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दिल्ली और महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट रिवीजन की अंतिम तारीख आगे बढ़ी, चुनाव आयोग का बड़ा फैसलाभारत
26 सित॰ 2026, 7:51 pm (35 दिन पहले)· 1

दिल्ली और महाराष्ट्र में वोटर लिस्ट रिवीजन की अंतिम तारीख आगे बढ़ी, चुनाव आयोग का बड़ा फैसला

चुनाव आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र में एसआईआर (SIR) के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की समय-सीमा बढ़ा दी है। अब लोग बढ़ी हुई तारीखों तक अपने आवेदन दे सकेंगे और नोटिस का निपटारा भी नई समय-सीमा के तहत होगा।

नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने दिल्ली और महाराष्ट्र राज्यों में मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया से जुड़े नियमों और समय-सीमा में अहम बदलाव किए हैं। चुनाव आयोग की ओर से लिए गए इन फैसलों से लाखों मतदाताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अब उन्हें अपने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने के लिए अतिरिक्त समय मिल गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ-साथ चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने शनिवार को एक अहम बैठक में इन सभी प्रस्तावों को औपचारिक रूप से मंजूरी प्रदान की। आयोग द्वारा जारी की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार दोनों ही राज्यों में इस प्रक्रिया से जुड़ी महत्वपूर्ण तारीखों में विस्तार किया गया है।

दिल्ली में बढ़ाई गई समय-सीमा

निर्वाचन आयोग की घोषणा के मुताबिक राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वोटर लिस्ट के इस विशेष सघन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तिथि को आगे बढ़ा दिया गया है। अब दिल्ली के मतदाता 30 अक्टूबर 2026 तक अपने दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। इसके अलावा इन नोटिसों, दावों और आपत्तियों के अंतिम निपटारे की समय-सीमा को भी बढ़ाकर 30 नवंबर 2026 कर दिया गया है। इस विस्तार से नागरिकों को अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करने और प्रक्रिया को पूरी तरह से समझने के लिए पर्याप्त समय मिल जाएगा।

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महाराष्ट्र में क्या है नया शेड्यूल

दूसरी तरफ महाराष्ट्र राज्य के लिए भी चुनाव आयोग ने समय-सीमा में बड़ा बदलाव किया है। महाराष्ट्र में एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख अब 12 अक्टूबर 2026 निर्धारित कर दी गई है। इसके साथ ही महाराष्ट्र में इन सभी नोटिसों तथा दावे-आपत्तियों के निपटारे की अंतिम समय-सीमा को भी आगे बढ़ाकर 10 नवंबर 2026 कर दिया गया है। आयोग के इन फैसलों से दोनों ही राज्यों के चुनावी क्षेत्रों में नामावलियों के पुनरीक्षण का कार्य अधिक सुचारू रूप से चल सकेगा।

बीएलओ और ईआरओ के लिए नए निर्देश

शनिवार को हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद चुनाव आयोग ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति भी जारी की है। विज्ञप्ति में स्पष्ट किया गया है कि यदि वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी मतदाता को अनमैप्ड होने या किसी प्रकार की तार्किक गड़बड़ियों के कारण नोटिस जारी किया जाता है, तो बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ सीधे ऐसे लोगों के घर जाएंगे। बीएलओ स्वयं उनके घर से जरूरी दस्तावेज एकत्र करेंगे और फिर उन्हें निर्वाचन रजिस्ट्रेशन ऑफिसर यानी ईआरओ के फैसले के लिए ईसीआईनेट पोर्टल पर अपलोड करेंगे। इसके लिए नागरिकों को बीएलओ या ईआरओ के कार्यालयों के चक्कर काटने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होगी।

व्यक्तिगत पेशी से छूट और ऑनलाइन सुनवाई

आयोग के निर्देशों के अनुसार, नोटिस प्राप्त करने वाले मतदाताओं को किसी भी विशेष परिस्थिति को छोड़कर व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए दफ्तर आने की जरूरत नहीं है। केवल कुछ विशेष हालात में ही, जैसा कि ईआरओ तय करेगा, सुनवाई को बेहतर माना जाएगा कि वह ऑनलाइन माध्यम से हो। यदि किसी कारणवश मुख्य व्यक्ति उपस्थित नहीं हो पा रहा है, तो ऐसी स्थिति में वोटर अपने परिवार के किसी भी वयस्क या बड़े सदस्य को अपनी तरफ से सुनवाई में शामिल होने के लिए अधिकृत कर सकते हैं। आयोग ने ऑनलाइन सुनवाई की तकनीकी सुविधाओं को और अधिक मजबूत करने के भी निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का संदर्भ

