आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की खोज से हिला कंप्यूटर साइंस, एक्सपोनेंशियल टाइम हाइपोथिसिस पर उठे सवाललाइव: चक्रवात अर्णब का ओडिशा और आंध्र प्रदेश में भारी तांडव, 55 हजार से अधिक लोग सुरक्षित स्थानों पर शिफ्टहजारों साल पुराना है कंडोम का इतिहास, कभी भेड़ की आंत और कछुए के खोल से तैयार होते थे ये कवरपेरेंट्स की ये 5 गलतियां घर में बढ़ाती हैं भाई-बहनों के बीच मनमुटाव, ताउम्र रिश्तों में आ जाती है कड़वाहटरिवाइव हुआ समझौता: वोक्सवैगन ग्रुप के साथ एआई असिस्टेंट साझा करेगी रिवियनडोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद कैसे बढ़ी ट्रांसजेंडर बच्चों के माता-पिता की मानसिक चिंता?स्पेन ट्रेन हादसा: 69 लोगों की मौत, युवा एथलीट और पूर्व मंत्री भी शामिलनीट-यूजी और नेट विवादों के साये में एनटीए का कायापलट, सीआईएसएफ को सौंपी गई सुरक्षा और हटाए गए 600 विशेषज्ञद डेविल्स रिव्यू (2026): कैसे आधी सदी पुराना कल्ट क्लासिक इस हेलोवीन सीजन का सबसे बड़ा सिनेमाई धमाका बन गयादिल्ली का जहरीला प्रदूषण फेफड़ों के साथ-साथ दिमाग को भी बना रहा है गंभीर रूप से बीमार, स्ट्रोक का खतरा बेहद तेज
दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग सुधार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 25 नवंबर तक काम न होने पर धरने की दी चेतावनीदिल्ली
16 अक्तू॰ 2026, 7:24 pm (14 दिन पहले)· 1

दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग सुधार पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, 25 नवंबर तक काम न होने पर धरने की दी चेतावनी

दिल्ली हाईकोर्ट के सामने सड़क सुरक्षा और क्रॉसिंग सुधार के काम में देरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए 25 नवंबर 2026 तक की अंतिम समयसीमा तय कर दी है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि काम पूरा न होने पर जज और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल खुद मुख्य द्वार पर धरने पर बैठेंगे।

देश की राजधानी में दिल्ली हाईकोर्ट के ठीक सामने मौजूद सड़क क्रॉसिंग पर ट्रैफिक व्यवस्था और पैदल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अत्यंत सख्त रुख अख्तियार किया है। प्रशासनिक स्तर पर फाइलों के चक्कर और निर्माण कार्य में हो रही लगातार देरी पर शीर्ष अदालत की एक पीठ ने गहरी नाराजगी जाहिर की। सुनवाई के दौरान दो जजों की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी को स्पष्ट शब्दों में चेताया कि अगर तय समयसीमा के भीतर यह काम पूरा नहीं किया गया, तो वे दोनों जज खुद हाईकोर्ट के मुख्य द्वार के सामने धरने पर बैठ जाएंगे और किसी को भी घर नहीं जाने दिया जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने जमीनी काम पूरा करने के लिए 25 नवंबर 2026 की अंतिम समयसीमा मुकर्रर कर दी है।

प्रशासनिक हीलाहवाली और कमेटियों के गठन पर अदालत का रोष

दिल्ली हाईकोर्ट के सामने वाले व्यस्त चौराहे पर सड़क सुरक्षा और बुनियादी इंजीनियरिंग सुधार का मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ था। अदालत में जब इस विषय पर सुनवाई आगे बढ़ी, तो अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल विक्रमजीत बनर्जी ने पीठ को अवगत कराया कि मसले के समाधान के लिए एक समिति गठित की गई है और वह इस संदर्भ में काम कर रही है। सरकार की तरफ से कमेटी बनाए जाने की बात सुनते ही अदालत ने कड़ा ऐतराज जताया। पीठ ने दो टूक सवाल किया कि सड़क सुधार जैसे सीधे काम के लिए कमेटी बनाने की क्या आवश्यकता है और क्या प्रशासन को जरूरी इंजीनियर भी नहीं मिल रहे हैं। अदालत ने साफ किया कि आम जनता के जीवन और सुरक्षा से जुड़े मसलों पर प्रशासनिक देरी अब कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

ये भी पढ़ें

धरने की अनोखी चेतावनी और अधिकारियों की जवाबदेही तय

अदालत ने सुनवाई के दौरान बेहद अनूठे अंदाज में चेतावनी जारी करते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने तत्परता से काम पूरा नहीं किया, तो दोनों जज स्वयं दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य गेट पर पहुंचेंगे और जब तक काम खत्म नहीं होता, वे वहां से नहीं हटेंगे। पीठ ने यह भी जोड़ दिया कि वे अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल को भी वहीं रोकेंगे और किसी को घर लौटने की अनुमति नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिया कि इस तरह के छोटे इंजीनियरिंग सुधारों के लिए लंबी-चौड़ी कमेटियों के जाल में उलझने के बजाय सीधे जमीनी स्तर पर समाधान खोजा जाना चाहिए।

