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दिल्ली में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों की हिरासत का मामला शीर्ष अदालत पहुंचा, रविवार को बैठेगी विशेष पीठभारत
10 अक्तू॰ 2026, 9:06 pm (19 दिन पहले)· 1

दिल्ली में चार पूर्व मुख्यमंत्रियों की हिरासत का मामला शीर्ष अदालत पहुंचा, रविवार को बैठेगी विशेष पीठ

दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल समेत चार पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ दायर याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय में रविवार को सुनवाई होगी।

देश की राजधानी में शनिवार को विपक्षी नेताओं को एहतियातन हिरासत में लिए जाने की पुलिसिया कार्रवाई अब अदालत की चौखट पर पहुंच गई है। तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने इस कदम के खिलाफ देश की शीर्ष अदालत में एक अर्जी दाखिल की है। हिरासत में लिए गए प्रमुख चेहरों में चार पूर्व मुख्यमंत्री भी शामिल हैं। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने याचिका को स्वीकार कर लिया है और रविवार के दिन एक विशेष पीठ इस पर सुनवाई करने वाली है।

शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकार पर सवाल

अदालत में दायर की गई अर्जी में पुलिस के इस कदम की वैधानिकता को सीधे तौर पर चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि नागरिकों और जन प्रतिनिधियों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के बुनियादी अधिकार को कुचलने के लिए एहतियातन हिरासत जैसे कड़े प्रावधानों का सहारा नहीं लिया जा सकता। अर्जी में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि हिरासत में लिए गए लोग विभिन्न राज्यों में मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इस कानूनी चुनौती में न केवल सड़कों से प्रदर्शनकारियों को पकड़े जाने का विरोध किया गया है, बल्कि विपक्षी नेताओं को उनके निजी आवासों से उठाए जाने पर भी गंभीर आपत्ति जताई गई है।

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जंतर-मंतर पर पसरा सन्नाटा और पुलिस की घेराबंदी

शनिवार के इस घटनाक्रम के दौरान ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर पूरी तरह सन्नाटा पसरा रहा। प्रदर्शन के लिए सीजेपी से जुड़े हजारों कार्यकर्ता राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से जंतर-मंतर की ओर बढ़े थे, मगर पुलिस की कड़ी नाकेबंदी के चलते एक भी कार्यकर्ता निर्धारित स्थल तक नहीं पहुंच सका। अभिजीत दिपके की ओर से बनाई गई रणनीति को नाकाम करते हुए सुरक्षाबलों ने इलाके में आने वाले प्रदर्शनकारियों को चुन-चुनकर हिरासत में ले लिया।

ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल भी लिए गए हिरासत में

इस आंदोलन को समर्थन देने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी आगे आए, लेकिन वे भी धरना स्थल तक नहीं पहुंच सके। जैसे ही वे अपने घर से बाहर निकले, दिल्ली पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इसी तरह तृणमूल कांग्रेस की ओर से भी मोर्चा खोला गया था। अपने सांसदों के साथ पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी विरोध दर्ज कराने सड़क पर उतरीं। उन्होंने अपने मुंह पर काली पट्टी अथवा टेप लगाकर सांकेतिक विरोध जताया, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी अपने साथ गाड़ी में बैठा लिया। इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और माणिक सरकार को भी हिरासत में लिया गया।

तीस हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती और सख्त निगरानी

पुलिस प्रशासन ने इस बार किसी भी तरह की अव्यवस्था रोकने के लिए बेहद व्यापक इंतजाम किए थे। सुरक्षा महकमे ने 20 जुलाई को हुए पिछले प्रदर्शन से सबक लेते हुए व्यापक सुरक्षा खाका तैयार किया था। राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के करीब 30 हजार जवानों को तैनात किया गया था। चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए ड्रोन उड़ाए गए और केंद्रीय कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए निगरानी रखी गई। जंतर-मंतर की तरफ जाने वाले सभी रास्तों को पूरी तरह सील कर दिया गया था, जबकि राजधानी की सीमाओं पर बैरिकेड लगाकर आने-जाने वाले सभी वाहनों की गहन तलाशी ली गई।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट में याचिका किसने दायर की है?
वरिष्ठ अधिवक्ता और टीएमसी की राज्यसभा सांसद मेनका गुरुस्वामी ने शीर्ष अदालत में याचिका दायर की है।
इस मामले पर अदालत में सुनवाई कब होगी?
याचिका पर सुनवाई के लिए रविवार को विशेष पीठ बैठेगी।
किन पूर्व मुख्यमंत्रियों को हिरासत में लिया गया है?
ममता बनर्जी, अरविंद केजरीवाल, पिनराई विजयन और माणिक सरकार को हिरासत में लिया गया है।
प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में कितने सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं?
सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस, अर्धसैनिक बलों और बीएसएफ के करीब 30 हजार जवानों को तैनात किया गया है।
याचिका में मुख्य कानूनी तर्क क्या दिया गया है?
याचिका में कहा गया है कि शांतिपूर्ण विरोध के बुनियादी अधिकार को दबाने के लिए एहतियातन हिरासत का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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टिप्पणियाँ 5

Rohan Gupta@rohan-gupta·19 दिन पहले

नेता चाहें कोई भी हों, शांतिपूर्ण विरोध करने पर घर से उठाना लोकतंत्र के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। रविवार की सुनवाई में देखिए क्या फैसला आता है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·19 दिन पहले

मुंह पर टेप लगाकर विरोध जता रही ममता बनर्जी को भी पुलिस ने गाड़ी में बिठा लिया। भाई, राजनीति में सांकेतिक विरोध का ये तरीका भी अब थाने तक ले जाने लगा है, गजब हाल है।

Aisha Khan@aisha-khan·19 दिन पहले

अर्जुन जी, ममता दीदी का मुंह पर टेप लगाकर बैठना वाकई फिल्मी लग रहा था। पर पुलिस ने सीधे घर या रास्ते से ही उठा लिया, ये थोड़ा अजीब है यार!

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

रविवार को विशेष पीठ बैठने की बात कुछ अजीब लग रही है। आमतौर पर इतनी जल्दी मामले नहीं सुने जाते, जरूर कुछ तो अलग है इसमें।

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

करण भाई, लखनऊ में भी ऐसे मामलों में कई बार रात को ही अर्जी लग जाती है, जब बात इतने बड़े नेताओं की हो तो अदालतें तेजी दिखाती ही हैं।

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