बाजार में कम दामों पर बिकने वाले देशी घी, हल्दी, लाल मिर्च और जीरा जैसे दैनिक उपयोग के खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में देश के अलग-अलग राज्यों में चलाए गए एक बड़े अभियान के दौरान खाद्य मिलावट के ऐसे संगठित रैकेट का खुलासा हुआ है, जहां असली खाद्य सामग्री के स्थान पर जानलेवा रसायनों, औद्योगिक रंगों और लकड़ी के बुरादे का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा था। गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में हुई छापेमारी में हजारों लीटर नकली घी और क्विंटल के हिसाब से जहरीले मसाले जब्त किए गए हैं, जो आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बने हुए थे।
अहमदाबाद में 30 हजार लीटर नकली घी और चाइनीज केमिकल जब्त
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने गुजरात के अहमदाबाद में नकली घी बनाने वाले एक बड़े कारखाने का भंडाफोड़ करते हुए 30 हजार लीटर मिलावटी घी बरामद किया है। इस अवैध फैक्ट्री में पॉमोलिन ऑयल को विशेष केमिकल्स के साथ मिलाकर हूबहू देशी घी में तब्दील किया जा रहा था। मौके से 50 हजार लीटर ऐसा चाइनीज केमिकल भी पकड़ा गया है, जो पॉमोलिन ऑयल के रंग, गंध और बनावट को बदलकर उसे शुद्ध देशी घी जैसा बना देता था। कार्रवाई के दौरान एफडीए अधिकारी यह देखकर हैरान रह गए कि लैब उपकरणों के प्राथमिक परीक्षण में भी यह मिलावटी घी वसा (फैट) के मानकों पर असली घी जैसा ही दिखाई दे रहा था और उपकरण भी इसकी पहचान नहीं कर पाए।
गांधीनगर रेंज के पुलिस उपमहानिरीक्षक (DIG) वीरेंद्र सिंह यादव ने इस मामले की जानकारी देते हुए बताया कि जब्त किए गए नकली घी की कुल बाजार कीमत लगभग 1.75 करोड़ रुपये है। इसके अलावा कारखाने से 78 लाख रुपये मूल्य का ऐसा जहरीला केमिकल भी बरामद हुआ है, जो इंसानों के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। जांच में पता चला कि इस अवैध कारखाने का मालिक दो साल पहले भी इसी तरह के नकली घी के कारोबार में गिरफ्तार हो चुका था। जमानत पर छूटने के बाद उसने फिर से यही अवैध धंधा शुरू कर दिया और अपने नेटवर्क का विस्तार गुजरात के अलावा पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र जैसे राज्यों तक कर लिया था।
लुधियाना तक फैला था मिलावटी घी का नेटवर्क
अहमदाबाद में हुई इस कार्रवाई के तार पंजाब के लुधियाना से भी जुड़े पाए गए, जहां पुलिस ने एक संदिग्ध गोदाम पर छापेमारी करके 3,000 लीटर नकली घी की खेप जब्त की। लुधियाना पुलिस को सूचना मिली थी कि शहर में एक व्यक्ति मात्र 450 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से गाय का शुद्ध घी बेचने का दावा कर रहा है। सामान्य बाजार दरों से काफी कम कीमत होने के कारण पुलिस को संदेह हुआ और गोदाम पर अचानक दबिश दी गई।
पूछताछ में गोदाम मालिक ने स्वीकार किया कि उसने यह सस्ता घी गुजरात के अहमदाबाद से मंगवाया था और उसे इसकी गुणवत्ता या निर्माण प्रक्रिया के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि 450 रुपये प्रति किलो में शुद्ध गाय का घी बेचना संभव नहीं है। पुलिस ने गोदाम के पूरे माल को जब्त कर लिया है और नमूनों को राज्य खाद्य प्रयोगशाला में विस्तृत जांच के लिए भेज दिया है।
कानपुर में चावल के आटे, रंग और लकड़ी के बुरादे से बन रहे थे मसाले
खाद्य पदार्थों में मिलावट का दूसरा गंभीर मामला उत्तर प्रदेश के कानपुर में सामने आया, जहां खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने नकली मसाले तैयार करने वाली एक फैक्ट्री का पर्दाफाश किया। इस कारखाने में असली मसालों का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जा रहा था। अधिकारियों ने मौके से 2,000 किलोग्राम ऐसी नकली हल्दी जब्त की, जिसे खराब गुणवत्ता वाले चावल को पीसकर और उसमें जहरीले रासायनिक रंगों को मिलाकर तैयार किया गया था। इसमें हल्दी का एक भी असली टुकड़ा मौजूद नहीं था।
इसी तरह लाल मिर्च पाउडर तैयार करने के लिए खतरनाक लाल केमिकल रंगों का इस्तेमाल किया जा रहा था, जबकि धनिया पाउडर बनाने के लिए लकड़ी के बुरादे को रंगा जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस अवैध ठिकाने से कुल 5 लाख 86 हजार रुपये मूल्य के मिलावटी मसालों का स्टॉक जब्त किया है, जिसे बाजार में सप्लाई करने की तैयारी थी।
हैदराबाद में कपड़ों की डाई से रंगे गए मसाले, गैर-इरादतन हत्या का दर्ज होगा केस
दक्षिण भारत के हैदराबाद में भी खाद्य मसालों में की जा रही खतरनाक मिलावट का खुलासा हुआ है। शहर की तीन अलग-अलग दुकानों पर की गई छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में पॉलिश की गई लौंग और जीरा बरामद किया गया। मसालों को ताजा और आकर्षक दिखाने के लिए व्यापारी टेक्सटाइल इंडस्ट्री में इस्तेमाल होने वाली कपड़ों की डाई और रासायनिक रंगों का प्रयोग कर रहे थे।
हैदराबाद पुलिस ने जब्त किए गए असली और नकली मसालों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करके आम जनता को उनकी पहचान करने के तरीके समझाए। हैदराबाद के पुलिस आयुक्त ने मिलावटखोरी को जनस्वास्थ्य के खिलाफ गंभीर अपराध बताते हुए घोषणा की कि खाद्य पदार्थों में जानलेवा रसायनों की मिलावट करने वाले दोषियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जाएगा।
संसद के आंकड़े और ढीली कानूनी कार्रवाई की हकीकत
देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट की समस्या कितनी भयावह है, इसका अंदाजा संसद में पेश की गई एक रिपोर्ट से मिलता है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान देशभर से लिए गए कुल 8 लाख 86 हजार खाद्य नमूनों में से 20 प्रतिशत नमूने मिलावटी या असुरक्षित पाए गए।
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मिलावट के 75 प्रतिशत से अधिक मामलों में दोषियों पर केवल मामूली आर्थिक जुर्माना लगाया गया, जबकि केवल 3 प्रतिशत मामलों में ही अपराधियों को सजा हो सकी। इससे पहले भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने दिल्ली और हरियाणा में बड़ी कार्रवाई करते हुए 6,500 लीटर से अधिक मिलावटी घी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया था।


















