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राजस्थान में 18 सितंबर को झमाझम बारिश के आसार, मौसम विभाग ने जारी किया नया अपडेटराजस्थान
17 सित॰ 2026, 6:35 pm (1 दिन पहले)· 0

राजस्थान में 18 सितंबर को झमाझम बारिश के आसार, मौसम विभाग ने जारी किया नया अपडेट

राजस्थान में 18 सितंबर को मौसम का मिला-जुला मिजाज देखने को मिलेगा। पूर्वी राजस्थान के पांच और पश्चिमी राजस्थान के दो संभागों में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है, हालांकि किसी भी जिले के लिए कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है।

राजस्थान के मौसम में लगातार बदलाव का दौर जारी है। मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार, आने वाली 18 सितंबर को राज्य के कई हिस्सों में बादलों की आवाजाही और हल्की से मध्यम बारिश की गतिविधियां दर्ज की जा सकती हैं। हालांकि मानसून की यह सक्रियता छिटपुट स्थानों तक ही सीमित रहने के आसार हैं और पूरे प्रदेश में किसी भी तरह के गंभीर खतरे या चेतावनी की स्थिति नहीं बनी है। प्रशासन और मौसम विज्ञान केंद्र स्थिति पर पूरी नजर बनाए हुए हैं ताकि आम जनजीवन पर इसका कोई प्रतिकूल असर न पड़े।

पूर्वी राजस्थान के पांच संभागों में बरसेंगे बादल

पूर्वी राजस्थान के बड़े हिस्से में बारिश का यह दौर मुख्य रूप से भरतपुर, कोटा, उदयपुर, जयपुर और अजमेर संभागों के इर्द-गिर्द केंद्रित रहने की संभावना है। इन पांचों संभागों के कुछ चुनिंदा स्थानों पर स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ फुहारें पड़ सकती हैं। मौसम विभाग की दैनिक रिपोर्ट बताती है कि इस क्षेत्र के जयपुर, उदयपुर, अजमेर, कोटा और भरतपुर के विभिन्न इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की उम्मीद है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे संभाग में एक साथ भारी पानी बरसेगा, बल्कि कुछ ही इलाकों में बादलों की सक्रियता देखने को मिलेगी।

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पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभाग में भी राहत

रेतीले धोरों वाले पश्चिमी राजस्थान में भी मौसम पूरी तरह से सूखा रहने की उम्मीद नहीं है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, पश्चिमी अंचल के बीकानेर और जोधपुर संभागों के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है। हालांकि इन दोनों संभागों के बाकी इलाकों में मौसम साफ रहने के आसार हैं। पश्चिमी राजस्थान के अन्य क्षेत्रों जैसे बाड़मेर, चूरू, डीडवाना-कुचामन, हनुमानगढ़, जैसलमेर, जालौर, नागौर, पाली, फलौदी और श्रीगंगानगर में भी बारिश को लेकर कोई अलग से चेतावनी दर्ज नहीं की गई है।

प्रदेशभर में ग्रीन अलर्ट, किसी जिले में नहीं है चेतावनी

इस पूरे मौसमी घटनाक्रम के बीच सबसे राहत भरी बात यह है कि 18 सितंबर के लिए राज्य के किसी भी जिले में कोई विशेष चेतावनी या अलर्ट जारी नहीं किया गया है। पूर्वी राजस्थान के 28 जिलों और पश्चिमी राजस्थान के 13 जिलों समेत कुल सभी 41 जिलों के लिए चेतावनी का स्तर ग्रीन यानी पूरी तरह से नो वार्निंग रखा गया है। इसका साफ अर्थ यह है कि जिन जगहों पर बारिश की संभावना बन रही है, वहां भी किसी प्रकार के भारी नुकसान या खतरे की आशंका नहीं है। किसान और आम नागरिक अपने दैनिक कार्यों को सामान्य रूप से जारी रख सकते हैं।

संभागवार मौसम की स्थिति और आंकड़े

मौसम विभाग की रिपोर्ट के अनुसार जयपुर संभाग में छिटपुट बारिश की संभावना है लेकिन कोई चेतावनी नहीं है। इसी तरह भरतपुर संभाग के कुछ स्थानों पर पानी बरस सकता है और वहां भी स्थिति पूरी तरह सामान्य है। कोटा संभाग में भी कहीं-कहीं बारिश का अनुमान जताया गया है और कोई प्रशासनिक चेतावनी नहीं है। उदयपुर संभाग में भी कुछ जगहों पर बादलों की लुकाछिपी देखने को मिल सकती है। पश्चिमी छोर पर स्थित बीकानेर संभाग में भी छिटपुट वर्षा के संकेत हैं और वहां का चेतावनी स्तर भी ग्रीन ही है। कुल मिलाकर 18 सितंबर का दिन राजस्थान के लिए शांत और राहत भरा रहने वाला है।

