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डंपिंग ग्राउंड के केमिकल पानी ने पनवेल में मचाया कहर, एक घंटे में सात गायों ने तोड़ा दममहाराष्ट्र
25 जून 2026, 7:36 pm (79 दिन पहले)· 2

डंपिंग ग्राउंड के केमिकल पानी ने पनवेल में मचाया कहर, एक घंटे में सात गायों ने तोड़ा दम

रायगढ़ के पनवेल में डंपिंग ग्राउंड से रिसते रासायनिक पानी ने तालाबों को जहर बना दिया, जिससे एक घंटे के अंदर सात गायों की मौत हो गई और 19 बीमार पड़ गईं। स्थानीय लोग महिलाओं में मिसकैरेज और कैंसर बढ़ने का भी आरोप लगा रहे हैं।

महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले के पनवेल में प्रदूषण का एक डरावना रूप सामने आया है, जिसने गायों के साथ-साथ इंसानों की जान पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि एक डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाला रासायनिक और दूषित पानी आसपास के तालाबों और जलस्रोतों में घुल रहा है। नतीजा यह हुआ कि महज एक घंटे के भीतर सात गायों की मौत हो गई और 19 दूसरी गायें विषबाधा का शिकार बन गईं।

तालाब का पानी बन गया जहर

घटना ने इलाके में दहशत फैला दी है। जिस पानी से जानवर मर रहे हैं, स्थानीय लोग उसी पानी को इंसानों की सेहत के लिए भी बड़ा खतरा बता रहे हैं। उनका दावा है कि इलाके में महिलाओं के बीच मिसकैरेज के मामले बढ़ रहे हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। यानी मामला सिर्फ पशुओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे इलाके के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।

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सत्ताधारी पार्टी के विधायक ने ही खोला मोर्चा

इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इसे विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्ताधारी बीजेपी के ही विधायक विक्रांत पाटिल ने विधान परिषद में उठाया। पनवेल से जुड़े विक्रांत पाटिल ने सीधे प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सिडको प्रशासन की लापरवाही के चलते डंपिंग स्टेशन में खतरनाक रासायनिक कचरा डाला जा रहा है।

अपने आरोपों को पुख्ता करने के लिए पाटिल सदन में मरी हुई गायों की तस्वीरें और पानी की जांच रिपोर्ट तक ले आए। उनका कहना है कि जांच में प्रदूषण का स्तर तय सीमा से कई गुना ज्यादा निकला और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग शून्य पाई गई। साफ शब्दों में कहें तो यह पानी अब पूरी तरह जहर में बदल चुका है।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

मुद्दा गरमाते ही इस पर सियासत भी तेज हो गई। शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। विपक्ष का कहना है कि बीजेपी गौमाता के नाम पर राजनीति तो खूब करती है, लेकिन जब महाराष्ट्र में दूषित पानी से गायें मर रही हैं और महिलाओं की सेहत दांव पर लगी है, तब सरकार की जवाबदेही कहीं नजर नहीं आती। विपक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि राज्य में न तो गौमाता सुरक्षित हैं और न ही माताएं।

मंत्रियों ने दिया कार्रवाई का भरोसा

दबाव बढ़ने पर सरकार ने भी मामले को गंभीर माना और कार्रवाई का आश्वासन दिया। रायगढ़ के मंत्री भरत गोगावले ने बताया कि उद्योग मंत्री ने तुरंत जांच और प्रदूषण रोकने के निर्देश दे दिए हैं, और जो भी अधिकारी दोषी पाए जाएंगे उन पर कार्रवाई होगी।

वहीं, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने भी माना कि यह एक बहु-विभागीय मामला है। उनके मुताबिक इसे सुलझाने के लिए पर्यावरण, शहरी विकास, सिंचाई और जल संरक्षण विभागों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने भी दोहराया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल

लेकिन असली सवाल अब भी बना हुआ है। अगर पानी सच में इतना जहरीला हो चुका है कि पशुओं की जान जा रही है और इंसानों की सेहत खतरे में है, तो आखिर इसका जिम्मेदार कौन है? पनवेल को तो तीसरी मुंबई के सपने दिखाए जा रहे हैं, मगर यहां रहने वालों को क्या साफ पानी और सुरक्षित माहौल भी नसीब होगा? फिलहाल जनता ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रही है। अगर जल्द कोई पुख्ता कदम नहीं उठाया गया, तो यह मुद्दा सड़कों से लेकर विधानसभा तक एक बड़ा सियासी तूफान खड़ा कर सकता है।

सवाल-जवाब

पनवेल में कितनी गायों की मौत हुई और कितनी बीमार हुईं?
एक घंटे के भीतर सात गायों की मौत हो गई और 19 अन्य गायें विषबाधा का शिकार हुईं।
गायों की मौत की वजह क्या बताई जा रही है?
आरोप है कि एक डंपिंग ग्राउंड से निकलने वाला रासायनिक और दूषित पानी तालाबों व जलस्रोतों में मिल रहा है, जिससे यह जानलेवा हो गया।
यह मुद्दा विधान परिषद में किसने उठाया?
इसे सत्ताधारी बीजेपी के ही विधायक विक्रांत पाटिल ने उठाया, जो पनवेल से जुड़े हैं।
पानी की जांच में क्या सामने आया?
जांच में प्रदूषण का स्तर तय सीमा से कई गुना ज्यादा पाया गया और पानी में ऑक्सीजन की मात्रा लगभग शून्य थी।
इंसानों की सेहत पर क्या असर बताया जा रहा है?
स्थानीय लोगों का दावा है कि इलाके में महिलाओं में मिसकैरेज के मामले बढ़ रहे हैं और कैंसर जैसी बीमारियों की शिकायतें सामने आ रही हैं।
सरकार ने इस पर क्या कहा?
मंत्री भरत गोगावले ने कहा कि उद्योग मंत्री ने तुरंत जांच और प्रदूषण रोकने के निर्देश दिए हैं, और पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने इसे बहु-विभागीय मामला बताया, दोनों ने दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा दिया।
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