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ड्रग टेस्ट में फेल एयर इंडिया के पायलट बर्खास्त, पीएफ और भविष्य को लेकर क्या हैं नियमबिहार
5 सित॰ 2026, 4:55 pm (20 दिन पहले)· 2

ड्रग टेस्ट में फेल एयर इंडिया के पायलट बर्खास्त, पीएफ और भविष्य को लेकर क्या हैं नियम

थाईलैंड के फुकेट से उड़ान भरने से पहले रैंडम ड्रग टेस्ट में एयर इंडिया का एक पायलट पॉजिटिव पाया गया, जिसके बाद एयरलाइन ने उसे तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इस गंभीर लापरवाही के बाद पायलट के पीएफ, ग्रेच्युटी और भविष्य के करियर को लेकर कई बड़े कानूनी सवाल खड़े हो गए हैं।

थाईलैंड के फुकेट से नई दिल्ली आने वाली एयर इंडिया की अंतरराष्ट्रीय उड़ान से ठीक पहले एक गंभीर मामला सामने आया है। उड़ान भरने से पहले अनिवार्य रैंडम ड्रग टेस्ट के दौरान एयर इंडिया का एक पायलट पॉजिटिव पाया गया। सैकड़ों यात्रियों की सुरक्षा को ताक पर रखने वाले इस संवेदनशील मामले पर तुरंत संज्ञान लेते हुए एयरलाइन मैनेजमेंट ने बिना किसी नरमी के पायलट को तत्काल प्रभाव से नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद अब उस पायलट के भविष्य और करियर को लेकर कई प्रकार के कानूनी सवाल उठने लगे हैं।

हवा में हजारों फीट की ऊंचाई पर सफर कर रहे यात्रियों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी कॉकपिट में बैठे पायलट के कंधों पर होती है। ऐसे में किसी भी प्रकार का नशा करके विमान उड़ाना या उड़ाने का प्रयास करना एविएशन इंडस्ट्री में एक अत्यंत गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस घटना के सामने आने के बाद कई कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या इस तरह की बर्खास्तगी के बाद भी कर्मचारी को उसका जमा पीएफ और ग्रेच्युटी का पैसा मिल पाएगा। इसके अलावा यह भी सवाल है कि क्या महानिदेशालय ऐसे पायलट का लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर देगा और क्या भविष्य में उसे किसी अन्य एयरलाइन में काम करने का मौका मिलेगा।

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फुकेट एयरपोर्ट पर रैंडम जांच के दौरान खुला राज

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के कड़े दिशा-निर्देशों के तहत देश की सभी एविएशन कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने क्रू मेंबर्स का समय-समय पर रैंडम अल्कोहल और ड्रग टेस्ट करवाएं। फुकेट एयरपोर्ट पर जब टेक-ऑफ से ठीक पहले इस पायलट का सैंपल लिया गया, तो जांच रिपोर्ट में प्रतिबंधित नशीले पदार्थों के सेवन की पुष्टि हुई। जैसे ही यह रिपोर्ट सामने आई, एयर इंडिया ने अपनी शून्य सहनशीलता नीति के तहत त्वरित कदम उठाते हुए पायलट को सेवा से मुक्त कर दिया।

बर्खास्तगी के बाद पीएफ और ग्रेच्युटी के पैसों का क्या होगा

जब किसी कर्मचारी को गंभीर कदाचार के आरोपों के तहत नौकरी से निकाला जाता है, तब प्रोविडेंट फंड और ग्रेच्युटी को लेकर श्रम कानून क्या कहते हैं, यह समझना बेहद आवश्यक हो जाता है। कर्मचारी का भविष्य निधि खाता यानी पीएफ फंड पूरी तरह से उसका अपना कानूनी हक होता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के मौजूदा नियमों के अनुसार, कंपनी चाहे किसी भी वजह से कर्मचारी को सेवा से बर्खास्त क्यों न करे, उसके पीएफ अकाउंट में जमा मूल राशि और कंपनी का योगदान कोई नहीं छीन सकता है। इसलिए यह पायलट अपने पीएफ का पैसा नियमानुसार क्लेम कर सकता है।

दूसरी तरफ ग्रेच्युटी को लेकर नियम थोड़े अलग हैं। पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के प्रावधानों के अंतर्गत कंपनियों को कुछ विशेष कानूनी अधिकार प्रदान किए गए हैं। इसके अनुसार, यदि कोई कर्मचारी अपने आचरण से कंपनी को भारी वित्तीय या नैतिक क्षति पहुंचाता है, तो उसकी ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, गंभीर अनुशासनहीनता के आधार पर नौकरी से हटाए जाने की स्थिति में कंपनी द्वारा ग्रेच्युटी की राशि जब्त भी की जा सकती है।

