव इसके ज़मीनी क्रियान्वयन और राज्य दवा नियंत्रण प्राधिकरणों के बीच समन्वय पर निर्भर करेगा। छोटे दवा विक्रेताओं के लिए अनुपालन की लागत और आम नागरिकों की गोपनीयता की सुरक्षा जैसे पहलुओं पर नीतिगत स्पष्टता आवश्यक होगी। केंद्र द्वारा 30 दिनों के सुझाव विंडो के बाद जब यह नियम अंतिम रूप लेगा, तब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी इसे कितनी पारदर्शिता से लागू करती है। यह कदम लोक स्वास्थ्य नीति में तकनीक आधारित निगरानी का एक नया मॉडल पेश कर सकता है।

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