सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के इरादे से अजीबोगरीब घोषणाएं करने वालों के खिलाफ पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने अपना रुख बेहद सख्त कर लिया है। खुद को 'राजा डी किंग' और क्रिप्टो ट्रेडर बताने वाले एक व्यक्ति द्वारा 22 सितंबर को ट्राइसिटी क्षेत्र में मुफ्त स्मार्टफोन बांटने की बात कही गई थी। इस व्यक्ति ने ऑनलाइन मंचों पर दावा किया था कि वह तय तारीख को लोगों के बीच आईफोन 17 और उससे आधुनिक हैंडसेट का वितरण करेगा। जैसे ही यह मामला अधिकारियों के संज्ञान में आया, कानून व्यवस्था बिगड़ने की आशंका को देखते हुए तुरंत निषेधात्मक कदम उठा लिए गए।
कानून व्यवस्था और सुरक्षा कारणों से लगा प्रतिबंध
प्रशासनिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ऐसे गैर-जिम्मेदाराना संदेशों से सार्वजनिक सुरक्षा के लिए गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर निशांत यादव ने पुलिस तंत्र को निर्देश दिए हैं कि शहर की सीमाओं के भीतर इस तरह के किसी भी अनधिकृत जमावड़े को बिल्कुल न होने दिया जाए। अधिकारियों का मानना है कि महंगे फोन मुफ्त में मिलने के झांसे में आकर हजारों लोग अचानक एक स्थान पर एकत्र हो सकते हैं, जिससे भगदड़ मचने तथा जन-धन की भारी क्षति होने का खतरा बन जाता है। इस व्यक्ति ने पहले भी निशुल्क पेट्रोल वितरित करने की बात कहकर इसी तरह का प्रचार अभियान चलाया था। ऐसे जोखिमों को टालने के लिए शहर में इस कार्यक्रम के आयोजन को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
प्रशासनिक अनुमति का अभाव और कानूनी प्रावधान
आयोजन की वैधता को लेकर पुलिस महकमे ने साफ स्थिति स्पष्ट कर दी है। चंडीगढ़ की एसएसपी कंवरदीप कौर और मोहाली के एसएसपी वरुण शर्मा ने बताया कि इस तथाकथित कार्यक्रम के लिए सक्षम प्राधिकारी से कोई औपचारिक इजाजत नहीं ली गई है। बिना किसी पूर्व अनुमति सार्वजनिक स्थल पर लोगों को बुलाना भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 का सीधा उल्लंघन है। इसके अतिरिक्त, सरकारी आदेशों की अवहेलना करते हुए गैरकानूनी ढंग से भीड़ जुटाने की कोशिश करने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत अभियोजन चलाया जाएगा।
नियम तोड़ने पर निर्धारित सजा और जुर्माना
कानूनी विशेषज्ञों और पुलिस निर्देशों के अनुसार, निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ मामले की गंभीरता के आधार पर दो श्रेणियों में दंड का निर्धारण किया गया है
- सामान्य श्रेणी का उल्लंघन: यदि किसी व्यक्ति के कृत्य से लोक सेवकों के कार्य में व्यवधान पड़ता है या आम नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़ता है, तो दोषी पाए जाने पर 6 महीने तक की कैद, 2,500 रुपये तक का आर्थिक दंड अथवा दोनों सजाएं एक साथ दी जा सकती हैं।
- गंभीर श्रेणी का उल्लंघन: यदि इस प्रकार की भीड़ से नागरिकों के स्वास्थ्य, जीवन या समग्र सुरक्षा पर संकट उत्पन्न होता है अथवा उपद्रव या दंगे की स्थिति बनती है, तो सजा की अवधि 1 वर्ष तक के कारावास, 5,000 रुपये तक के जुर्माने या दोनों तक बढ़ाई जा सकती है।
पब्लिसिटी स्टंट और सोशल मीडिया की वास्तविकता
संबंधित व्यक्ति का तर्क रहा है कि वह पुश्तैनी जायदाद और डिजिटल मुद्रा के कारोबार से अर्जित धन का उपयोग इस काम के लिए कर रहा है। दूसरी ओर, प्रशासनिक अधिकारियों और सतर्कता एजेंसियों का कहना है कि यह केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अधिक व्यूज और फॉलोअर्स हासिल करने का हथकंडा है। इस तरह के भ्रामक वादों से युवाओं को आकर्षित कर सुरक्षा नियमों की धज्जियां उड़ाने की किसी भी चेष्टा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और नियमों को ताक पर रखने वाले किसी भी व्यक्ति से कानून पूरी कड़ाई से निपटेगा।





