क्या इस पायलट को अब किसी अन्य एयरलाइन में नौकरी मिल पाएगी

इस सवाल का सीधा और स्पष्ट जवाब यह है कि ऐसा होना लगभग असंभव है। जब भी किसी पायलट को ड्रग्स या शराब की जांच में असफल होने के कारण सेवा से बर्खास्त किया जाता है, तो इसकी आधिकारिक सूचना तत्काल नियामक यानी डीजीसीए को भेज दी जाती है। डीजीसीए के नियम इस मामले में बेहद कड़े और स्पष्ट हैं। यदि कोई पायलट पहली बार इस तरह की जांच में पॉजिटिव पाया जाता है, तो उसके फ्लाइंग लाइसेंस को 3 महीने से लेकर 1 साल तक के लिए निलंबित कर दिया जाता है।

यदि इस तरह की गलती दोबारा दोहराई जाती है, तो संबंधित पायलट का फ्लाइंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है। किसी भी वैध लाइसेंस और डीजीसीए की आधिकारिक क्लियरेंस के बिना भारत या विदेश की कोई भी कमर्शियल एयरलाइन ऐसे पायलट को अपने यहां कॉकपिट संभालने का मौका नहीं देती है।

ब्लैकलिस्टिंग और एविएशन डेटाबेस का पूरे करियर पर असर

वर्तमान समय में दुनिया भर की एयरलाइंस अपने पायलट्स का बैकग्राउंड वेरिफिकेशन बेहद कड़ाई से करवाती हैं। अंतरराष्ट्रीय एविएशन डेटाबेस में गंभीर अनुशासनहीनता और ड्रग्स सेवन का टैग लग जाने के बाद कोई भी एयरलाइन कंपनी अपने यात्रियों की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का जोखिम उठाने को तैयार नहीं होती है। इसका सीधा अर्थ यह निकलता है कि इस एक बड़ी गलती ने इस पायलट के पूरे फ्लाइंग करियर पर हमेशा के लिए पूर्णविराम लगा दिया है।

सवाल-जवाब

एयर इंडिया के पायलट के साथ फुकेट में क्या हुआ?
फुकेट से नई दिल्ली आने वाली उड़ान से पहले हुए रैंडम ड्रग टेस्ट में पायलट पॉजिटिव पाया गया।
ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव आने के बाद एयरलाइन ने क्या कदम उठाया?
एयर इंडिया ने शून्य सहनशीलता नीति के तहत तुरंत कार्रवाई करते हुए पायलट को नौकरी से बर्खास्त कर दिया।
क्या बर्खास्तगी के बाद पायलट को पीएफ का पैसा मिलेगा?
हाँ, ईपीएफओ के नियमों के अनुसार पीएफ अकाउंट में जमा पैसा कर्मचारी का हक होता है और उसे यह मिल सकता है।
क्या गंभीर मामलों में ग्रेच्युटी रोकी जा सकती है?
पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत गंभीर कदाचार और अनुशासनहीनता के मामले में ग्रेच्युटी रोकी या जब्त की जा सकती है।
पहली बार ड्रग टेस्ट में फेल होने पर डीजीसीए क्या कार्रवाई करता है?
पहली बार पॉजिटिव आने पर पायलट का फ्लाइंग लाइसेंस 3 से 6 महीने या 1 साल के लिए सस्पेंड कर दिया जाता है।
बार-बार ड्रग टेस्ट में फेल होने पर क्या सजा मिलती है?
बार-बार नियम तोड़ने पर पायलट का फ्लाइंग लाइसेंस हमेशा के लिए रद्द कर दिया जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·19 दिन पहले

यह घटना न केवल उड़ान सुरक्षा पर एक गंभीर प्रहार है, बल्कि यह विमानन क्षेत्र में विनियामक अनुपालन की सख़्ती को भी उजागर करती है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के नियमों और विमान नियम, 1937 के प्रावधानों के तहत कॉकपिट क्रू द्वारा मादक पदार्थों का सेवन एक संज्ञेय और दंडनीय अपराध है। आपराधिक जांच आगे बढ़ने पर विमानन नियामक द्वारा लाइसेंस का आजीवन निरस्त होना तय माना जा रहा है।

Rohan Verma@rohan-verma·19 दिन पहले

यह प्रकरण केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे एयरलाइंस की आंतरिक निगरानी प्रणालियों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े होते हैं। विदेशी धरती पर उड़ान से ठीक पहले इस तरह की गंभीर लापरवाही सामने आना यह दर्शाता है कि बेस स्टेशन से बाहर निकलने वाले कर्मियों के लिए रैंडम स्क्रीनिंग के प्रोटोकॉल को और अधिक कड़ा करने की तत्काल आवश्यकता है।

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