सवाल-जवाब

18 सितंबर को राजस्थान में बारिश होगी या नहीं?
हां, पूर्वी राजस्थान के पांच संभागों और पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर व जोधपुर संभागों में कहीं-कहीं बारिश की संभावना है।
18 सितंबर को जयपुर में मौसम कैसा रहेगा?
जयपुर संभाग में छिटपुट बारिश हो सकती है और जयपुर जिले के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है।
क्या 18 सितंबर को पश्चिमी राजस्थान में बारिश होगी?
पश्चिमी राजस्थान के बीकानेर और जोधपुर संभागों के कुछ स्थानों पर वर्षा होने की संभावना जताई गई है।
राजस्थान में 18 सितंबर को कौन सा अलर्ट है?
पूरे राजस्थान में ग्रीन अलर्ट यानी नो वार्निंग है और किसी भी जिले के लिए कोई चेतावनी नहीं है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·21 घंटे पहले

वैदिक गणितीय ज्योतिष और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, 18 सितंबर को ग्रहों की चाल से बनने वाला नक्षत्र योग राज्य में वर्षा की अनुकूल स्थिति दर्शा रहा है। पूर्वी और पश्चिमी संभागों में छिटपुट बारिश और ग्रीन अलर्ट यह सिद्ध करता है कि प्रकृति में संतुलन बना हुआ है, जिससे कृषि कार्यों और जनजीवन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·22 घंटे पहले

मौसम का यह चक्र न केवल कृषि के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और नीतिगत प्रबंधन की दृष्टि से भी एक सकारात्मक संकेत है। राज्यभर में ग्रीन अलर्ट यह सुनिश्चित करता है कि प्रशासनिक तंत्र पर आपदा प्रबंधन का तात्कालिक दबाव नहीं रहेगा, जिससे सरकार का पूरा ध्यान आगामी नीतियों और विकास कार्यों के क्रियान्वयन पर केंद्रित रहेगा। किसानों के लिए हल्की बारिश जहाँ फसल जीवन के लिए अनुकूल है, वहीं शासन स्तर पर किसी आपात स्थिति से निपटने की आवश्यकता न होना संसाधनों के कुशल उपयोग को दर्शाता है।

Ravikash Gupta@ravikash·22 घंटे पहले

अर्जुन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस मौसमी स्थिति का प्रभाव राज्य के ग्रामीण और कृषि-आधारित वित्तीय चक्र पर भी सकारात्मक पड़ेगा। जब फसल सुरक्षा और क्षेत्रीय आपूर्ति शृंखला पर मौसम का प्रतिकूल दबाव नहीं होता, तो स्थानीय मंडियों में नकदी प्रवाह और कृषि निवेश स्थिर बने रहते हैं। ग्रीन अलर्ट की यह स्थिति यह भी सुनिश्चित करती है कि कॉर्पोरेट और ग्रामीण विकास से जुड़ी नीतियां बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के आगे बढ़ सकें, जिससे निवेशकों और हितधारकों को भी एक स्थिर आर्थिक संकेत मिलता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

राजस्थान में 18 सितंबर को किसी भी जिले में चेतावनी न होना और सभी 41 जिलों का ग्रीन जोन में रहना कृषि और प्रशासनिक गतिविधियों के लिए राहत की बात है। हालांकि छिटपुट बारिश से स्थानीय किसानों को फसलों की सिंचाई में मामूली मदद मिल सकती है, लेकिन मानसून की यह सीमित सक्रियता बड़े पैमाने पर जल संकट से जूझ रहे इलाकों के लिए नाकाफी साबित होगी। आगामी दिनों में यदि मानसूनी हवाओं को नया बल नहीं मिला, तो तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है जिस पर कृषि विशेषज्ञों की नजर बनी हुई है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

मौसम की यह स्थिति कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा के लिहाज से पूरी तरह नियंत्रण में है क्योंकि किसी भी जिले में प्रशासनिक चेतावनी नहीं है। हालांकि, इस छिटपुट बारिश के दौरान सड़क हादसों और दृश्यता कम होने जैसी स्थानीय समस्याओं से निपटने के लिए यातायात पुलिस और आपदा प्रबंधन तंत्र को अपनी सतर्कता बनाए रखनी चाहिए ताकि आम जनजीवन बिना किसी बाधा के चलता रहे।

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