भारत निर्वाचन आयोग ने यह भी जानकारी साझा की है कि एसआईआर प्रक्रिया के दौरान फॉर्म 6 के साथ अटैच की जाने वाली घोषणा को माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले ही सही ठहराया जा चुका है। इसके अलावा गैर-एसआईआर अवधि के दौरान इलेक्टर्स रजिस्ट्रेशन रूल्स 1960 के मौजूदा नियमों के अनुसार ही निर्धारित फॉर्मों का उपयोग किया जाएगा। आयोग ने इन सभी निर्णयों को अपने तीनों आयुक्तों की पूर्ण सर्वसम्मति से लिया है, ताकि प्रक्रिया को लेकर किसी भी प्रकार का संशय या विवाद न रहे।

सवाल-जवाब

दिल्ली में एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दाखिल करने की नई अंतिम तारीख क्या है?
दिल्ली में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 30 अक्टूबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
दिल्ली में नोटिस और दावों के निपटारे की समय-सीमा कब तक है?
दिल्ली में नोटिस और दावों के निपटारे की समय-सीमा 30 नवंबर 2026 तक बढ़ा दी गई है।
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख क्या तय की गई है?
महाराष्ट्र में दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 12 अक्टूबर 2026 है।
महाराष्ट्र में नोटिस और दावों के निपटारे की अंतिम तिथि क्या है?
महाराष्ट्र में नोटिस और दावों के निपटारे की अंतिम तिथि 10 नवंबर 2026 कर दी गई है।
क्या एसआईआर नोटिस मिलने पर मतदाता को व्यक्तिगत रूप से दफ्तर जाना होगा?
नहीं, विशेष मामलों को छोड़कर व्यक्तिगत रूप से सुनवाई के लिए दफ्तर जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि बीएलओ खुद घर आकर दस्तावेज एकत्र करेंगे।
अनमैप्ड या गड़बड़ी वाले मामलों में दस्तावेज कैसे एकत्र किए जाएंगे?
बीएलओ ऐसे लोगों के घर जाकर दस्तावेज इकट्ठा करेंगे और उन्हें ईआरओ के फैसले के लिए ईसीआईनेट पर अपलोड करेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·34 दिन पहले

अक्टूबर 2026 तक की समय सीमा बढ़ाना वाकई राहत की बात है, वरना इतने कागजात जुटाना मुश्किल हो जाता।

Arjun Mehta@arjun-mehta·34 दिन पहले

पिछली बार जब दिल्ली में वोटर लिस्ट का काम हुआ था, तो मेरे एक पड़ोसी को दफ्तर के चक्कर काट-काटकर दमा सा हो गया था। शुक्र है इस बार बीएलओ खुद घर आकर कागज़ ले जाएंगे, वर्ना गर्मी में धक्के खाने की नौबत आ जाती।

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·34 दिन पहले

अरिजीत भाई, सच कहा आपने। पहले कागज़ जमा करने में जो पसीना छूटता था, उससे तो जान ही निकल जाती थी। बीएलओ के घर आने से बड़ी राहत मिल जाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·34 दिन पहले

तारीख़ बढ़ाना ठीक है, पर 2026 तक का इंतज़ार बहुत लंबा नहीं है? तब तक तो पूरा चुनावी गणित ही बदल जाएगा। बीएलओ खुद घर आएंगे, ये कागज़ों में तो अच्छा लगता है, पर ज़मीन पर कितनी बार ऐसा होता है, सब जानते हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·34 दिन पहले

रोहन भाई, तुम्हारी बात सही है कि ज़मीन पर बीएलओ कितनी बार आते हैं भगवान जाने, पर क्या ये बढ़ी हुई तारीखें सिर्फ़ इसी प्रक्रिया के लिए हैं या आगे के चुनावों पर भी असर डालेंगी?

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