एमिकस क्यूरी की भूमिका और मुख्य सचिव को पेश करने की हिदायत

प्रक्रिया को तेज करने के लिए अदालत ने स्पष्ट किया कि मामले में एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल को शामिल किया जाए। एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल मौके पर जाकर वस्तुस्थिति का जायजा लेंगे और यह रेखांकित करेंगे कि असल समस्या कहां आ रही है। शीर्ष अदालत ने सख्त लहजे में कहा कि इसके लिए किसी उच्च स्तरीय कमेटी के बहाने नहीं चलेंगे। 25 नवंबर से पहले हर हाल में जमीनी काम पूरा होना चाहिए। इसके साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि तय तारीख तक काम मुकम्मल नहीं हुआ, तो अगली सुनवाई पर दिल्ली के मुख्य सचिव को अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के साथ अदालत के कटघरे में व्यक्तिगत रूप से खड़ा होना पड़ेगा।

पैदल यात्रियों की सुरक्षा और समयसीमा की चुनौती

दिल्ली हाईकोर्ट के आसपास के इलाके में पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग, डिजाइन संबंधी खामियां और गंभीर ट्रैफिक जाम की दिक्कतें वर्षों से आम लोगों को परेशान कर रही हैं। सुप्रीम कोर्ट की इस तल्ख टिप्पणी ने स्पष्ट संदेश दिया है कि न्यायपालिका सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े कार्यों में सुस्ती पर किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरतेगी। अब प्रशासन के सामने 25 नवंबर 2026 से पहले कंक्रीट का वास्तविक निर्माण कार्य पूरा करने की कड़ी चुनौती है।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट क्रॉसिंग मामले में क्या चेतावनी दी?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि 25 नवंबर 2026 तक सड़क सुरक्षा का काम पूरा नहीं हुआ, तो दोनों जज और अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल हाईकोर्ट के मुख्य गेट पर धरने पर बैठेंगे।
अदालत ने कमेटी बनाए जाने पर क्या सवाल उठाए?
अदालत ने पूछा कि सड़क सुधार के लिए कमेटी की क्या जरूरत है और क्या सरकार को जरूरी काम के लिए इंजीनियर नहीं मिलते।
इस मामले में एमिकस क्यूरी की क्या जिम्मेदारी तय की गई है?
अदालत ने एमिकस क्यूरी गौरव अग्रवाल को मौके पर जाकर जमीनी समस्या का निरीक्षण करने और वास्तविक खामियों की पहचान करने का निर्देश दिया है।
तय समय पर काम न होने पर किस अधिकारी को कोर्ट में पेश होना पड़ेगा?
यदि 25 नवंबर तक काम पूरा नहीं हुआ, तो दिल्ली के मुख्य सचिव को अदालत के कटघरे में अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के साथ खड़ा होना पड़ेगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ayesha Siddiqui@ayesha-siddiqui·13 दिन पहले

अदालत की यह सख्ती देखकर अच्छा लगा, वरना हमारे यहां तो कमेटियां सिर्फ फाइलें गोल-गोल घुमाने के लिए होती हैं। जब तक जज साहब खुद धरने की बात न कहें, बाबू लोग अपनी कुर्सी से हिलते ही नहीं हैं।

Arjun Mehta@arjun-mehta·13 दिन पहले

कमेटी बनाने के नाम पर काम टालने की आदत पर सुप्रीम कोर्ट की ये फटकार एकदम सही है।

Pooja Bhatt@pooja-bhatt·13 दिन पहले

अर्जुन, बिल्कुल सही कहा आपने! मैं खुद पिछले हफ्ते उस क्रॉसिंग पर फंसी थी, पैदल चलना सच में जान जोखिम में डालने जैसा है।

Rohan Verma@rohan-verma·13 दिन पहले

सुप्रीम कोर्ट का गुस्सा तो समझ आता है, लेकिन क्या सिर्फ जजों के धरने की चेतावनी देने से सालों से अटके सरकारी काम सच में तय तारीख तक पूरे हो जाएंगे? जब तक जिम्मेदार अफसरों पर सीधे गा नहीं गिरेगी, तब तक फाइलें ऐसे ही घूमती रहेंगी क्या?

Karan Malhotra@karan-malhotra·13 दिन पहले

रोहन भाई, विक्रमजीत बनर्जी का नाम सुनते ही समझ आ गया कि सरकारी वकील भी इस बार पक्के फंसेंगे।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp